संविधान (9वाँ संशोधन) अधिनियम, 1960
अवलोकन
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- पहली अनुसूची
भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच 10 सितंबर, 1958, 23 अक्टूबर, 1959 और 11 जनवरी, 1960 को हुए समझौतों ने असम, पंजाब और पश्चिम बंगाल राज्यों और त्रिपुरा केंद्र शासित प्रदेश की सीमाओं से संबंधित भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच कुछ सीमा विवादों का निपटारा किया।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (नौवां संशोधन) विधेयक, 1960 (विधेयक संख्या 90, 1960) के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (नौवां संशोधन) अधिनियम, 1960 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच 10 सितंबर, 1958, 23 अक्टूबर, 1959 और 11 जनवरी, 1960 को हुए समझौतों ने असम, पंजाब और पश्चिम बंगाल राज्यों और त्रिपुरा केंद्र शासित प्रदेश की सीमाओं से संबंधित भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच कुछ सीमा विवादों का निपटारा किया।
इन समझौतों के अनुसार, सीमांकन के बाद कुछ क्षेत्र पाकिस्तान को हस्तांतरित किए जाने हैं। विशेष संदर्भ संख्या 1/1959 में सर्वोच्च न्यायालय की सलाहकार राय के आलोक में, इन क्षेत्रों के हस्तांतरण को प्रभावी बनाने के लिए संविधान की प्रथम अनुसूची में अनुच्छेद 368 से संबंधित कानून के तहत संशोधन प्रस्तावित है।
भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच हुए समझौतों के अनुसार कुछ क्षेत्रों को पाकिस्तान को हस्तांतरित करने के प्रावधान हेतु भारत के संविधान में और संशोधन करने के लिए एक अधिनियम।
भारत गणराज्य के ग्यारहवें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित किया जाता है कि:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (नौवां संशोधन) अधिनियम, 1960 कहा जा सकता है।
2. परिभाषाएँ।- इस अधिनियम में,-
(क) "नियुक्त दिन" से तात्पर्य ऐसी तिथि से है जिसे केंद्र सरकार, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, भारत-पाकिस्तान समझौतों के अनुसरण में पाकिस्तान को क्षेत्रों के हस्तांतरण की तिथि के रूप में नियुक्त करे, उन क्षेत्रों को हस्तांतरित करने के बाद जिनका उल्लेख प्रथम अनुसूची में किया गया है और इस उद्देश्य के लिए सीमांकित किया गया है, और विभिन्न राज्यों और त्रिपुरा केंद्र शासित प्रदेश से ऐसे क्षेत्रों के हस्तांतरण के लिए अलग-अलग तिथियां नियुक्त की जा सकती हैं;
(ख) "भारत-पाकिस्तान समझौते" से तात्पर्य भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच दिनांक 10 सितंबर, 1958, 23 अक्टूबर, 1959 और 11 जनवरी, 1960 को हुए समझौतों से है, जिनके प्रासंगिक अंश द्वितीय अनुसूची में दिए गए हैं;
(ग) "हस्तांतरित क्षेत्र" से तात्पर्य भारत-पाकिस्तान समझौतों में शामिल और प्रथम अनुसूची में संदर्भित क्षेत्रों के उस भाग से है जिसे उक्त समझौतों के अनुसरण में पाकिस्तान को हस्तांतरित करने के उद्देश्य से सीमांकित किया गया है।
