संविधान (74वाँ संशोधन) अधिनियम, 1992
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 280
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- बारहवीं अनुसूची
प्रभावित हिस्से
- भाग 9
कई राज्यों में स्थानीय निकाय विभिन्न कारणों से कमजोर और अप्रभावी हो गए हैं, जिनमें नियमित चुनाव न होना, लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहना और शक्तियों और कार्यों का अपर्याप्त हस्तांतरण शामिल है।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (तिहत्तरवां संशोधन) विधेयक, 1991 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (चौहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
कई राज्यों में स्थानीय निकाय विभिन्न कारणों से कमजोर और अप्रभावी हो गए हैं, जिनमें नियमित चुनाव न होना, लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहना और शक्तियों एवं कार्यों का अपर्याप्त हस्तांतरण शामिल है। परिणामस्वरूप, शहरी स्थानीय निकाय स्वशासन की जीवंत लोकतांत्रिक इकाइयों के रूप में प्रभावी ढंग से कार्य करने में असमर्थ हैं।
2. इन कमियों को ध्यान में रखते हुए, यह आवश्यक समझा जाता है कि शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित प्रावधानों को संविधान में शामिल किया जाए, विशेष रूप से निम्नलिखित के लिए: (i) राज्य सरकार और शहरी स्थानीय निकायों के बीच संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाना, विशेष रूप से निम्नलिखित के संबंध में: (a) कार्य और कराधान शक्तियां; (b) राजस्व बंटवारे की व्यवस्था; (ii) नियमित रूप से चुनाव कराना; (iii) अधिक्रदय की स्थिति में समय पर चुनाव कराना; और (iv) अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं जैसे कमजोर वर्गों के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करना।
3. तदनुसार, संविधान में शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित एक नया भाग जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसमें निम्नलिखित प्रावधान होंगे: (क) तीन प्रकार की नगरपालिकाओं का गठन: (i) ग्रामीण क्षेत्र से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित हो रहे क्षेत्रों के लिए नगर पंचायतें; (ii) छोटे शहरी क्षेत्रों के लिए नगर परिषदें; (iii) बड़े शहरी क्षेत्रों के लिए नगर निगम। उक्त क्षेत्रों को निर्दिष्ट करने के लिए व्यापक मानदंड प्रस्तावित अनुच्छेद 243-0 में दिए गए हैं; (ख) नगरपालिकाओं की संरचना, जिसका निर्णय राज्य के विधानमंडल द्वारा किया जाएगा, में निम्नलिखित विशेषताएं होंगी: (i) प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने जाने वाले व्यक्ति; (ii) नगरपालिकाओं में वार्ड या अन्य स्तरों पर समितियों के अध्यक्षों का प्रतिनिधित्व, यदि कोई हो; (iii) नगरपालिकाओं में नगरपालिका प्रशासन का विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व (मतदान अधिकार के बिना); (ग) राज्य कानून में निर्दिष्ट तरीके से नगरपालिका के अध्यक्षों का चुनाव; (घ) राज्य कानून में दिए गए प्रावधान के अनुसार नगरपालिका के प्रादेशिक क्षेत्र के भीतर वार्ड स्तर या अन्य स्तरों पर समितियों का गठन। (e) प्रत्येक नगरपालिका में सीटों का आरक्षण- (i) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में, जिनमें से कम से कम एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए होंगी; (ii) महिलाओं के लिए कुल सीटों के एक तिहाई से कम सीटें नहीं होंगी; (iii) पिछड़े वर्ग के नागरिकों के पक्ष में, यदि राज्य विधानमंडल द्वारा ऐसा प्रावधान किया गया हो; (iv) राज्य कानून