संविधान (79वाँ संशोधन) अधिनियम, 1999
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 334
संविधान के अनुच्छेद 334 में यह प्रावधान है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों के आरक्षण और लोकसभा तथा राज्यों की विधान सभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के नामांकन द्वारा प्रतिनिधित्व से संबंधित संविधान के प्रावधान प्रभावी नहीं रहेंगे।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (चौरासीवां संशोधन) विधेयक, 1999 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (उनहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 2000 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 334 में यह प्रावधान है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों और लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में नामांकन द्वारा एंग्लो-इंडियन समुदाय के प्रतिनिधित्व से संबंधित संविधान के प्रावधान संविधान के लागू होने की तिथि से पचास वर्ष की अवधि समाप्त होने पर समाप्त हो जाएंगे। यद्यपि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ने पिछले पचास वर्षों में काफी प्रगति की है, फिर भी संविधान सभा द्वारा उपर्युक्त आरक्षित सीटों और सदस्यों के नामांकन संबंधी प्रावधान बनाते समय जिन कारणों पर विचार किया गया था, वे अब भी प्रासंगिक हैं। अतः, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों और नामांकन द्वारा एंग्लो-इंडियन समुदाय के प्रतिनिधित्व को दस वर्षों की अवधि के लिए जारी रखने का प्रस्ताव है।
इस विधेयक का उद्देश्य उपरोक्त लक्ष्य को प्राप्त करना है।
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने वाला अधिनियम।
भारत गणराज्य के पचासवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त शीर्षक और दीक्षांत समारोह:
इस अधिनियम को संविधान (सत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1999 कहा जा सकता है।
यह 25 जनवरी, 2000 से लागू होगा।
अनुच्छेद 334 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 334 में, "पचास वर्ष" शब्दों के स्थान पर "साठ वर्ष" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
