संविधान (80वाँ संशोधन) अधिनियम, 2000
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 269
लेख प्रतिस्थापित
- 270
लेख हटा दिए गए
- 272
दसवें वित्त आयोग ने 26 नवंबर, 1994 को पांच वर्षों की अवधि, अर्थात् 1995-96 से 1999-2000 तक की अवधि के लिए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। उक्त रिपोर्ट को 14 मार्च, 1995 को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखा गया था।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (अस्सी-नौवां संशोधन) विधेयक, 2000 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (अस्सीवां संशोधन) अधिनियम, 2000 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
दसवें वित्त आयोग ने 26 नवंबर, 1994 को पांच वर्षों की अवधि, यानी 1995-96 से 1999-2000 तक की अवधि के लिए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। उक्त रिपोर्ट को 14 मार्च, 1995 को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखा गया था। आयोग की सिफारिशों में से एक, जिस पर सरकार विचार कर रही है, वह है कुछ केंद्रीय करों और शुल्कों से प्राप्त आय को केंद्र और राज्यों के बीच साझा करने की एक वैकल्पिक योजना।
2. वैकल्पिक योजना में यह परिकल्पना की गई है कि केंद्र शासित प्रदेशों के करों और शुल्कों की कुल आय (स्टाम्प शुल्क, औषधीय टॉयलेट उत्पादों पर उत्पाद शुल्क, केंद्रीय बिक्री कर, माल ढुलाई कर, संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के तहत विशिष्ट उद्देश्यों के लिए लगाए गए उपकर और अधिभार को छोड़कर) में से छब्बीस प्रतिशत हिस्सा राज्यों को आयकर, मूल उत्पाद शुल्क, विशेष उत्पाद शुल्क और रेल यात्री किराए पर कर के बदले अनुदान में उनके मौजूदा हिस्से के बदले आवंटित किया जाएगा।
3. इसके अतिरिक्त, सभी केंद्रीय करों और शुल्कों (स्टाम्प शुल्क, औषधीय/शौचालय उत्पादों पर उत्पाद शुल्क, केंद्रीय बिक्री कर, माल ढुलाई कर, संसद द्वारा निर्मित किसी कानून के तहत विशिष्ट प्रयोजन के लिए लगाए गए उपकर और अधिभार को छोड़कर) की कुल आय में तीन प्रतिशत हिस्सा राज्यों को तंबाकू, कपास और चीनी पर बिक्री कर के बदले लगाए जाने वाले अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में उनके मौजूदा हिस्से के बदले आवंटित किया जाएगा। आयोग ने प्रस्ताव दिया था कि तंबाकू, कपास और चीनी बिक्री कर से मुक्त रहें और इन वस्तुओं पर बिक्री कर के बदले लगाए जाने वाले अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को मूल उत्पाद शुल्क में मिला दिया जाए।
4. वैकल्पिक योजना मौजूदा व्यवस्थाओं की तुलना में केंद्र या राज्यों के लिए अधिक लाभदायक होगी या नहीं, यह पूरी तरह से एकत्रित किए जाने वाले विभिन्न केंद्रीय करों और शुल्कों के संग्रह में सापेक्ष वृद्धि पर निर्भर करेगा।
5. आयोग ने अपनी रिपोर्टों के पैरा 13.2, 13.3 और 13.18 में इस योजना के लाभों को सूचीबद्ध किया है। ये लाभ इस प्रकार हैं:- (i) केंद्रीय करों से प्राप्त कुल राजस्व में राज्यों को एक निश्चित हिस्सा आवंटित किए जाने से, राज्य केंद्रीय करों के कुल उछाल में हिस्सेदारी कर सकेंगे; (ii) केंद्र सरकार कर सुधारों को आगे बढ़ा सकती है, बिना यह विचार किए कि कोई कर राज्यों में साझा करने योग्य है या नहीं; (iii) केंद्रीय कर राजस्व में उतार-चढ़ाव का प्रभाव केंद्र और राज्य सरकारों पर समान रूप से पड़ेगा; (iv) यदि अनुच्छेद 268 और/या 269 में उल्लिखित कर इस व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं, तो उनके उपयोग की संभावना अधिक होगी; और (v) कर साझाकरण व्यवस्था के दायरे को विस्तारित करने से सुधारों की प्रगति में काफी सुविधा होगी, जिससे संसाधनों के प्रवाह में अधिक निश्चितता और कर सुधारों में अधिक लचीलापन प्राप्त होगा।
