संविधान (84वाँ संशोधन) अधिनियम, 2002
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 55
- 81
- 82
- 170
- 330
- 332
संविधान के अनुच्छेद 82 और 170 (3) के प्रावधानों में यह प्रावधान है कि वर्ष 2000 के बाद ली गई पहली जनगणना के आंकड़े प्रकाशित होने तक निर्वाचन क्षेत्रों का कोई नया पुनर्गठन नहीं किया जा सकता है।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (इक्यानवेवाँ संशोधन) विधेयक, 2000 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (चौरासीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2002 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 82 और 170 (3) के प्रावधानों के अनुसार, वर्ष 2000 के बाद हुई पहली जनगणना के आंकड़े प्रकाशित होने तक निर्वाचन क्षेत्रों का कोई नया पुनर्गठन नहीं किया जा सकता। ये प्रावधान परिवार नियोजन मानदंडों को बढ़ावा देने के लिए संविधान (बयालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़े गए थे। चूंकि वर्ष 2000 के बाद होने वाली पहली जनगणना शुरू हो चुकी है, इसलिए इस जनगणना के आंकड़े प्रकाशित होते ही नए परिसीमन पर लगा संवैधानिक प्रतिबंध समाप्त हो जाएगा।
2. नए सिरे से परिसीमन करने के पक्ष और विपक्ष में लगातार मांगें उठती रही हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में परिवार नियोजन कार्यक्रमों की प्रगति को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या नीति रणनीति के तहत, हाल ही में जनसंख्या स्थिरीकरण के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों को प्रोत्साहित करने हेतु, नए सिरे से परिसीमन पर वर्तमान रोक को वर्ष 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।
3. सरकार ने राज्यों में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन और युक्तिकरण करने का भी निर्णय लिया है, जिसमें लोकसभा और राज्यों की विधान सभाओं में प्रत्येक राज्य को आवंटित सीटों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल हैं, जो वर्ष 1991 की जनगणना में निर्धारित जनसंख्या के आधार पर होंगे, ताकि विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में जनसंख्या/मतदाताओं की असमान वृद्धि के कारण उत्पन्न असंतुलन को दूर किया जा सके।
4. लोकसभा और राज्यों की विधान सभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या को वर्ष 1991 की जनगणना में निर्धारित जनसंख्या के आधार पर पुनर्निर्धारित करने का भी प्रस्ताव है। इसके द्वारा अधिनियमित किया जाता है
भारत गणराज्य के बावनवें वर्ष में संसद ने निम्नलिखित कार्य किए:
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (चौरासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 55 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 55 में, स्पष्टीकरण के परंतुक में, "2000" के स्थान पर "2026" के अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
अनुच्छेद 81 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 81 में, खंड (3) के परंतुक में,
(i) "2000" के स्थान पर "2026" के अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ii) "1971 की जनगणना के संदर्भ में समझा जाए" शब्दों और आंकड़ों के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:
"(i) खंड (2) के उपखंड (क) और उस खंड के परंतुक के प्रयोजनों के लिए, इसे 1971 की जनगणना के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा; और
(ii) खंड (2) के उपखंड (ख) के प्रयोजनों के लिए, 1991 की जनगणना के संदर्भ में।"
अनुच्छेद 82 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 82 में, तीसरे प्रावधान में,
(i) "2000" के स्थान पर "2026" के अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ii) "इस अनुच्छेद के अधीन लोकसभा में राज्यों को सीटों के आवंटन का पुनर्व्यवस्थापन और प्रत्येक राज्य का प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजन" शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:
"पुनः समायोजित करें"
(i) 1971 की जनगणना के आधार पर पुनर्निर्धारित किए गए लोकसभा में राज्य को आवंटित सीटें; और
(ii) प्रत्येक राज्य का प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजन, जैसा कि इस अनुच्छेद के अंतर्गत 1991 की जनगणना के आधार पर पुनर्व्यवस्थित किया जा सकता है।
अनुच्छेद 170 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 170 में,
(क) खंड (2) में, स्पष्टीकरण के परंतुक में, "2000" और "1971" के स्थान पर क्रमशः "2026" और "1991" के स्थान पर निम्नलिखित आंकड़े होंगे:
प्रतिस्थापित;
(ख) खंड (3) के तीसरे परंतुक में,
(i) "2000" के स्थान पर "2026" के अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ii) "इस खंड के अधीन प्रत्येक राज्य की विधान सभा में सीटों की कुल संख्या का पुनर्व्यवस्थापन और ऐसे राज्य का प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजन" शब्दों के स्थान पर निम्नलिखित शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:
"पुनः समायोजित करें"
(i) प्रत्येक राज्य की विधान सभा में सीटों की कुल संख्या, जैसा कि 1971 की जनगणना के आधार पर पुनर्निर्धारित किया गया है; और
(ii) इस खंड के अंतर्गत 1991 की जनगणना के आधार पर पुनर्व्यवस्थित किए गए राज्य को प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित करना।
अनुच्छेद 330 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 330 में, स्पष्टीकरण के परंतुक में, "2000" और "1971" के स्थान पर क्रमशः "2026" और "1991" के अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
अनुच्छेद 332 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 332 में,
(क) खंड (3क) में, "2000" के स्थान पर "2026" के अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ख) खंड (3ख) में, "2000" के स्थान पर "2026" के अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