में निर्दिष्ट अध्यक्ष पदों पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए सीटें; (f) नगरपालिका का कार्यकाल 5 वर्ष निश्चित होगा और कार्यकाल समाप्त होने के छह महीने के भीतर पुन: चुनाव होंगे। यदि कोई नगरपालिका अपने कार्यकाल की समाप्ति से पहले भंग हो जाती है, तो उसके भंग होने के छह महीने के भीतर चुनाव होंगे; (g) राज्य विधानमंडल द्वारा नगरपालिकाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने और विकास योजनाओं को लागू करने के संबंध में शक्तियाँ और जिम्मेदारियाँ हस्तांतरित की जाएंगी, ताकि वे स्वशासन संस्थाओं के रूप में कार्य कर सकें। (h) नगरपालिकाओं द्वारा करों और शुल्कों का लगाना, राज्य सरकारों द्वारा नगरपालिकाओं को ऐसे करों और शुल्कों का आवंटन करना और राज्य द्वारा नगरपालिकाओं को अनुदान सहायता प्रदान करना जैसा कि राज्य कानून में प्रावधान किया गया हो; (i) नगरपालिकाओं के वित्त की समीक्षा करने और निम्नलिखित सिद्धांतों की अनुशंसा करने के लिए एक वित्त आयोग - (1) नगरपालिकाओं को आवंटित किए जा सकने वाले करों का निर्धारण; (2) राज्य और नगरपालिकाओं के बीच करों का बंटवारा; (3) राज्य की समेकित निधि से नगरपालिकाओं को अनुदान सहायता; (j) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा नगर निगमों के खातों का लेखापरीक्षा करना और संबंधित राज्य विधानमंडल और नगर निगम के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करना; (k) राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में आयोजित किए जाने वाले नगरपालिकाओं के चुनावों के संबंध में राज्य विधानमंडल द्वारा कानून बनाना; (l) राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट संशोधनों के साथ किसी केंद्र शासित प्रदेश या उसके किसी भाग पर विधेयक के प्रावधानों का अनुप्रयोग। (m) अनुच्छेद 244 के खंड (1) में निर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्रों और खंड (2) में निर्दिष्ट जनजातीय क्षेत्रों को विधेयक के प्रावधानों के लागू होने से छूट देना। संसद द्वारा विधि द्वारा ऐसे क्षेत्रों में विधेयक के प्रावधानों का विस्तार किया जा सकता है; (n) नगरपालिका की सदस्यता के लिए अयोग्यताएँ; (o) नगरपालिकाओं के चुनावों से संबंधित मामलों में न्यायालयों के क्षेत्राधिकार पर रोक।
4. यह विधेयक उपर्युक्त उद्देश्यों की प्राप्ति का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के तैंतालीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नानुसार अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (चौहत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 कहा जा सकता है।
(2) यह ऐसी तिथि_681 से लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
नए भाग IXA का अंतःस्थापन
संविधान के भाग 9 के बाद निम्नलिखित भाग जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
भाग IXA नगरपालिकाएँ
243पृष्ठ. परिभाषाएँ.-
इस भाग में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) "समिति" से तात्पर्य अनुच्छेद 243एस के अधीन गठित समिति से है;
(ख) "जिला" से तात्पर्य किसी राज्य में स्थित जिले से है;
(ग) "महानगरीय क्षेत्र" से तात्पर्य दस लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाला ऐसा क्षेत्र है, जो एक या एक से अधिक जिलों में समाहित हो और जिसमें दो या दो से अधिक नगर पालिकाएँ या पंचायतें या अन्य सन्निहित क्षेत्र शामिल हों, जिसे राज्यपाल द्वारा सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा इस भाग के प्रयोजनों के लिए महानगरीय क्षेत्र निर्दिष्ट किया गया हो;
