संविधान (82वाँ संशोधन) अधिनियम, 2000
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 335
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग पदोन्नति में आरक्षण के मामलों में योग्यता अंकों और मूल्यांकन मानकों में छूट की सुविधा का लाभ उठा रहे थे। सर्वोच्च न्यायालय ने 1-10-1996 को एस. विनोद कुमार बनाम मामले में अपने फैसले में यह बात कही थी।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (आठवां संशोधन) विधेयक 1999 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (बयासीवां संशोधन) अधिनियम 2000 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण के मामलों में योग्यता अंकों और मूल्यांकन मानकों में छूट की सुविधा प्राप्त थी। सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर 1996 को एस. विनोद कुमार बनाम भारत संघ मामले में अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 335 में निहित आदेश के मद्देनजर, पदोन्नति में आरक्षण के मामलों में ऐसी छूट संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत अनुमेय नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि पदोन्नति में आरक्षण के मामलों में योग्यता अंकों और मूल्यांकन मानकों में छूट के विषय पर कानून वही है जो सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इंदिरा साहनी और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य मामले में निर्धारित किया था। इंदिरा साहनी फैसले के पैरा 831 में भी कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 335 में निहित आदेश के मद्देनजर, अनुच्छेद 16(4) के तहत ऐसी छूट अनुमेय नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को लागू करने के लिए, ऐसी छूट 22 जुलाई 1997 से वापस लेनी पड़ी।
2. दिनांक 22.07.1997 के आदेश के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हितों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए, संसद सदस्यों सहित विभिन्न पक्षों से सरकार को अभ्यावेदन प्राप्त हुए थे। विभिन्न अभ्यावेदनों पर विचार करते हुए, सरकार ने स्थिति की समीक्षा की और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा दिनांक 22.07.1997 को जारी निर्देशों के माध्यम से वापस ली गई छूटों को बहाल करने के उद्देश्य से संवैधानिक संशोधन के लिए आगे बढ़ने का निर्णय लिया। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के इक्यावनवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नानुसार अधिनियमित किया जाता है:
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (बयासीवां संशोधन) अधिनियम, 2000 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 335 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 335 में अंत में निम्नलिखित प्रावधान जोड़ा जाएगा, अर्थात्:
इस अनुच्छेद में कोई भी बात अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के पक्ष में किसी भी परीक्षा में अर्हता अंकों में छूट देने या मूल्यांकन के मानकों को कम करने, संघ या राज्य के मामलों से संबंधित किसी भी वर्ग या वर्गों की सेवाओं या पदों में पदोन्नति के मामलों में आरक्षण के लिए कोई प्रावधान करने से नहीं रोकेगी।
