OGP Act 8
धारा 8 · वार्डों का गठन और परिसीमन
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1)
किसी ग्राम के गठन के तुरंत बाद, कलेक्टर ग्राम पंचायत के गठन के उद्देश्य से, उस ग्राम को जिन वार्डों में विभाजित किया जाना है, उनकी संख्या और प्रत्येक वार्ड का क्षेत्रफल निर्धारित करेगा और वार्डों की संख्या और प्रत्येक वार्ड के क्षेत्रफल को दर्शाते हुए एक विवरण तैयार करेगा, जिसे वह निर्धारित अवधि के लिए निर्धारित तरीके से प्रकाशित करेगा और संबंधित व्यक्तियों से उक्त अवधि के भीतर आपत्तियां दर्ज करने का अनुरोध करेगा: [बशर्ते कि-] [उड़ीसा राजपत्र असाधारण संख्या 426/18.4.1994-अधिसूचना संख्या 6139-विधायी/18.4.1994 द्वारा प्रतिस्थापित।](i)
ऐसे वार्डों की संख्या का निर्धारण संविधान के अनुच्छेद 243-सी के प्रावधानों के अधीन होगा; [* * *] [उड़ीसा राजपत्र असाधारण संख्या 1391/12.12.1995-अधिसूचना संख्या 19454 विधायी/12.12.1995 द्वारा हटा दिया गया।](ii)
किसी ग्राम में वार्डों की कुल संख्या ग्यारह से कम और पच्चीस से अधिक नहीं होगी; और [उड़ीसा राजपत्र असाधारण संख्या 1391/12.12.1995-अधिसूचना संख्या 19454 विधायी/12.12.1995 द्वारा प्रतिस्थापित।](iii)
[प्रत्येक वार्ड की जनसंख्या, जहाँ तक संभव हो, बराबर होगी।] [उड़ीसा राजपत्र असाधारण संख्या 1391/12.12.1995-अधिसूचना संख्या 19454 विधायी/12.12.1995 द्वारा सम्मिलित।](2)
कलेक्टर सभी आपत्तियों पर विचार करने और आगे की जांच करने के बाद, जैसा वह आवश्यक समझे, विवरण में आवश्यक परिवर्तन करवाएगा और अंत में संशोधित विवरण को निर्धारित तरीके से प्रकाशित करेगा और इसके बाद विवरण में दर्शाए गए अनुसार ग्रामों का वार्डों में विभाजन अंतिम हो जाएगा।(3)
यदि किसी ग्राम की जनसंख्या, जनगणना के प्रासंगिक आंकड़ों के अनुसार, पिछली जनगणना में दर्ज जनसंख्या से अधिक हो गई है, तो कलेक्टर ग्राम के वार्डों का पुनः परिसीमन कर सकता है और जहां आवश्यक हो, नए वार्ड बना सकता है, और ऐसा करने में वह उसी प्रक्रिया का पालन करेगा जो उपधारा (1) और (2) के अंतर्गत वार्डों के विभाजन के संबंध में निर्धारित है।इस धारा पर आपका निजी नोट
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