संविधान (99वाँ संशोधन) अधिनियम, 2014
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 124
- 127
- 128
- 217
- 222
- 224
- 224-ए
- 231
लेख सम्मिलित किए गए
- 124-ए
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम
भारत गणराज्य के पैंसठवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित अधिनियमित किया जाता है-
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
1. इसे 31 दिसंबर, 2014 को राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई और भारत के राजपत्र, अतिरिक्त, भाग II, खंड 1, दिनांक 31 दिसंबर, 2014, पृष्ठ 1-3, संख्या 49 में प्रकाशित किया गया।
उद्देश्यों एवं कारणों का विवरण.- सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (2) के अधीन और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। सर्वोच्च न्यायालय के तदर्थ न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति क्रमशः संविधान के अनुच्छेद 127 और अनुच्छेद 128 के खंड (1) के अधीन की जाती है। उच्च न्यायालयों के अतिरिक्त न्यायाधीशों और कार्यवाहक न्यायाधीशों की नियुक्ति अनुच्छेद 224 के अधीन और उच्च न्यायालयों की बैठकों के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 224-ए के अधीन की जाती है। न्यायाधीशों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण संविधान के अनुच्छेद 222 के खंड (1) के अधीन भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।
2. सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (1998) 7 एससीसी 739 मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (2) और अनुच्छेद 217 के खंड (1) की व्याख्या "परामर्श" के अर्थ के संबंध में "सहमति" के रूप में की थी। परिणामस्वरूप, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए एक प्रक्रिया ज्ञापन तैयार किया गया, जिसका पालन नियुक्ति के लिए किया जा रहा है।
3. प्रासंगिक संवैधानिक प्रावधानों, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों की समीक्षा और प्रख्यात न्यायविदों से परामर्श के बाद, यह महसूस किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सिफारिशें देने हेतु एक व्यापक राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की स्थापना की जानी चाहिए। उक्त आयोग न्यायपालिका, कार्यपालिका और प्रख्यात व्यक्तियों को अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत करने और प्रतिभागियों को जवाबदेह बनाने के लिए एक सार्थक भूमिका प्रदान करेगा, साथ ही चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता भी लाएगा।
4. संविधान (एक सौ इक्कीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2014 संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों में संशोधन करने और राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की स्थापना के लिए एक सक्षम संवैधानिक संशोधन है। प्रस्तावित विधेयक संविधान के अनुच्छेद 124 के स्थान पर नए अनुच्छेद 124-क, 124-ख और 124-स को जोड़ने का प्रयास करता है। उक्त विधेयक प्रस्तावित राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की संरचना और कार्यों का भी प्रावधान करता है। इसके अतिरिक्त, यह प्रावधान करता है कि संसद विधि द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को विनियमित कर सकती है और राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को अपने कार्यों के निर्वहन, नियुक्ति के लिए व्यक्तियों के चयन के तरीके और ऐसे अन्य मामलों के लिए विनियम द्वारा प्रक्रिया निर्धारित करने का अधिकार देती है जिन्हें आवश्यक समझा जाए।
5. प्रस्तावित विधेयक सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति की पद्धति को व्यापक बनाने, न्यायपालिका, कार्यपालिका और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
6. विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रयास करता है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 में इसे असंवैधानिक घोषित किया गया।
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (निन्यानवेवाँ संशोधन) अधिनियम, 2014 कहा जा सकता है।
(2) यह उस तिथि से लागू होगा जो केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
अनुच्छेद 124 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 124 में, खंड (2) में,--
(क) "सर्वोच्च न्यायालय और राज्यों के उच्च न्यायालयों के ऐसे न्यायाधीशों से परामर्श के बाद जिन्हें राष्ट्रपति इस उद्देश्य के लिए आवश्यक समझें" शब्दों के स्थान पर "अनुच्छेद 124-ए में निर्दिष्ट राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की सिफारिश पर" शब्द, अंक और अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ख) प्रथम परंतुक को हटा दिया जाएगा;
(ग) द्वितीय परंतुक में, "इसके अतिरिक्त परंतु कि" शब्दों के स्थान पर "इसके अतिरिक्त परंतु कि" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
नए अनुच्छेद 124-A, 124-B और 124-C का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 124 के बाद निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़े जाएंगे, अर्थात्-
124-ए. राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग।