संविधान की पहली अनुसूची का संशोधन
संविधान की प्रथम अनुसूची में निर्धारित तिथि से,-
(क) असम राज्य के क्षेत्रों से संबंधित अनुच्छेद में, अंत में "और संविधान (नौवां संशोधन) अधिनियम, 1960 की पहली अनुसूची के भाग 1 में निर्दिष्ट क्षेत्र" शब्द, कोष्ठक और अंक जोड़े जाएंगे;
(ख) पंजाब राज्य के क्षेत्रों से संबंधित अनुच्छेद में, अंत में "परन्तु संविधान (नौवां संशोधन) अधिनियम, 1960 की प्रथम अनुसूची के भाग द्वितीय में निर्दिष्ट क्षेत्रों को छोड़कर" शब्द, कोष्ठक और अंक जोड़े जाएंगे;
(ग) पश्चिम बंगाल राज्य के क्षेत्रों से संबंधित अनुच्छेद में, अंत में "परन्तु संविधान (नौवां संशोधन) अधिनियम, 1960 की प्रथम अनुसूची के भाग III में निर्दिष्ट क्षेत्रों को छोड़कर" शब्द, कोष्ठक और अंक जोड़े जाएंगे;
(घ) त्रिपुरा केंद्र शासित प्रदेश के विस्तार से संबंधित अनुच्छेद में, "परन्तु संविधान (नौवां संशोधन) अधिनियम, 1960 की प्रथम अनुसूची के भाग IV में निर्दिष्ट क्षेत्रों को छोड़कर" शब्द, कोष्ठक और अंक अंत में जोड़े जाएंगे।
अनुसूची 1
पहली अनुसूची
[धारा 2(क), 2(ग) और 3 देखें]
भाग I
दिनांक 10 सितंबर, 1958 के समझौते के अनुच्छेद 2 के मद (7) और दिनांक 23 अक्टूबर, 1959 के समझौते के अनुच्छेद 6 के मद (i) के संबंध में हस्तांतरित क्षेत्र।
भाग II
दिनांक 11 जनवरी, 1960 के समझौते के अनुच्छेद 1 के मद (i) और मद (iv) के संबंध में हस्तांतरित क्षेत्र।
भाग III
दिनांक 10 सितंबर, 1958 के समझौते के अनुच्छेद 2 के मद (3), मद (5) और मद (10) तथा दिनांक 23 अक्टूबर, 1959 के समझौते के अनुच्छेद 4 के संबंध में हस्तांतरित क्षेत्र।
भाग IV
दिनांक 10 सितंबर, 1958 के समझौते के अनुच्छेद 2 के मद (8) के संबंध में हस्तांतरित क्षेत्र।
अनुसूची 2
दूसरी अनुसूची
[धारा 2(ख) देखें]
1. दिनांक 10 सितंबर, 1958 के समझौते से संबंधित नोट के अंश।
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2. चर्चाओं के परिणामस्वरूप, निम्नलिखित समझौते हुए:-
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(3) बेरुबारी यूनियन नंबर 12
इसका विभाजन इस प्रकार किया जाएगा कि आधा क्षेत्र पाकिस्तान को मिलेगा, जबकि भारत से सटा हुआ शेष आधा क्षेत्र भारत के पास रहेगा। बेरूबारी यूनियन संख्या 12 का विभाजन क्षैतिज रूप से होगा, जो देबीगंज थाने के उत्तर-पूर्वी कोने से शुरू होगा।
विभाजन इस प्रकार किया जाना चाहिए कि पूर्वी पाकिस्तान के पचागर थाना और पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी थाना के बेरूबारी यूनियन नंबर 12 के बीच स्थित कूच बिहार एन्क्लेव वर्तमान में भारतीय क्षेत्र से जुड़े रहें और भारत के पास ही रहें। पूर्वी पाकिस्तान के बोदा थाना और बेरूबारी यूनियन नंबर 12 के बीच स्थित कूच बिहार एन्क्लेव को एन्क्लेवों के सामान्य आदान-प्रदान के साथ ही पाकिस्तान को सौंप दिया जाएगा।
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(5) 24 परगना-खुलना सीमा