6. आयोग द्वारा अनुशंसित उपरोक्त योजना राष्ट्रीय हित में है क्योंकि यह भारत सरकार के कर जुटाने के प्रयासों में कथित अंतर-कर को दूर करने में मदद करती है, साथ ही उपकर और अधिभार को पूलिंग व्यवस्था से बाहर रखकर केंद्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त लचीलापन प्रदान करती है।
7. योजना के विभिन्न पहलुओं को उजागर करने वाला एक चर्चा पत्र 20 दिसंबर, 1996 को संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा गया था, ताकि एक जानकारीपूर्ण बहस को बढ़ावा दिया जा सके।
8. 17 जुलाई, 1997 को आयोजित अंतर-राज्य परिषद की तीसरी बैठक में बनी सहमति के आधार पर, तत्कालीन सरकार ने कुछ संशोधनों के अधीन दसवें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित योजना को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार करने पर सहमति व्यक्त की थी।
9. सरकार ने दसवें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित योजना को कुछ संशोधनों के साथ सैद्धांतिक रूप से मंजूरी देने के संबंध में पिछली सरकार द्वारा लिए गए निर्णय की पुष्टि करने का निर्णय लिया था।
10. सबसे पहले, राज्य के प्रतिशत हिस्से की समीक्षा दसवें वित्त आयोग द्वारा सुझाए गए अनुसार पंद्रह वर्षों के लिए स्थिर रखने के बजाय, क्रमिक वित्त आयोगों द्वारा की जानी है।
11. दूसरे, संविधान के अनुच्छेद 270, 279 और 280 में संगति बनाए रखने के लिए सरकार ने दसवें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित सकल आय के बंटवारे को शुद्ध आय के बंटवारे में बदलने का निर्णय लिया है। हालांकि, इससे राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि सरकार ने साथ ही साथ राज्यों को 29% से अधिक प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ाकर क्षतिपूर्ति करने का भी निर्णय लिया है।
12. तीसरा, जैसा कि आयोग का इरादा था, अनुच्छेद 271 में कोई संशोधन करने का प्रयास नहीं किया जा रहा है, जो केंद्र सरकार को संघ के प्रयोजन के लिए केंद्रीय करों और शुल्कों पर अधिभार लगाने के लिए अधिकृत करता है।
13. यह योजना 1 अप्रैल, 1996 से प्रभावी होगी। 1996-97 से 1999-2000 की अवधि के दौरान शुद्ध आय में राज्यों का प्रतिशत हिस्सा इस प्रकार होगा कि सकल आय में राज्यों का हिस्सा 29% होगा। 11वें वित्त आयोग की सिफारिशें, जिसे 30 जून, 2000 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है, 1 अप्रैल, 2000 से शुरू होने वाली 5 वर्षों की अवधि को कवर करेंगी।
14. इस निर्णय को लागू करने के लिए, यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 269, 270 और 272 में संशोधन करता है ताकि निगम कर और सीमा शुल्क जैसे कई केंद्रीय करों और शुल्कों को राज्यों के साथ उनके संवैधानिक रूप से अनिवार्य बंटवारे के संबंध में व्यक्तिगत आयकर के बराबर लाया जा सके। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के इक्यावनवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नानुसार अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (अस्सीवां संशोधन) अधिनियम, 2000 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 269 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 269 में खंड (1) और (2) के स्थान पर निम्नलिखित खंड प्रतिस्थापित किए जाएंगे, अर्थात्:-
(1) माल की बिक्री या खरीद पर कर और माल की खेप पर कर भारत सरकार द्वारा लगाए और वसूले जाएंगे, लेकिन इन्हें राज्यों को 1 अप्रैल, 1996 को या उसके बाद खंड (2) में दिए गए तरीके से सौंपा जाएगा और सौंपा हुआ माना जाएगा।
