संविधान (81वाँ संशोधन) अधिनियम, 2000
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
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29 अगस्त, 1997 से पहले, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रिक्तियां, जिन्हें अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों की अनुपलब्धता के कारण सीधी भर्ती द्वारा भरा नहीं जा सका, उन्हें "बैकलॉग रिक्तियां" माना जाता था।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (नब्बेवां संशोधन) विधेयक, 2000 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (इक्यासीवां संशोधन) अधिनियम, 2000 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
29 अगस्त, 1997 से पहले, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रिक्तियां, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों की अनुपलब्धता के कारण सीधी भर्ती द्वारा नहीं भरी जा सकीं, उन्हें "बैकलॉग रिक्तियां" माना जाता था। इन रिक्तियों को एक अलग समूह माना जाता था और इन्हें पचास प्रतिशत आरक्षण की सीमा से बाहर रखा गया था। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले में अपने फैसले में कहा कि एक वर्ष में आरक्षण के आधार पर भरी जाने वाली रिक्तियों की संख्या, जिसमें पिछले वर्ष के आरक्षण भी शामिल हैं, किसी भी स्थिति में पचास प्रतिशत की सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। चूंकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए एक वर्ष में कुल आरक्षण पहले ही साढ़े उनतालीस प्रतिशत तक पहुंच चुका था और एक वर्ष में भरी जाने वाली रिक्तियों की कुल संख्या पचास प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती थी, इसलिए "बैकलॉग रिक्तियों" को भरना और विशेष भर्ती अभियान चलाना मुश्किल हो गया था। इसलिए, सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को लागू करने के लिए, 29 अगस्त, 1997 को एक आधिकारिक ज्ञापन जारी किया गया था जिसमें यह प्रावधान किया गया था कि पचास प्रतिशत की सीमा वर्तमान के साथ-साथ "बैकलॉग रिक्तियों" पर भी लागू होगी और विशेष भर्ती अभियान को बंद कर दिया जाएगा।
2. दिनांक 29 अगस्त, 1997 के उपरोक्त आदेश के प्रतिकूल प्रभाव के कारण, संसद सदस्यों सहित विभिन्न संगठनों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार से निवेदन किया। सरकार ने विभिन्न निवेदनों पर विचार करने के बाद स्थिति की समीक्षा की और संविधान में संशोधन करने का निर्णय लिया है ताकि किसी वर्ष की रिक्तियाँ, जो संविधान के अनुच्छेद 16 के खंड (4) या खंड (4ए) के तहत किए गए आरक्षण प्रावधानों के अनुसार उसी वर्ष में भरी जानी हैं, उन्हें एक अलग श्रेणी की रिक्तियाँ माना जाए जिन्हें किसी आगामी वर्ष या वर्षों में भरा जाना है और ऐसी रिक्तियों को उस वर्ष की रिक्तियों के साथ नहीं माना जाएगा जिसमें उन्हें भरा जा रहा है, उस वर्ष की कुल रिक्तियों पर पचास प्रतिशत आरक्षण की अधिकतम सीमा निर्धारित करने के लिए। संविधान में यह संशोधन राज्य को 29 अगस्त, 1997 से पूर्व की स्थिति को बहाल करने में सक्षम बनाएगा।
3. उस विधेयक का उद्देश्य उपरोक्त उद्देश्य को प्राप्त करना है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के पचासवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (इक्यासीवाँ संशोधन) अधिनियम, 2000 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 16 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 16 में खंड (4ए) के स्थान पर निम्नलिखित खंड जोड़े जाएंगे, अर्थात्: -
(4ख) इस अनुच्छेद में कोई बात राज्य को किसी वर्ष की उन रिक्तियों को, जो खंड (4) या खंड (4क) के अधीन आरक्षण के किसी प्रावधान के अनुसार उस वर्ष में भरी जानी हैं, किसी अन्य वर्ष या वर्षों में भरी जाने वाली रिक्तियों के एक अलग वर्ग के रूप में विचार करने से नहीं रोकेगी, और ऐसी रिक्तियों के वर्ग को उस वर्ष की रिक्तियों के साथ नहीं माना जाएगा जिसमें उन्हें भरा जा रहा है, उस वर्ष की कुल रिक्तियों पर पचास प्रतिशत आरक्षण की अधिकतम सीमा निर्धारित करने के लिए।