(घ) "नगरपालिका क्षेत्र" से तात्पर्य किसी नगरपालिका के उस प्रादेशिक क्षेत्र से है जिसे राज्यपाल द्वारा अधिसूचित किया जाता है;
(ई) "नगरपालिका" से तात्पर्य अनुच्छेद 243क्यू के अधीन गठित स्वशासन की संस्था से है;
(f) "पंचायत" से तात्पर्य अनुच्छेद 243बी के अधीन गठित पंचायत से है;
(जी) "जनसंख्या" से तात्पर्य पिछली जनगणना में निर्धारित जनसंख्या से है जिसके प्रासंगिक आंकड़े प्रकाशित किए गए हैं।
243 प्रश्न. नगरपालिकाओं का गठन।-
(1) प्रत्येक राज्य में निम्नलिखित का गठन किया जाएगा:-
(क) किसी संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत (चाहे उसे किसी भी नाम से पुकारा जाए), अर्थात् ग्रामीण क्षेत्र से शहरी क्षेत्र में संक्रमणकालीन क्षेत्र;
(ख) लघु शहरी क्षेत्र के लिए नगर परिषद; और (ग) इस भाग के प्रावधानों के अनुसार, वृहत्तर शहरी क्षेत्र के लिए नगर निगम:
बशर्ते कि इस खंड के अंतर्गत किसी नगर पालिका का गठन ऐसे शहरी क्षेत्र या उसके किसी भाग में नहीं किया जा सकता है जिसे राज्यपाल, क्षेत्र के आकार और उस क्षेत्र में किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान द्वारा प्रदान की जा रही या प्रस्तावित नगरपालिका सेवाओं तथा ऐसे अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए, सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा औद्योगिक नगर पालिका के रूप में निर्दिष्ट कर दे।
(2) इस अनुच्छेद में, "संक्रमणकालीन क्षेत्र", "छोटा शहरी क्षेत्र" या "बड़ा शहरी क्षेत्र" से तात्पर्य ऐसे क्षेत्र से है जिसे राज्यपाल, क्षेत्र की जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व, स्थानीय प्रशासन के लिए उत्पन्न राजस्व, गैर-कृषि गतिविधियों में रोजगार का प्रतिशत, आर्थिक महत्व या ऐसे अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए, इस भाग के प्रयोजनों के लिए सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट कर सकता है।
243आर. नगरपालिकाओं की संरचना।-
(1) खंड (2) में दिए गए प्रावधान के अनुसार, नगरपालिका की सभी सीटें नगरपालिका क्षेत्र के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने गए व्यक्तियों द्वारा भरी जाएंगी और इस प्रयोजन के लिए प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र को प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा जिन्हें वार्ड के नाम से जाना जाएगा।
(2) किसी राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा प्रावधान कर सकता है-
(क) किसी नगर पालिका में प्रतिनिधित्व के लिए-
(i) नगर प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव रखने वाले व्यक्ति;
(ii) लोकसभा के सदस्य और राज्य की विधान सभा के सदस्य जो उन निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनमें पूर्णतः या आंशिकतः नगरपालिका क्षेत्र शामिल है;
(iii) राज्य परिषद के सदस्य और नगरपालिका क्षेत्र के भीतर मतदाता के रूप में पंजीकृत राज्य की विधान परिषद के सदस्य;
(iv) अनुच्छेद 243S के खंड (5) के अधीन गठित समितियों के अध्यक्ष: बशर्ते कि पैराग्राफ (i) में निर्दिष्ट व्यक्तियों को नगरपालिका की बैठकों में मतदान करने का अधिकार नहीं होगा;
(ख) नगरपालिका के अध्यक्ष के चुनाव का तरीका।
धारा 243 एस. वार्ड समितियों आदि का गठन एवं संरचना-
(1) तीन लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाली नगरपालिका के प्रादेशिक क्षेत्र के भीतर एक या एक से अधिक वार्डों से मिलकर वार्ड समितियाँ गठित की जाएँगी।
(2) किसी राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा निम्नलिखित के संबंध में प्रावधान कर सकता है-