स्पष्टीकरण .- इस खंड के प्रयोजनों के लिए; -
(क) माल की बिक्री या खरीद पर कर अभिव्यक्ति का अर्थ समाचार पत्रों के अलावा अन्य वस्तुओं की बिक्री या खरीद पर कर होगा, जहां ऐसी बिक्री या खरीद अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान होती है;
(ख) माल की खेप पर कर अभिव्यक्ति का अर्थ माल की खेप पर कर होगा (चाहे खेप उसे बनाने वाले व्यक्ति को हो या किसी अन्य व्यक्ति को), जहां ऐसी खेप अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य के दौरान होती है;
(2) किसी वित्तीय वर्ष में ऐसे किसी कर की शुद्ध आय, सिवाय उस हद तक जहां तक वह आय केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित आय को दर्शाती है, भारत की संचित निधि का हिस्सा नहीं होगी, बल्कि उस राज्य को आवंटित की जाएगी जिसमें उस वर्ष वह कर देय है, और उन राज्यों के बीच वितरण के ऐसे सिद्धांतों के अनुसार वितरित की जाएगी जो संसद द्वारा कानून द्वारा निर्धारित किए जा सकते हैं।
अनुच्छेद 270 के स्थान पर नए अनुच्छेद का प्रतिस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 270 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद प्रतिस्थापित किया जाएगा और यह 1 अप्रैल, 1996 से प्रभावी रूप से प्रतिस्थापित माना जाएगा, अर्थात्:-
संघ और राज्यों के बीच लगाए और वितरित किए जाने वाले कर:
270.
(1) संघ सूची में निर्दिष्ट सभी कर और शुल्क, अनुच्छेद 268 और 269 में निर्दिष्ट शुल्क और करों को छोड़कर, अनुच्छेद 271 में निर्दिष्ट करों और शुल्कों पर अधिभार और संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के तहत विशिष्ट उद्देश्यों के लिए लगाए गए किसी भी उपकर को छोड़कर, भारत सरकार द्वारा लगाया और एकत्र किया जाएगा और खंड (2) में दिए गए तरीके से संघ और राज्यों के बीच वितरित किया जाएगा।
(2) किसी वित्तीय वर्ष में ऐसे किसी कर या शुल्क की शुद्ध आय का ऐसा प्रतिशत, जैसा निर्धारित किया जाए, भारत की संचित निधि का हिस्सा नहीं होगा, बल्कि उन राज्यों को आवंटित किया जाएगा जिनमें उस वर्ष वह कर या शुल्क लगाया जाता है, और उन राज्यों के बीच उस तरीके से और उस समय से वितरित किया जाएगा जैसा कि खंड (3) में दिए गए तरीके से निर्धारित किया जाए।
(3) इस अनुच्छेद में, "निर्धारित" का अर्थ है -
(i) जब तक राष्ट्रपति द्वारा आदेश द्वारा निर्धारित वित्त आयोग का गठन नहीं हो जाता, तब तक
(ii) वित्त आयोग के गठन के बाद, राष्ट्रपति द्वारा वित्त आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के बाद आदेश द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
अनुच्छेद 272 का लोप
संविधान के अनुच्छेद 272 को हटा दिया जाएगा।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि भारत सरकार द्वारा लगाए और एकत्र किए गए अतिरिक्त उत्पाद शुल्क सहित केंद्रीय उत्पाद शुल्कों की शुद्ध आय के पूर्ण या किसी भाग के समतुल्य कोई राशि, जो 1 अप्रैल, 1996 के बाद, लेकिन इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले, राज्यों को अनुदान के रूप में वितरित की गई हो, तो ऐसी राशि को अनुच्छेद 270 के प्रावधानों के अनुसार वितरित माना जाएगा, मानो अनुच्छेद 272 को 1 अप्रैल, 1996 से हटा दिया गया हो।
(3) किसी अन्य कर या शुल्क की शुद्ध आय के पूरे या किसी भाग के समतुल्य कोई राशि, जो 1 अप्रैल, 1996 के बाद लेकिन इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले राज्यों को अनुदान-सहायता के रूप में वितरित की गई हो, अनुच्छेद 270 के प्रावधानों के अनुसार वितरित की गई मानी जाएगी।
