OHBEPF Rules 13
धारा 13 · निधि से उधार लेना और वसूली करना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
निधि से उधार लेना और उसकी वसूली करना।
- (ए) अध्यक्ष के विवेक पर, किसी भी स्थिति में ग्राहक के स्वयं के अंशदान और उस पर ब्याज से अधिक न होने वाला अस्थायी अग्रिम, निधि में उसके खाते में जमा राशि में से, ग्राहक को आवेदन पर निम्नलिखित शर्त के अधीन प्रदान किया जा सकता है, अर्थात्: (ए) कोई भी अग्रिम तब तक प्रदान नहीं किया जाएगा जब तक अध्यक्ष संतुष्ट न हो जाएं कि आवेदक की आर्थिक स्थिति इसे उचित ठहराती है, और यह वचन दिया जाता है कि इसे निम्नलिखित में से किसी एक उद्देश्य पर ही खर्च किया जाएगा, अन्यथा नहीं: (i) ग्राहक या उसके परिवार के किसी सदस्य की लंबी बीमारी से संबंधित खर्चों का भुगतान करने के लिए, या विशेष परिस्थितियों में, उस पर पूर्णतः आश्रित किसी अन्य व्यक्ति के खर्चों का भुगतान करने के लिए; (ii) खंड (i) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति से संबंधित विवाह, अंत्येष्टि या किसी अन्य समारोह के संबंध में ग्राहक की स्थिति के अनुरूप अनिवार्य खर्चों का भुगतान करने के लिए; (iii) किसी अन्य व्यय या दायित्व को पूरा करने के लिए, जो अध्यक्ष की राय में असाधारण हो और ग्राहक के सामान्य साधनों से परे हो: बशर्ते कि अध्यक्ष द्वारा लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले विशेष कारणों को छोड़कर, अग्रिम प्रदान नहीं किया जाएगा।(1)
तीन महीने के वेतन या निधि में ग्राहक द्वारा स्वयं जमा की गई सदस्यता राशि और उस पर ब्याज की आधी राशि, इनमें से जो भी कम हो, से अधिक हो; या(2)
सभी पिछले अग्रिमों के ब्याज सहित अंतिम भुगतान के बाद कम से कम बारह महीने बीत जाने तक अनुदान दिया जाएगा, जब तक कि पहले से दी गई राशि उप-खंड (1) के तहत स्वीकार्य राशि के दो-तिहाई से अधिक न हो।(बी)
(क)
अध्यक्ष के निर्देशानुसार अग्रिम राशि ग्राहक से समान मासिक किस्तों में वसूल की जाएगी, परन्तु ऐसी किस्तों की संख्या किसी भी स्थिति में बारह से कम नहीं होगी, जब तक कि ग्राहक अन्यथा विकल्प न चुने, और चौबीस से अधिक नहीं होगी। ग्राहक अपनी इच्छा अनुसार एक माह में एक से अधिक किस्तें चुका सकता है। प्रत्येक किस्त पूरे रुपये की होगी, और किस्तों के निर्धारण के लिए आवश्यक होने पर अग्रिम राशि को बढ़ाया या घटाया जा सकता है।(ख)
अग्रिम राशि दिए जाने के बाद जब ग्राहक को पहली बार पूरे महीने का वेतन प्राप्त होगा, तब से वसूली शुरू हो जाएगी। ग्राहक की सहमति के बिना, छुट्टी पर रहने या निर्वाह भत्ता प्राप्त करने के दौरान वसूली नहीं की जाएगी।(ग)
इस नियम के तहत की गई वसूली को निधि में ग्राहक के खाते में जमा किया जाएगा।(सी)
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