FC Act 3B
धारा 3B · अधिकारियों और सरकारी विभागों द्वारा किए गए अपराध।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [3ख. अधिकारियों और सरकारी विभागों द्वारा किए गए अपराध.-- (1) जहां इस अधिनियम के तहत कोई अपराध किया गया हो
(क) सरकार के किसी विभाग द्वारा, विभाग प्रमुख; या
(ख) किसी भी प्राधिकारी द्वारा, प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध किए जाने के समय प्राधिकारी के कामकाज के संचालन के लिए प्रत्यक्ष रूप से प्रभारी था और प्राधिकारी के प्रति उत्तरदायी था, साथ ही प्राधिकारी भी,
उसे अपराध का दोषी माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी और तदनुसार दंडित किया जाएगा:
बशर्ते कि इस उपधारा में निहित कोई भी बात विभाग के प्रमुख या खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को किसी भी दंड के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराएगी, यदि यह सिद्ध हो जाता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध को रोकने के लिए सभी उचित सावधानी बरती थी।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि अधिनियम के तहत दंडनीय कोई अपराध सरकार के किसी विभाग या उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी प्राधिकरण द्वारा किया गया हो और यह सिद्ध हो जाए कि वह अपराध विभाग के प्रमुख के अतिरिक्त किसी अधिकारी की सहमति या मिलीभगत से या उसकी लापरवाही के कारण किया गया हो, या किसी प्राधिकरण के मामले में उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्तियों के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति की सहमति या मिलीभगत से किया गया हो, तो ऐसे अधिकारी या व्यक्तियों को भी उस अपराध का दोषी माना जाएगा और उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी तथा तदनुसार दंडित किया जाएगा।]
(क) सरकार के किसी विभाग द्वारा, विभाग प्रमुख; या
(ख) किसी भी प्राधिकारी द्वारा, प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध किए जाने के समय प्राधिकारी के कामकाज के संचालन के लिए प्रत्यक्ष रूप से प्रभारी था और प्राधिकारी के प्रति उत्तरदायी था, साथ ही प्राधिकारी भी,
उसे अपराध का दोषी माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी और तदनुसार दंडित किया जाएगा:
बशर्ते कि इस उपधारा में निहित कोई भी बात विभाग के प्रमुख या खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति को किसी भी दंड के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराएगी, यदि यह सिद्ध हो जाता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध को रोकने के लिए सभी उचित सावधानी बरती थी।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि अधिनियम के तहत दंडनीय कोई अपराध सरकार के किसी विभाग या उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी प्राधिकरण द्वारा किया गया हो और यह सिद्ध हो जाए कि वह अपराध विभाग के प्रमुख के अतिरिक्त किसी अधिकारी की सहमति या मिलीभगत से या उसकी लापरवाही के कारण किया गया हो, या किसी प्राधिकरण के मामले में उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट व्यक्तियों के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति की सहमति या मिलीभगत से किया गया हो, तो ऐसे अधिकारी या व्यक्तियों को भी उस अपराध का दोषी माना जाएगा और उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी तथा तदनुसार दंडित किया जाएगा।]
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