MB Act 3
धारा 3 · परिभाषाए
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, ‒
(क) “समुचित सरकार” से ऐसे स्थापन के संबंध में, जो खान हैं ऐसा स्थापन हैं जिसमें लोगों को घुड़सवारी, कलाबाजी और अन्य करतबों के प्रदर्शन के लिए नियोजित किया जाता हैं, केन्द्रीय सरकार और किसी अन्य स्थापन के संबंध में राज्य सरकार अभिप्रेत हैं;
(ख) “शिशु” के अंतर्गत मॄतजात शिशु भी हैं;
(ग) “प्रसव” से शिशु का जन्म अभिप्रेत हैं;
(घ) “नियोजक” से –
(1) किसी ऐसे स्थापन के संबंध में जो सरकार के नियंत्रण के अधीन हैं, कर्मचारियों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति या प्राधिकारी, या जहां कोई भी व्यक्ति या प्राधिकारी ऐसे नियुक्त नहीं हैं वहां विभागाध्यक्ष, अभिप्रेत हैं;
(2) किसी स्थानीय प्राधिकारी के अधीन के स्थापन के संबंध में, कर्मचारियों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए ऐसे प्राधिकारी द्वारा नियुक्त व्यक्ति या जहां कोई भी व्यक्ति ऐसे नियुक्त नहीं हैं, वहां उस स्थानीय प्राधिकारी का मुख्य कार्यपालक आफिसर अभिप्रेत हैं;
(3) किसी अन्य दशा में, वह व्यक्ति या वह प्राधिकारी जो स्थापन के कार्यकलाप पर अंतिम नियंत्रण रखता हैं और जहां उक्त कार्यकलाप किसी अन्य व्यक्ति को सौंपा गया हैं, चाहे वह प्रबंधक, प्रबंध-निदेशक, प्रबंध-अभिकर्ता कहलाता हैं या किसी अन्य नाम से पुकारा जाता हैं, वहां ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत हैं;
(4) “स्थापन” से निम्नलिखित अभिप्रेत हैं –
कोई कारखाना;
कोई खान;
कोई बागान;
कोई ऐसा स्थापन जिसमें लोगों को घुड़सवारी, कलाबाजी, और अन्य करतबों के प्रदर्शन के लिए नियोजित किया जाता हैं; कोई दुकान या स्थापन; या
(5) कोई ऐसा स्थापन जिसे इस अधिनियम के उपबंध धारा 2 की उपधारा (1) के अधीन लागू घोषित किए गए हैं;
(6) “कारखाना” से कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) की धारा 2 के खंड (ड) में यथापरिभाषित कारखाना अभिप्रेत हैं;
(7) “निरीक्षक” से धारा 14 के अधीन नियुक्त निरीक्षक अभिप्रेत हैं;
(8) “प्रसूति प्रसुविधा” से धारा 5 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट संदाय अभिप्रेत हैं;
(जक) “गर्भ का चिकित्सीय समापन” से गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम, 1971 (1971 का 34) के उपबन्धों के अधीन अनुज्ञेय गर्भ का समापन अभिप्रेत हैं;
(9) “खान” से खान अधिनियम, 1952 (1952 का 35) की धारा 2 के खंड (ञ) में यथापरिभाषित खान अभिप्रेत हैं;
(10) “गर्भपात” से गर्भावस्था के छब्बीसवें सप्ताह के पूर्व या दौरान की किसी कालावधि में सगर्भ गर्भाशय की अंतर्वस्तुओं का निष्कासन अभिप्रेत हैं, किन्तु इसके अंतर्गत ऐसा गर्भपात नहीं आता हैं जिसका कारित किया जाना भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अधीन दंडनीय हैं;
(11) “बागान” से बागान श्रम अधिनियम, 1951 (1951 का 69) की धारा 2 के खंड (च) में यथापरिभाषित बागान अभिप्रेत हैं;
(12) “विहित” से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत हैं ;
(13) “राज्य सरकार” से किसी संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में उसका प्रशासक अभिप्रेत हैं;
(14) “मजदूरी” से वह सब पारिश्रमिक अभिप्रेत हैं जो किसी स्त्री को, नकदी में संदत्त किया गया या यदि नियोजन की संविदा के अभिव्यक्त या विवक्षित निबंधनों की पूर्ति हो गई होती तो संदेय होता और इसके अंतर्गत निम्नलिखित भी आते हैं –
ऐसे नकद भत्ते (जिनके अंतर्गत मंहगाई भत्ता और गृह भाटक भत्ता भी हैं) जिनकी कोई स्त्री तत्समय हकदार हो;
प्रोत्साहन बोनस; तथा
खाद्यान्नों या अन्य वस्तुओं के रियायती प्रदाय का धन मूल्य,
किन्तु इसके अंतर्गत निम्नलिखित नहीं हैं –
1995 के अधिनियम संख्यांक 29 की धारा 2 द्वारा (1.2.1996 से) अंत: स्थापित ।
प्रोत्साहन बोनस से भिन्न कोई बोनस;
अतिकालिक उपार्जन और जुर्मानों के लिए की गई कोई कटौती या संदाय;
किसी पेंशन निधि या भविष्य निधि में या उस स्त्री की प्रसुविधा के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन नियोजक द्वारा संदत्त या संदेय कोई अभिदाय; तथा
सेवा के पर्यवसान फर संदेय कोई उपदान;
(ण) “स्त्री” से किसी स्थापन में मजदूरी पर नियोजित स्त्री अभिप्रेत हैं चाहे वह सीधे नियोजित हो या किसी अभिकरण के माध्यम से ।
