संविधान (83वाँ संशोधन) अधिनियम, 2000
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 243एम
संविधान (तिहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992 को 24 अप्रैल, 1993 से लागू किया गया था। उक्त अधिनियम में यह प्रावधान किया गया था कि अधिनियम के लागू होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर सभी राज्य अपने स्थानीय कानूनों में संशोधन करके उन्हें संविधान के नए प्रावधानों के अनुरूप बनाएंगे।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (छियासीवाँ संशोधन) विधेयक 1999 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (तिरासीवाँ संशोधन) अधिनियम 2000 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान (तिहत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 24 अप्रैल, 1993 से लागू हुआ। उक्त अधिनियम में यह प्रावधान किया गया था कि अधिनियम के लागू होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर सभी राज्यों को अपने स्थानीय कानूनों में संशोधन करके उन्हें संविधान के नए प्रावधानों के अनुरूप बनाना होगा। यह कार्य 23 अप्रैल, 1994 से पहले पूरा करना आवश्यक था।
2. अनुच्छेद 243डी प्रत्येक पंचायत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है। अरुणाचल प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहाँ पूर्णतः आदिवासी आबादी रहती है। राज्य में कोई अनुसूचित जाति नहीं है। राज्य विधानसभा में अनुसूचित जातियों के लिए कोई आरक्षण नहीं किया गया है और न ही इस संबंध में किसी कानून में कोई प्रावधान है। राज्य सरकार की सेवाओं में भी अनुसूचित जातियों के लिए कोई आरक्षण नहीं है।
3. बंगाल पूर्वी सीमा विनियम, 1873 और चिन हिल विनियम, 1896 अरुणाचल प्रदेश के स्वदेशी आदिवासी लोगों के शांतिपूर्ण अस्तित्व के लिए विशेष संरक्षण और सुरक्षा प्रदान करते हैं। ये कानून "इनर लाइन परमिट" के बिना आदिवासी क्षेत्र में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाते हैं। केवल स्वदेशी आदिवासी लोगों को ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति है।
4. अरुणाचल प्रदेश का आदिवासी समाज जातिविहीन है, जहाँ सदियों से पुरुषों और महिलाओं के बीच सामाजिक समानता कायम है। चूंकि राज्य में कोई अनुसूचित जाति नहीं है और अरुणाचल प्रदेश राज्य जाति व्यवस्था से पूरी तरह मुक्त है, इसलिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 243M में एक नया खंड (3A) जोड़ने का प्रस्ताव है, ताकि अरुणाचल प्रदेश राज्य को पंचायतों में अनुसूचित जातियों के लिए सीटों के आरक्षण से संबंधित अनुच्छेद 243D के आवेदन से छूट दी जा सके।
5. इससे अरुणाचल प्रदेश में पंचायत राज संस्थाओं को राज्य के सामाजिक-राजनीतिक लोकाचार के अनुरूप कानूनी और संवैधानिक आधार मिलेगा।
6. यह विधेयक उपरोक्त उद्देश्य की प्राप्ति का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के इक्यावनवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (तिरासीवां संशोधन) अधिनियम, 2000 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 243M का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 243M में खंड (3) के बाद निम्नलिखित खंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
(3क) अनुसूचित जातियों के लिए सीटों के आरक्षण से संबंधित अनुच्छेद 243डी में कोई बात अरुणाचल प्रदेश राज्य पर लागू नहीं होगी।