24. परगना-जेस्सोर विवाद।
इस बात पर सहमति बनी है कि भारत और पाकिस्तान के दोनों दावों के बीच का मध्य मार्ग अपनाया जाए, और जहां तक संभव हो, बाद वाले विवाद के मामले में नदी (इच्छमती नदी) को मार्गदर्शक के रूप में लिया जाए।
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(7) पियाइन और सुरमा नदी क्षेत्रों का सीमांकन संबंधित अधिसूचनाओं, भूमि सर्वेक्षण मानचित्रों और, यदि आवश्यक हो, तो अधिकार अभिलेखों के अनुसार किया जाएगा। इस सीमांकन का परिणाम जो भी हो, दोनों सरकारों के नागरिकों को इन दोनों नदियों पर नौवहन की सुविधा प्राप्त होगी।
(8) भारत सरकार, रेलवे लाइन के पश्चिम में त्रिपुरा राज्य की भूमि तथा भागलपुर में रेलवे लाइन से सटी भूमि को पाकिस्तान को शाश्वत अधिकार में देने पर सहमत हो।
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(10) पाकिस्तान में पुराने कूच बिहार एन्क्लेव और भारत में पाकिस्तानी एन्क्लेव का आदान-प्रदान, पाकिस्तान को दिए जाने वाले अतिरिक्त क्षेत्र के लिए मुआवजे के दावे के बिना, पर सहमति हुई है।
2. 23 अक्टूबर, 1959 को हस्ताक्षरित "भारत-पूर्वी पाकिस्तान सीमा क्षेत्रों में विवादों और घटनाओं को समाप्त करने के लिए सहमत निर्णय और प्रक्रियाएं" शीर्षक वाले समझौते से उद्धरण।
4. पश्चिम बंगाल-पूर्वी पाकिस्तान सीमा: इस सीमा के 1,200 मील से अधिक भाग का सीमांकन पहले ही हो चुका है। महानंदा, बुरुंग और करातोआ नदियों के क्षेत्रों में पश्चिम बंगाल और पूर्वी पाकिस्तान के बीच की सीमा के संबंध में, यह सहमति हुई कि प्रासंगिक अधिसूचनाओं और अधिकार अभिलेखों द्वारा समर्थित नवीनतम भूमि सर्वेक्षण मानचित्रों के अनुसार सीमांकन किया जाएगा।
6. असम-पूर्वी पाकिस्तान सीमा।
(i) पथारिया वन आरक्षित क्षेत्र में निम्नलिखित तर्कसंगत सीमा को अपनाकर बैगे अवार्ड III से संबंधित विवाद का निपटारा किया गया है:
स्थलाकृतिक मानचित्र शीट संख्या 83D/5 में दर्शाए गए पुराने पथारिया रिजर्व सीमा पर रेडक्लिफ लाइन BA के साथ चिह्नित बिंदु X (H522558) से, सीमा रेखा इसके दक्षिण में बैलगाड़ी सड़क के निकट और समानांतर बिंदु A (H531554) तक चलेगी; फिर दक्षिण दिशा में पहाड़ी की चोटी पर और रिज के साथ-साथ चिह्नित पहाड़ी B (H523529) तक; फिर दक्षिण-पूर्व दिशा में रिज के साथ-साथ पहाड़ी की चोटी से नीचे एक धारा को पार करते हुए चिह्नित पहाड़ी C (H532523) तक; फिर दक्षिण दिशा में बिंदु D (H530517) तक; फिर दक्षिण-पश्चिम दिशा में समतल चोटी E (H523507) तक; फिर दक्षिण दिशा में बिंदु F (H524500) तक। फिर दक्षिण-पूर्व दिशा में सीधी रेखा में गांधाई नाले के मध्य बिंदु G (H540494) तक; फिर दक्षिण-पश्चिम दिशा में गांधाई नाले के मध्य बिंदु से ऊपर की ओर H (H533482) बिंदु तक; फिर दक्षिण-पश्चिम दिशा में एक टीले से ऊपर और रिज के साथ-साथ I (H517460) बिंदु तक; फिर दक्षिण दिशा में रिज पर J (H518455) बिंदु तक; फिर