(क) “समुचित सरकार” से ऐसे स्थापन के संबंध में, जो खान हैं ऐसा स्थापन हैं जिसमें लोगों को घुड़सवारी, कलाबाजी और अन्य करतबों के प्रदर्शन के लिए नियोजित किया जाता हैं, केन्द्रीय सरकार और किसी अन्य स्थापन के संबंध में राज्य सरकार अभिप्रेत हैं;
(ख) “शिशु” के अंतर्गत मॄतजात शिशु भी हैं;
(ग) “प्रसव” से शिशु का जन्म अभिप्रेत हैं;
(घ) “नियोजक” से –
(1) किसी ऐसे स्थापन के संबंध में जो सरकार के नियंत्रण के अधीन हैं, कर्मचारियों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति या प्राधिकारी, या जहां कोई भी व्यक्ति या प्राधिकारी ऐसे नियुक्त नहीं हैं वहां विभागाध्यक्ष, अभिप्रेत हैं;
(2) किसी स्थानीय प्राधिकारी के अधीन के स्थापन के संबंध में, कर्मचारियों के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए ऐसे प्राधिकारी द्वारा नियुक्त व्यक्ति या जहां कोई भी व्यक्ति ऐसे नियुक्त नहीं हैं, वहां उस स्थानीय प्राधिकारी का मुख्य कार्यपालक आफिसर अभिप्रेत हैं;
(3) किसी अन्य दशा में, वह व्यक्ति या वह प्राधिकारी जो स्थापन के कार्यकलाप पर अंतिम नियंत्रण रखता हैं और जहां उक्त कार्यकलाप किसी अन्य व्यक्ति को सौंपा गया हैं, चाहे वह प्रबंधक, प्रबंध-निदेशक, प्रबंध-अभिकर्ता कहलाता हैं या किसी अन्य नाम से पुकारा जाता हैं, वहां ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत हैं;
(4) “स्थापन” से निम्नलिखित अभिप्रेत हैं –
कोई कारखाना;
कोई खान;
कोई बागान;
कोई ऐसा स्थापन जिसमें लोगों को घुड़सवारी, कलाबाजी, और अन्य करतबों के प्रदर्शन के लिए नियोजित किया जाता हैं; कोई दुकान या स्थापन; या
(5) कोई ऐसा स्थापन जिसे इस अधिनियम के उपबंध धारा 2 की उपधारा (1) के अधीन लागू घोषित किए गए हैं;
(6) “कारखाना” से कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63) की धारा 2 के खंड (ड) में यथापरिभाषित कारखाना अभिप्रेत हैं;
(7) “निरीक्षक” से धारा 14 के अधीन नियुक्त निरीक्षक अभिप्रेत हैं;
(8) “प्रसूति प्रसुविधा” से धारा 5 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट संदाय अभिप्रेत हैं;
(जक) “गर्भ का चिकित्सीय समापन” से गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम, 1971 (1971 का 34) के उपबन्धों के अधीन अनुज्ञेय गर्भ का समापन अभिप्रेत हैं;
(9) “खान” से खान अधिनियम, 1952 (1952 का 35) की धारा 2 के खंड (ञ) में यथापरिभाषित खान अभिप्रेत हैं;
(10) “गर्भपात” से गर्भावस्था के छब्बीसवें सप्ताह के पूर्व या दौरान की किसी कालावधि में सगर्भ गर्भाशय की अंतर्वस्तुओं का निष्कासन अभिप्रेत हैं, किन्तु इसके अंतर्गत ऐसा गर्भपात नहीं आता हैं जिसका कारित किया जाना भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) के अधीन दंडनीय हैं;
(11) “बागान” से बागान श्रम अधिनियम, 1951 (1951 का 69) की धारा 2 के खंड (च) में यथापरिभाषित बागान अभिप्रेत हैं;
(12) “विहित” से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत हैं ;
(13) “राज्य सरकार” से किसी संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में उसका प्रशासक अभिप्रेत हैं;
(14) “मजदूरी” से वह सब पारिश्रमिक अभिप्रेत हैं जो किसी स्त्री को, नकदी में संदत्त किया गया या यदि नियोजन की संविदा के अभिव्यक्त या विवक्षित निबंधनों की पूर्ति हो गई होती तो संदेय होता और इसके अंतर्गत निम्नलिखित भी आते हैं –
ऐसे नकद भत्ते (जिनके अंतर्गत मंहगाई भत्ता और गृह भाटक भत्ता भी हैं) जिनकी कोई स्त्री तत्समय हकदार हो;
प्रोत्साहन बोनस; तथा
खाद्यान्नों या अन्य वस्तुओं के रियायती प्रदाय का धन मूल्य,
किन्तु इसके अंतर्गत निम्नलिखित नहीं हैं –
1995 के अधिनियम संख्यांक 29 की धारा 2 द्वारा (1.2.1996 से) अंत: स्थापित ।
प्रोत्साहन बोनस से भिन्न कोई बोनस;
अतिकालिक उपार्जन और जुर्मानों के लिए की गई कोई कटौती या संदाय;
किसी पेंशन निधि या भविष्य निधि में या उस स्त्री की प्रसुविधा के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन नियोजक द्वारा संदत्त या संदेय कोई अभिदाय; तथा
सेवा के पर्यवसान फर संदेय कोई उपदान;
(ण) “स्त्री” से किसी स्थापन में मजदूरी पर नियोजित स्त्री अभिप्रेत हैं चाहे वह सीधे नियोजित हो या किसी अभिकरण के माध्यम से ।
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