ज़मानत का रास्ता
धाराएँ डालिए: ज़मानत अधिकार है या विवेक, किस न्यायालय में, और अग्रिम ज़मानत मिल सकती है या नहीं।
भा.ना.सु.सं. धारा 478 (जमानतीय), 480 (अजमानतीय — मजिस्ट्रेट), 483 (सत्र/उच्च न्यायालय) और 482 (अग्रिम जमानत) — पहले दं.प्र.सं. धारा 436, 437, 439 और 438। धाराएँ डालने पर बताया जाता है कि आपके मामले पर कौन-सी लागू है।
इस मामले में क्या संभव है
नीचे हर उत्तर पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा बताता है और कोष्ठक में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की पुरानी धारा।
1 जुलाई 2024 या उसके बाद दर्ज मामलों पर BNSS लागू होती है। मामले की तारीख नहीं दी गई, इसलिए यह धाराओं से अनुमान है।
ज़मानत
अज़मानतीकम से कम एक अपराध अज़मानती है: ज़मानत न्यायालय के विवेक पर है — मजिस्ट्रेट (धारा 480) या सत्र न्यायालय / उच्च न्यायालय (धारा 483)।
मृत्युदंड या आजीवन कारावास वाले अपराध में मजिस्ट्रेट ज़मानत नहीं दे सकता, जब तक आरोपी बच्चा, महिला, बीमार या अशक्त न हो (धारा 480(1) का परंतुक); ऐसे में आवेदन सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय में (धारा 483)।
- यदि लागू हो:यदि अपराध वाणिज्यिक मात्रा का है, तो ज़मानत के लिए दोहरी शर्तें: लोक अभियोजक की सुनवाई, और न्यायालय का यह मानना कि आरोपी दोषी नहीं है और ज़मानत पर अपराध नहीं करेगा। एनडीपीएस अधिनियम धारा 37(1)(b)
भा.ना.सु.सं. धारा 480 (दं.प्र.सं. धारा 437)भा.ना.सु.सं. धारा 483 (दं.प्र.सं. धारा 439)इन धाराओं के कारण: The Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 धारा 31A
अग्रिम ज़मानत
हाँगिरफ़्तारी की आशंका हो तो सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय से अग्रिम ज़मानत माँगी जा सकती है। कुछ विशेष अधिनियम इसे रोकते हैं, जैसे अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 18।
भा.ना.सु.सं. धारा 482 (दं.प्र.सं. धारा 438)इन धाराओं के कारण: The Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 धारा 31A
गिरफ़्तारी या नोटिस
नहींकम से कम एक अपराध में सात वर्ष से अधिक, आजीवन कारावास या मृत्युदंड है, इसलिए नोटिस वाला नियम लागू नहीं होता।
भा.ना.सु.सं. धारा 35(3) (दं.प्र.सं. धारा 41A)इन धाराओं के कारण: The Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 धारा 31A
डिफ़ॉल्ट ज़मानत
हाँपहली रिमांड से 90 दिन में पुलिस रिपोर्ट (आरोप-पत्र) दाखिल न हो, तो ज़मानत अधिकार बन जाती है — रिमांड का दिन पहला दिन गिना जाता है।
- यदि लागू हो:यदि अपराध वाणिज्यिक मात्रा का है, तो अवधि 60 या 90 नहीं, 180 दिन है (विशेष न्यायालय एक वर्ष तक बढ़ा सकता है)। एनडीपीएस अधिनियम धारा 36A(4)
भा.ना.सु.सं. धारा 187(3) (दं.प्र.सं. धारा 167(2))इन धाराओं के कारण: The Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 धारा 31A
विचाराधीन बंदी की रिहाई
नहींमृत्युदंड या आजीवन कारावास वाले अपराध पर यह लागू नहीं।
भा.ना.सु.सं. धारा 479 (दं.प्र.सं. धारा 436A)इन धाराओं के कारण: The Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 धारा 31A
अग्रिम ज़मानत आवेदन की रूपरेखा
प्रारूप खोलेंहर उपबंध का पूरा पाठ और विशेष अधिनियमों की रोक: जमानत — कौन-सा रास्ता