(1) राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के नाम से एक आयोग गठित किया जाएगा, जिसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्-
(क) भारत के मुख्य न्यायाधीश, अध्यक्ष, पदेन;
(ख) भारत के मुख्य न्यायाधीश के बाद सर्वोच्च न्यायालय के दो अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश - पदेन सदस्य;
(ग) विधि एवं न्याय के प्रभारी केंद्रीय मंत्री - पदेन सदस्य;
(घ) दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों को समिति द्वारा नामित किया जाएगा जिसमें प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होंगे, या यदि ऐसा कोई विपक्ष का नेता नहीं है, तो लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता शामिल होंगे - सदस्य:
बशर्ते कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक या महिला वर्ग में से किसी एक प्रतिष्ठित व्यक्ति को मनोनीत किया जाएगा: बशर्ते कि किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति को तीन वर्ष की अवधि के लिए मनोनीत किया जाएगा और वह पुनः मनोनीत होने के पात्र नहीं होंगे।
(2) राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के किसी भी कार्य या कार्यवाही पर केवल आयोग के गठन में किसी रिक्ति या दोष के अस्तित्व के आधार पर प्रश्न नहीं उठाया जाएगा या उसे अमान्य नहीं ठहराया जाएगा।
124. -ख. आयोग के कार्य।-
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग का यह कर्तव्य होगा कि-
(क) भारत के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश और अन्य उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए व्यक्तियों की सिफारिश करना;
(ख) उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और अन्य न्यायाधीशों के एक उच्च न्यायालय से किसी अन्य उच्च न्यायालय में स्थानांतरण की सिफारिश करना; और
(ग) यह सुनिश्चित करना कि अनुशंसित व्यक्ति योग्यता और ईमानदारी वाला हो।
124. -सी. संसद की विधि बनाने की शक्ति।-
संसद विधि द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों तथा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को विनियमित कर सकती है तथा आयोग को अपने कार्यों के निर्वहन की प्रक्रिया, नियुक्ति हेतु व्यक्तियों के चयन का तरीका और ऐसे अन्य मामलों को, जिन्हें वह आवश्यक समझे, विनियमों द्वारा निर्धारित करने का अधिकार दे सकती है।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
अनुच्छेद 127 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 127 में खंड (1) में, "भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से" शब्दों के स्थान पर "भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा इसे भेजे गए संदर्भ पर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
अनुच्छेद 128 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 128 में, "भारत के मुख्य न्यायाधीश" शब्दों के स्थान पर "राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
अनुच्छेद 217 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 217 में, खंड (1) में, "परामर्श के बाद" शब्दों से शुरू होने वाले और "उच्च न्यायालय" शब्दों पर समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर, अनुच्छेद 124-ए में निर्दिष्ट राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की सिफारिश पर शब्द, अंक और अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
अनुच्छेद 222 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 222 में खंड (1) में, "भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद" शब्दों के स्थान पर, "अनुच्छेद 124-ए में निर्दिष्ट राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की सिफारिश पर" शब्द, अंक और अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
अनुच्छेद 224 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 224 में,--
(क) खंड (1) में, "राष्ट्रपति नियुक्ति कर सकता है" शब्दों के स्थान पर, "राष्ट्रपति राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के परामर्श से नियुक्ति कर सकता है" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ख) खंड (2) में, "राष्ट्रपति नियुक्ति कर सकता है" शब्दों के स्थान पर, "राष्ट्रपति राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के परामर्श से नियुक्ति कर सकता है" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
अनुच्छेद 224-A का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 224-ए में, "किसी राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश किसी भी समय राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से" शब्दों के स्थान पर "किसी राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा संदर्भित किए जाने पर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
अनुच्छेद 231 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 231 में खंड (2) में उपखंड (क) को हटा दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2015 एससीसी ऑनलाइन एससी 964 द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया।