दक्षिण-पश्चिम दिशा में रिज के साथ-साथ 364 की ऊंचाई वाले बिंदु तक, फिर उसी रिज के साथ उसी दिशा में K (H500428) बिंदु तक; फिर दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा में उसी रिज के साथ-साथ L (H496420) बिंदु तक; फिर दक्षिण-पूर्व दिशा में उसी रिज के साथ-साथ M (H499417) बिंदु तक। फिर दक्षिण-पश्चिम दिशा में रिज के साथ-साथ 587 की ऊंचाई पर स्थित एक बिंदु तक; फिर पहाड़ी की चोटी (N) (H487393) तक; फिर दक्षिण-पूर्व और दक्षिण दिशा में रिज के साथ-साथ 692 की ऊंचाई पर स्थित एक पहाड़ी की चोटी तक; फिर दक्षिण दिशा में पहाड़ी की चोटी (O) (H484344) तक; फिर दक्षिण-पश्चिम दिशा में रिज के साथ-साथ 690 की ऊंचाई पर स्थित त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण स्टेशन तक; फिर दक्षिण दिशा में रिज के साथ-साथ 490 की ऊंचाई पर स्थित एक बिंदु (H473292) तक; फिर सीधे दक्षिण की ओर पथारिया रिजर्व फॉरेस्ट की पूर्वी सीमा पर स्थित एक बिंदु (Y) (H473263) तक; रेडक्लिफ लाइन BA के साथ
ऊपर वर्णित रेखा को स्थलाकृतिक मानचित्र शीट संख्या 83D/5, 83D/6 और 83D/2 की दो प्रतियों पर अंकित किया गया है।
भूमि सीमांकन के लिए जिम्मेदार तकनीकी विशेषज्ञों को सीमा संरेखण को वर्णित भौतिक विशेषताओं के अनुरूप बनाने के लिए मामूली समायोजन करने का अधिकार होगा।
मानचित्र पर अंकित रेखा के संबंध में इन समायोजनों के परिणामस्वरूप दोनों देशों को होने वाले नुकसान और लाभ का संतुलन तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा।
3. दिनांक 11 जनवरी, 1960 को हस्ताक्षरित "भारत-पश्चिम पाकिस्तान सीमा क्षेत्रों में विवादों और घटनाओं को समाप्त करने के लिए सहमत निर्णय और प्रक्रियाएं" शीर्षक वाले समझौते से उद्धरण।
1. पश्चिमी पाकिस्तान-पंजाब सीमा.- इस क्षेत्र में कुल 325 मील की सीमा में से लगभग 252 मील की सीमा का सीमांकन पूरा हो चुका है। भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच पंजाब सीमा आयोग के निर्णय और पुरस्कार की व्याख्या को लेकर मतभेदों के कारण लगभग 73 मील की सीमा का सीमांकन अभी तक नहीं हो पाया है। इस आयोग के अध्यक्ष सर सिरिल रेडक्लिफ थे। इन मतभेदों को सौहार्दपूर्ण ढंग से निम्नलिखित बिंदुओं के अनुसार सुलझा लिया गया है:
(i) सरजा मरजा, रख हरदित सिंह और पठानके (अमृतसर-लाहौर सीमा) - भारत और पाकिस्तान की सरकारें इस बात पर सहमत हैं कि इस क्षेत्र में पश्चिम पाकिस्तान और भारत के बीच की सीमा पंजाब सरकार की अधिसूचना संख्या 2183-ई, दिनांक 2 जून, 1939 के तहत लाहौर और कसूर की तहसीलों के बीच की सीमा का अनुसरण करेगी। परिणामस्वरूप, ये तीनों गाँव पाकिस्तान सरकार के प्रादेशिक क्षेत्राधिकार में आएंगे।
(iv) सुलेमानके (फिरोजपुर-मोंटगोमरी सीमा).- भारत और पाकिस्तान की सरकारें इस क्षेत्र में जिला सीमाओं को संलग्न अनुसूची में निर्दिष्ट और अनुलग्नक I के रूप में संलग्न मानचित्र में दर्शाए अनुसार समायोजित करने पर सहमत हैं।