(क) वार्ड समिति की संरचना और प्रादेशिक क्षेत्र;
(ख) वार्ड समिति में सीटों को भरने का तरीका।
(3) वार्ड समिति के प्रादेशिक क्षेत्र के भीतर किसी वार्ड का प्रतिनिधित्व करने वाला नगर पालिका का सदस्य उस समिति का सदस्य होगा।
(4) जहाँ वार्ड समिति में निम्नलिखित सदस्य हों-
(क) एक वार्ड, नगरपालिका में उस वार्ड का प्रतिनिधित्व करने वाला सदस्य; या
(ख) दो या दो से अधिक वार्डों के मामले में, वार्ड समिति के सदस्यों द्वारा निर्वाचित नगर पालिका में ऐसे वार्डों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों में से एक उस समिति का अध्यक्ष होगा।
(5) इस अनुच्छेद में ऐसा कुछ भी नहीं माना जाएगा जिससे किसी राज्य के विधानमंडल को वार्ड समितियों के अतिरिक्त समितियों के गठन के लिए कोई प्रावधान करने से रोका जा सके।
243T. सीटों का आरक्षण।-
(1) प्रत्येक नगर पालिका में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आरक्षित होंगी और इस प्रकार आरक्षित सीटों की संख्या, जहां तक संभव हो, उस नगर पालिका में प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा भरी जाने वाली कुल सीटों के अनुपात में होगी, जिस अनुपात में उस नगर पालिका क्षेत्र में अनुसूचित जाति की जनसंख्या या उस नगर पालिका क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या के अनुपात में है और ऐसी सीटें नगर पालिका के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बारी-बारी से आवंटित की जा सकती हैं।
(2) खंड (1) के अधीन आरक्षित कुल सीटों में से कम से कम एक तिहाई सीटें अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
(3) प्रत्येक नगरपालिका में प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा भरी जाने वाली कुल सीटों में से कम से कम एक तिहाई (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की संख्या सहित) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और ऐसी सीटें नगरपालिका के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बारी-बारी से आवंटित की जा सकती हैं।
(4) नगरपालिकाओं में अध्यक्षों के पद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए इस प्रकार आरक्षित होंगे, जैसा कि किसी राज्य का विधानमंडल कानून द्वारा प्रदान करे।
(5) खंड (1) और (2) के अधीन सीटों का आरक्षण तथा खंड (4) के अधीन अध्यक्षों के पदों का आरक्षण (महिलाओं के लिए आरक्षण के अलावा) अनुच्छेद 334 में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति पर प्रभावी नहीं रहेगा।
(6) इस भाग में कोई बात किसी राज्य के विधानमंडल को पिछड़े वर्ग के नागरिकों के पक्ष में किसी नगरपालिका में सीटों या नगरपालिकाओं में अध्यक्षों के पदों के आरक्षण के लिए कोई प्रावधान करने से नहीं रोकेगी।
243U. नगरपालिकाओं आदि की अवधि-
(1) प्रत्येक नगरपालिका, जब तक कि किसी लागू कानून के तहत उसे भंग न कर दिया जाए, अपनी पहली बैठक के लिए निर्धारित तिथि से पाँच वर्ष तक अस्तित्व में रहेगी और इससे अधिक नहीं: बशर्ते कि नगरपालिका को भंग होने से पहले सुनवाई का उचित अवसर दिया जाएगा।
(2) किसी भी कानून में, जो उस समय लागू हो, संशोधन से पहले कार्यरत किसी नगरपालिका को किसी भी स्तर पर भंग करने का प्रभाव नहीं पड़ेगा, जब तक कि खंड (1) में निर्दिष्ट अवधि समाप्त न हो जाए।
(3) नगरपालिका के गठन के लिए चुनाव संपन्न किया जाएगा,-
(क) खंड (1) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पहले;
(ख) इसके विघटन की तिथि से छह माह की अवधि समाप्त होने से पहले: बशर्ते कि जहां विघटन की गई नगरपालिका के जारी रहने की शेष अवधि छह माह से कम हो, तो ऐसी अवधि के लिए नगरपालिका के गठन हेतु इस खंड के अंतर्गत कोई चुनाव कराना आवश्यक नहीं होगा।
