संविधान (75वाँ संशोधन) अधिनियम, 1993
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 323बी
आज विभिन्न राज्यों में लागू किराया नियंत्रण कानूनों के संचालन में कई गंभीर खामियां हैं, जिनके कारण अनेक अनपेक्षित परिणाम सामने आए हैं। इनमें से कुछ हानिकारक कानूनी परिणामों में बढ़ते और अंतहीन मुकदमेबाजी, अदालतों द्वारा समय पर न्याय प्रदान करने में असमर्थता, प्रथाओं का विकास आदि शामिल हैं।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (सत्तरवाँ संशोधन) विधेयक, 1992 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (पचहत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1993 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
आज विभिन्न राज्यों में लागू किराया नियंत्रण कानूनों के संचालन में कई गंभीर खामियां हैं, जिनके कारण अनेक अनपेक्षित परिणाम सामने आए हैं। इनमें से कुछ हानिकारक कानूनी परिणामों में बढ़ते और अंतहीन मुकदमे, अदालतों द्वारा समय पर न्याय प्रदान करने में असमर्थता, किराया कानूनों के संचालन को दरकिनार करने के लिए अपनाई जा रही प्रथाओं और प्रणालियों का विकास और किराये के आवास बाजार का लगातार सिकुड़ना शामिल हैं।
2. देश में किराया संबंधी मुकदमों की दयनीय स्थिति को देखते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने प्रभाकरन नायर और अन्य बनाम तमिलनाडु राज्य (सिविल रिट याचिका 506/1986 और अन्य रिट) मामले में यह टिप्पणी की कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों को किराया संबंधी मुकदमों के भारी बोझ से मुक्त किया जाना चाहिए। अपीलों के स्तर को कम किया जाना चाहिए। कानून सरल, तर्कसंगत और स्पष्ट होने चाहिए। मुकदमों का शीघ्र निपटारा होना चाहिए। त्वरित प्रक्रिया के साथ अखिल भारतीय स्तर पर राष्ट्रीय किराया न्यायाधिकरण की स्थापना के विचार पर विचार किया जाना चाहिए।
3. संविधान के भाग XIVA के अनुच्छेद 323B में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि राज्य स्तरीय किराया न्यायाधिकरणों की स्थापना का प्रावधान करके किराया संबंधी मुकदमेबाजों को समय पर राहत दी जा सके, अपीलों के स्तर को कम किया जा सके और संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को छोड़कर सभी न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र को बाहर रखा जा सके।
4. यह विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के चौवालीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (पचहत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1993 कहा जा सकता है।
(2) यह ऐसी तिथि_682 से लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
अनुच्छेद 323B का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 323बी में, खंड (2) में,-
(क) उपखंड (ह) और (आई) को उपखंड (आई) और (ज) के रूप में पुनः अंकित किया जाएगा, और इस प्रकार पुनः अंकित उपखंड (आई) से पहले निम्नलिखित उपखंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
(h) किराया, इसका विनियमन और नियंत्रण तथा किरायेदारी संबंधी मुद्दे जिनमें मकान मालिकों और किरायेदारों के अधिकार, हक और हित शामिल हैं;
(ख) उपखंड (i) में, जैसा कि पुनः अक्षरबद्ध किया गया है, कोष्ठक और अक्षर "(g)" के स्थान पर कोष्ठक और अक्षर "(h)" प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ग) उप-खंड (जे) में, जैसा कि पुनः अक्षरबद्ध किया गया है, कोष्ठक और अक्षर "(एच)" के स्थान पर कोष्ठक और अक्षर "(आई)" प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
