PMLA 45अध्याय VII · Special Courts
धारा 45 · अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) 1 [दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के तहत किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति को जमानत पर या अपने निजी मुचलके पर तब तक रिहा नहीं किया जाएगा जब तक कि--]
(i) लोक अभियोजक को ऐसी रिहाई के आवेदन का विरोध करने का अवसर दिया गया है; और
(ii) जहां लोक अभियोजक आवेदन का विरोध करता है, वहां न्यायालय संतुष्ट है कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि वह ऐसे अपराध का दोषी नहीं है और जमानत पर रहते हुए उसके द्वारा कोई अपराध करने की संभावना नहीं है:
बशर्ते कि कोई व्यक्ति, जिसकी आयु सोलह वर्ष से कम हो, या जो महिला हो, या जो बीमार या दुर्बल हो, 3 [या जिस पर अकेले या अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर एक करोड़ रुपये से कम की राशि के धन शोधन का आरोप हो] उसे जमानत पर रिहा किया जा सकता है, यदि विशेष न्यायालय ऐसा निर्देश दे:
इसके अलावा, विशेष न्यायालय धारा 4 के तहत दंडनीय किसी भी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा जब तक कि लिखित में शिकायत न की गई हो--
(i) निदेशक; या
(ii) केंद्र सरकार या राज्य सरकार का कोई अधिकारी जिसे केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में जारी किए गए सामान्य या विशेष आदेश द्वारा लिखित रूप में अधिकृत किया गया हो।
4 [(1ए) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) या इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान में निहित किसी बात के बावजूद, कोई भी पुलिस अधिकारी इस अधिनियम के तहत किसी अपराध की जांच तब तक नहीं करेगा जब तक कि उसे केंद्र सरकार द्वारा सामान्य या विशेष आदेश द्वारा विशेष रूप से अधिकृत न किया गया हो, और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।]
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट जमानत देने पर सीमा, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) या जमानत देने पर लागू किसी अन्य कानून के तहत सीमाओं के अतिरिक्त है।
6 [ स्पष्टीकरण.-- संदेह दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि "संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध" अभिव्यक्ति का अर्थ यह होगा और हमेशा से यही माना जाएगा कि इस अधिनियम के अंतर्गत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध होंगे, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) में इसके विपरीत कुछ भी निहित होने के बावजूद, और तदनुसार इस अधिनियम के अंतर्गत अधिकृत अधिकारी धारा 19 के अंतर्गत शर्तों की पूर्ति और इस धारा में निहित शर्तों के अधीन रहते हुए, बिना वारंट के किसी आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए सशक्त हैं।]
(i) लोक अभियोजक को ऐसी रिहाई के आवेदन का विरोध करने का अवसर दिया गया है; और
(ii) जहां लोक अभियोजक आवेदन का विरोध करता है, वहां न्यायालय संतुष्ट है कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि वह ऐसे अपराध का दोषी नहीं है और जमानत पर रहते हुए उसके द्वारा कोई अपराध करने की संभावना नहीं है:
बशर्ते कि कोई व्यक्ति, जिसकी आयु सोलह वर्ष से कम हो, या जो महिला हो, या जो बीमार या दुर्बल हो, 3 [या जिस पर अकेले या अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर एक करोड़ रुपये से कम की राशि के धन शोधन का आरोप हो] उसे जमानत पर रिहा किया जा सकता है, यदि विशेष न्यायालय ऐसा निर्देश दे:
इसके अलावा, विशेष न्यायालय धारा 4 के तहत दंडनीय किसी भी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा जब तक कि लिखित में शिकायत न की गई हो--
(i) निदेशक; या
(ii) केंद्र सरकार या राज्य सरकार का कोई अधिकारी जिसे केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में जारी किए गए सामान्य या विशेष आदेश द्वारा लिखित रूप में अधिकृत किया गया हो।
4 [(1ए) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) या इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान में निहित किसी बात के बावजूद, कोई भी पुलिस अधिकारी इस अधिनियम के तहत किसी अपराध की जांच तब तक नहीं करेगा जब तक कि उसे केंद्र सरकार द्वारा सामान्य या विशेष आदेश द्वारा विशेष रूप से अधिकृत न किया गया हो, और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।]
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट जमानत देने पर सीमा, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) या जमानत देने पर लागू किसी अन्य कानून के तहत सीमाओं के अतिरिक्त है।
6 [ स्पष्टीकरण.-- संदेह दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि "संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध" अभिव्यक्ति का अर्थ यह होगा और हमेशा से यही माना जाएगा कि इस अधिनियम के अंतर्गत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध होंगे, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) में इसके विपरीत कुछ भी निहित होने के बावजूद, और तदनुसार इस अधिनियम के अंतर्गत अधिकृत अधिकारी धारा 19 के अंतर्गत शर्तों की पूर्ति और इस धारा में निहित शर्तों के अधीन रहते हुए, बिना वारंट के किसी आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए सशक्त हैं।]
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