(4) किसी नगर पालिका के विघटन के बाद गठित नगर पालिका, उसकी अवधि समाप्त होने से पहले, केवल शेष अवधि के लिए ही अस्तित्व में रहेगी, जिसके लिए विघटित नगर पालिका खंड (1) के तहत अस्तित्व में रहती, यदि वह इस प्रकार भंग न हुई होती।
243V. सदस्यता के लिए अयोग्यताएँ।-
(1) कोई व्यक्ति नगरपालिका के सदस्य के रूप में चुने जाने और नगरपालिका का सदस्य बने रहने के लिए अयोग्य होगा-
(क) यदि वह संबंधित राज्य के विधानमंडल के चुनावों के प्रयोजनों के लिए उस समय लागू किसी कानून द्वारा या उसके तहत अयोग्य घोषित किया गया हो: बशर्ते कि कोई भी व्यक्ति इस आधार पर अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा कि उसकी आयु पच्चीस वर्ष से कम है, यदि उसने इक्कीस वर्ष की आयु प्राप्त कर ली हो;
(ख) यदि वह राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया हो।
(2) यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या किसी नगरपालिका का कोई सदस्य खंड (1) में उल्लिखित किसी अयोग्यता के अधीन हो गया है, तो प्रश्न को ऐसे प्राधिकारी के निर्णय के लिए और ऐसे तरीके से भेजा जाएगा जैसा कि किसी राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा निर्धारित करे।
243W. नगरपालिकाओं आदि की शक्तियां, अधिकार और जिम्मेदारियां-
इस संविधान के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा निधि प्रदान कर सकता है-
(क) नगरपालिकाओं को ऐसी शक्तियाँ और अधिकार दिए जा सकते हैं जो उन्हें स्वशासन संस्थाओं के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हों, और ऐसे कानून में नगरपालिकाओं को शक्तियों और जिम्मेदारियों के हस्तांतरण के लिए प्रावधान हो सकते हैं, जो उसमें निर्दिष्ट शर्तों के अधीन होंगे, निम्नलिखित के संबंध में-
(i) आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाओं की तैयारी;
(ii) उन्हें सौंपे गए कार्यों का निष्पादन और योजनाओं का कार्यान्वयन, जिनमें बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध मामलों से संबंधित कार्य भी शामिल हैं;
(ख) समितियों को ऐसी शक्तियाँ और अधिकार दिए जाएँगे जो उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक हों, जिनमें बारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध मामलों से संबंधित जिम्मेदारियाँ भी शामिल हैं।
243X. नगरपालिकाओं द्वारा कर लगाने की शक्ति और नगरपालिकाओं के कोष।
किसी राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा,-
(क) किसी नगरपालिका को ऐसी प्रक्रिया के अनुसार और ऐसी सीमाओं के अधीन रहते हुए ऐसे कर, शुल्क, टोल और फीस लगाने, वसूलने और विनियोजित करने के लिए अधिकृत करना;
(ख) राज्य सरकार द्वारा ऐसे प्रयोजनों के लिए तथा ऐसी शर्तों और सीमाओं के अधीन लगाए और वसूल किए जाने वाले ऐसे कर, शुल्क, टोल और शुल्क किसी नगरपालिका को सौंपना;
(ग) राज्य की समेकित निधि से नगरपालिकाओं को अनुदान देने का प्रावधान करना; और (घ) नगरपालिकाओं द्वारा या उनकी ओर से प्राप्त सभी धन को जमा करने के लिए तथा उसमें से ऐसे धन की निकासी के लिए, जैसा कि विधि में निर्दिष्ट हो, ऐसे कोषों के गठन का प्रावधान करना।
243वां वित्त आयोग।
(1) अनुच्छेद 243-I के अधीन गठित वित्त आयोग नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा और राज्यपाल को निम्नलिखित के संबंध में सिफारिशें प्रस्तुत करेगा:
(क) वे सिद्धांत जो मार्गदर्शक होने चाहिए-
