संविधान (98वाँ संशोधन) अधिनियम, 2012
अवलोकन
लेख सम्मिलित किए गए
- 371-जे
प्रस्तावना-उद्देश्य एवं कारणों का विवरण-कर्नाटक की विधान सभा ने 17-3-2010 को एक प्रस्ताव पारित किया और राज्य की विधान परिषद ने भी 18-3-2010 को इसी प्रकार का एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कर्नाटक राज्य के हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम
भारत गणराज्य के तिरसठवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित अधिनियमित किया जाता है-
प्रस्तावना-उद्देश्य एवं कारण- कर्नाटक विधानसभा ने 17-3-2010 को और राज्य की विधान परिषद ने भी 18-3-2010 को हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान करने हेतु एक प्रस्ताव पारित किया। कर्नाटक सरकार ने भी इस क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधानों की आवश्यकता को स्वीकार किया है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य राज्य के सबसे पिछड़े क्षेत्र के विकास में तेजी लाना और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है, ताकि राज्य में अंतर-जिला और अंतर-क्षेत्रीय असमानताओं को कम किया जा सके।
2. इन विशेष प्रावधानों का उद्देश्य उक्त क्षेत्र में विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन के समान आवंटन हेतु एक संस्थागत तंत्र स्थापित करना है, साथ ही सेवा में स्थानीय कैडरों की व्यवस्था और शैक्षिक एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में आरक्षण के माध्यम से मानव संसाधनों को बढ़ाना और क्षेत्र से रोजगार को बढ़ावा देना है।
3. तदनुसार, संविधान में अनुच्छेद 371-जे को जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसमें कर्नाटक राज्य के पूर्ववर्ती हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे, जिनमें गुलबर्गा, बीदर, रायचूर, कोप्पल और यादगिर जिले शामिल हैं और इसके अतिरिक्त बेल्लारी जिला भी शामिल है। यह अनुच्छेद एक विशेष प्रावधान के रूप में निम्नलिखित प्रावधान करता है: (क) उपर्युक्त क्षेत्र के लिए एक अलग विकास बोर्ड की स्थापना; (ख) राज्य की समग्र आवश्यकताओं के अधीन उक्त क्षेत्र में विकास के लिए निधियों का समान आवंटन; (ग) क्षेत्र के निवासियों के लिए स्थानीय कैडरों के गठन के माध्यम से सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण; और (घ) क्षेत्र के निवासियों के लिए शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में आरक्षण।
4. विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास करता है।
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (अट्ठानवेवाँ संशोधन) अधिनियम, 2012 कहा जा सकता है।
(2) यह उस तिथि से लागू होगा जो केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
नए अनुच्छेद 371-J का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 371-I के बाद निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्- "371-J. कर्नाटक राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान।"
(1) राष्ट्रपति, कर्नाटक राज्य के संबंध में आदेश द्वारा, राज्यपाल के लिए किसी विशेष उत्तरदायित्व का प्रावधान कर सकता है-
(क) हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के लिए एक अलग विकास बोर्ड की स्थापना, इस प्रावधान के साथ कि बोर्ड के कामकाज पर एक रिपोर्ट प्रत्येक वर्ष राज्य विधान सभा के समक्ष रखी जाएगी;
(ख) उक्त क्षेत्र में विकासात्मक व्यय के लिए निधियों का न्यायसंगत आवंटन, राज्य की समग्र आवश्यकताओं के अधीन; और
(ग) उक्त क्षेत्र के लोगों को सार्वजनिक रोजगार, शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के मामलों में समान अवसर और सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, जो कि राज्य की समग्र आवश्यकताओं के अधीन होंगी।
(2) खंड (1) के उपखंड (सी) के तहत जारी किए गए आदेश में निम्नलिखित प्रावधान हो सकते हैं-
(क) हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में शैक्षिक और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में सीटों का एक निश्चित अनुपात उन छात्रों के लिए आरक्षित करना जो जन्म से या निवास से उस क्षेत्र के निवासी हों; और
(ख) हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में राज्य सरकार के अधीन और राज्य सरकार के नियंत्रण में किसी निकाय या संगठन में पदों या पदों के वर्गों की पहचान करना और ऐसे पदों के एक अनुपात को उस क्षेत्र के जन्म या अधिवास से संबंधित व्यक्तियों के लिए आरक्षित करना तथा उन पर सीधी भर्ती या पदोन्नति या किसी अन्य तरीके से नियुक्ति करना जैसा कि आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
