IF Act 39अध्याय VI · Ofthe Duty on Timberand Other Forest-produce
धारा 39 · इमारती लकड़ी और अन्य वन-उपज पर शुल्क अधिरोपित करने की शक्ति
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केन्द्रीय सरकार ऐसी रीति से, ऐसे स्थानों में और ऐसी दरों पर, जैसी वह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा घोषित करे, उस सब इमारती लकड़ी या वन-उपज पर शुल्क उद्गृहीत कर सकेगी-
(क) जो गुउन राज्यक्षेत्रों में, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है। पैदा की जाती है और जिसके विषय में सरकार को कोई अधिकार प्राप्त है, या
(ख) जो उन राज्यक्षेत्रों के, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है।, बाहर के किसी स्थान से लाया जाता है।
(2) ऐसे हर मामले में, जिसमें ऐसे शुल्क की बाबत यह निर्दिष्ट किया गया है कि वह मूल्यानुसार उद्गृहीत किया जाए. [केन्द्रीय सरकार) वैसी ही अधिसूचना द्वारा, वह मूल्य नियत कर सकेगी जिस पर ऐसा शुल्क निर्धारित होगा।
(3) इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज पर जो शुल्क उस समय, जब वह अधिनियम किसी राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त होता है, राज्य सरकार के प्राधिकार के अधीन उसमें उद्गृहीत होते हैं, उन सब की बाबत यह समझा जाएगा कि वे इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन उद्गृहीत होते हैं और सम्यक् रूप से उद्गृहीत होते रहे हैं।
(4) जब तक कि संसद् द्वारा प्रतिकूल उपबन्ध नहीं किया जाता, राज्य सरकार इस धारा में किसी बात के होते हुए भी किसी शुल्क को लगातार उद्गृहीत कर सकेगी, जिसे वह संविधान] के प्रारंभ के पूर्व इस धारा के उस समय प्रवृत्त रूप में विधिपूर्णतः उद्गृहीत करती थीः
परन्तु इस उपधारा की कोई बात ऐसे किसी शुल्क का उद्यहण प्राधिकृत नहीं करती जो राज्य की इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज और राज्य के बाहर के स्थान की समरूप इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज के बीच पूर्वकथित के पक्ष में विभेद करता है, या जो राज्य के बाहर किसी स्थान की इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज के मामले में, किसी एक स्थान की इमारती लकड़ी या अन्य वन- उपज और अन्य स्थान की समरूप इमारती लकड़ी या वन-उपज के बीच विभेद करता है।।
(क) जो गुउन राज्यक्षेत्रों में, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है। पैदा की जाती है और जिसके विषय में सरकार को कोई अधिकार प्राप्त है, या
(ख) जो उन राज्यक्षेत्रों के, जिन पर इस अधिनियम का विस्तार है।, बाहर के किसी स्थान से लाया जाता है।
(2) ऐसे हर मामले में, जिसमें ऐसे शुल्क की बाबत यह निर्दिष्ट किया गया है कि वह मूल्यानुसार उद्गृहीत किया जाए. [केन्द्रीय सरकार) वैसी ही अधिसूचना द्वारा, वह मूल्य नियत कर सकेगी जिस पर ऐसा शुल्क निर्धारित होगा।
(3) इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज पर जो शुल्क उस समय, जब वह अधिनियम किसी राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त होता है, राज्य सरकार के प्राधिकार के अधीन उसमें उद्गृहीत होते हैं, उन सब की बाबत यह समझा जाएगा कि वे इस अधिनियम के उपबन्धों के अधीन उद्गृहीत होते हैं और सम्यक् रूप से उद्गृहीत होते रहे हैं।
(4) जब तक कि संसद् द्वारा प्रतिकूल उपबन्ध नहीं किया जाता, राज्य सरकार इस धारा में किसी बात के होते हुए भी किसी शुल्क को लगातार उद्गृहीत कर सकेगी, जिसे वह संविधान] के प्रारंभ के पूर्व इस धारा के उस समय प्रवृत्त रूप में विधिपूर्णतः उद्गृहीत करती थीः
परन्तु इस उपधारा की कोई बात ऐसे किसी शुल्क का उद्यहण प्राधिकृत नहीं करती जो राज्य की इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज और राज्य के बाहर के स्थान की समरूप इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज के बीच पूर्वकथित के पक्ष में विभेद करता है, या जो राज्य के बाहर किसी स्थान की इमारती लकड़ी या अन्य वन-उपज के मामले में, किसी एक स्थान की इमारती लकड़ी या अन्य वन- उपज और अन्य स्थान की समरूप इमारती लकड़ी या वन-उपज के बीच विभेद करता है।।
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