(i) राज्य द्वारा लगाए जाने वाले करों, शुल्कों, टोलों और शुल्कों की शुद्ध आय का राज्य और नगरपालिकाओं के बीच वितरण, जिसे इस भाग के अंतर्गत उनके बीच विभाजित किया जा सकता है, और ऐसी आय में से नगरपालिकाओं के संबंधित हिस्सों का सभी स्तरों पर नगरपालिकाओं के बीच आवंटन;
(ii) नगरपालिकाओं को आवंटित या उनके द्वारा विनियोजित किए जा सकने वाले करों, शुल्कों, टोलों और शुल्कों का निर्धारण;
(iii) राज्य की समेकित निधि से नगरपालिकाओं को दी जाने वाली अनुदान सहायता;
(ख) नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक उपाय;
(ग) नगरपालिकाओं के सुदृढ़ वित्त के हित में राज्यपाल द्वारा वित्त आयोग को संदर्भित कोई अन्य मामला।
(2) राज्यपाल इस अनुच्छेद के अधीन आयोग द्वारा की गई प्रत्येक अनुशंसा, उस पर की गई कार्रवाई के संबंध में स्पष्टीकरण ज्ञापन सहित, राज्य के विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करवाएगा।
243Z. नगरपालिकाओं के खातों का लेखापरीक्षा।-
किसी राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, नगरपालिकाओं द्वारा खातों के रखरखाव और ऐसे खातों के लेखापरीक्षा के संबंध में प्रावधान कर सकता है।
243ZA. नगरपालिकाओं के चुनाव।-
(1) नगर पालिकाओं के लिए मतदाता सूचियों की तैयारी और चुनावों के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण अनुच्छेद 243के में निर्दिष्ट राज्य चुनाव आयोग में निहित होगा।
(2) इस संविधान के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा, नगरपालिकाओं के चुनावों से संबंधित या उससे जुड़े सभी मामलों के संबंध में प्रावधान कर सकता है।
243ZB. केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होना।-
इस भाग के प्रावधान केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होंगे और किसी केंद्र शासित प्रदेश पर लागू होने की स्थिति में, इनका प्रभाव इस प्रकार होगा मानो किसी राज्य के राज्यपाल के संदर्भ अनुच्छेद 239 के अधीन नियुक्त केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक के संदर्भ हों और किसी राज्य के विधानमंडल या विधान सभा के संदर्भ किसी ऐसे केंद्र शासित प्रदेश के संदर्भ में, जिसमें विधान सभा हो, उस विधान सभा के संदर्भ हों।
बशर्ते कि राष्ट्रपति सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा यह निर्देश दे सकते हैं कि इस भाग के प्रावधान किसी भी केंद्र शासित प्रदेश या उसके किसी भाग पर लागू होंगे, ऐसे अपवादों और संशोधनों के अधीन रहते हुए जिन्हें वे अधिसूचना में निर्दिष्ट कर सकते हैं।
243ZC. यह भाग कुछ क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा।
(1) इस भाग में कोई बात अनुच्छेद 244 के खंड (1) में निर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्रों और खंड (2) में निर्दिष्ट जनजातीय क्षेत्रों पर लागू नहीं होगी।
(2) इस भाग में कोई भी बात पश्चिम बंगाल राज्य के दार्जिलिंग जिले के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उस समय लागू किसी भी कानून के तहत गठित दार्जिलिंग गोरखा पहाड़ी परिषद के कार्यों और शक्तियों को प्रभावित करने के रूप में नहीं समझी जाएगी।
(3) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, संसद विधि द्वारा इस भाग के प्रावधानों को खंड (1) में निर्दिष्ट अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों में ऐसे अपवादों और संशोधनों के अधीन रहते हुए विस्तारित कर सकती है, जैसा कि ऐसी विधि में निर्दिष्ट किया जा सकता है, और ऐसी कोई विधि अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं मानी जाएगी।
243 जेडडी. जिला योजना समिति।
(1) प्रत्येक राज्य में जिला स्तर पर जिला योजना समिति का गठन किया जाएगा, जो जिले में पंचायतों और नगरपालिकाओं द्वारा तैयार की गई योजनाओं को समेकित करेगी और पूरे जिले के लिए एक मसौदा विकास योजना तैयार करेगी।
(2) किसी राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा निम्नलिखित के संबंध में प्रावधान कर सकता है-
(क) जिला योजना समितियों की संरचना;
(ख) ऐसी समितियों में सीटों को भरने का तरीका:
बशर्ते कि ऐसी समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम चार-पांचवें सदस्य जिले में पंचायत और नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात में चुने जाएंगे;
(ग) जिला नियोजन से संबंधित वे कार्य जो ऐसी समितियों को सौंपे जा सकते हैं;
(घ) ऐसी समितियों के अध्यक्षों का चुनाव किस प्रकार किया जाएगा।
(3) प्रत्येक जिला योजना समिति, विकास योजना का मसौदा तैयार करते समय,-
(क) ध्यान में रखते हुए-
(i) पंचायतों और नगरपालिकाओं के बीच सामान्य हित के मामले जिनमें स्थानिक योजना, जल और अन्य भौतिक एवं प्राकृतिक संसाधनों का बंटवारा, बुनियादी ढांचे का एकीकृत विकास और पर्यावरण संरक्षण शामिल हैं;
(ii) उपलब्ध संसाधनों की सीमा और प्रकार, चाहे वे वित्तीय हों या अन्य;
(ख) राज्यपाल द्वारा आदेश द्वारा निर्दिष्ट ऐसे संस्थानों और संगठनों से परामर्श करना।
(4) प्रत्येक जिला योजना समिति का अध्यक्ष ऐसी समिति द्वारा अनुशंसित विकास योजना को राज्य सरकार को अग्रेषित करेगा।
243ZE. महानगर नियोजन समिति।
(I) प्रत्येक महानगर क्षेत्र में एक महानगर नियोजन समिति का गठन किया जाएगा जो पूरे महानगर क्षेत्र के लिए एक मसौदा विकास योजना तैयार करेगी।
(2) किसी राज्य का विधानमंडल विधि द्वारा निम्नलिखित के संबंध में प्रावधान कर सकता है-
(क) महानगर नियोजन समितियों की संरचना;
(ख) ऐसी समितियों में सीटों को भरने का तरीका:
बशर्ते कि ऐसी समिति के कम से कम दो-तिहाई सदस्य महानगर क्षेत्र में स्थित नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों और पंचायतों के अध्यक्षों द्वारा उस क्षेत्र की नगरपालिकाओं और पंचायतों की जनसंख्या के अनुपात में चुने जाएंगे;
(ग) ऐसी समितियों में भारत सरकार और राज्य सरकार तथा ऐसे संगठनों और संस्थानों का प्रतिनिधित्व, जिन्हें ऐसी समितियों को सौंपे गए कार्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक समझा जाए;
(घ) महानगर क्षेत्र के लिए योजना और समन्वय से संबंधित कार्य जो ऐसी समितियों को सौंपे जा सकते हैं;
(ई) ऐसी समितियों के अध्यक्षों का चुनाव किस प्रकार किया जाएगा।
(3) प्रत्येक महानगर नियोजन समिति, विकास योजना का मसौदा तैयार करते समय,-
(क) ध्यान में रखते हुए-
(i) महानगर क्षेत्र में नगरपालिकाओं और पंचायतों द्वारा तैयार की गई योजनाएँ;
(ii) नगरपालिकाओं और पंचायतों के बीच सामान्य हित के मामले, जिनमें क्षेत्र की समन्वित स्थानिक योजना, जल और अन्य भौतिक एवं प्राकृतिक संसाधनों का बंटवारा, बुनियादी ढांचे का एकीकृत विकास और पर्यावरण संरक्षण शामिल हैं;
(iii) भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समग्र उद्देश्य और प्राथमिकताएं;
(iv) भारत सरकार और राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा महानगर क्षेत्र में किए जाने वाले संभावित निवेशों की सीमा और प्रकृति तथा अन्य उपलब्ध संसाधन, चाहे वे वित्तीय हों या अन्य;
(ख) राज्यपाल द्वारा आदेश द्वारा निर्दिष्ट ऐसे संस्थानों और संगठनों से परामर्श करना।
(4) प्रत्येक महानगर नियोजन समिति का अध्यक्ष ऐसी समिति द्वारा अनुशंसित विकास योजना को राज्य सरकार को अग्रेषित करेगा।
243ZF. मौजूदा कानूनों और नगरपालिकाओं का निरंतर संचालन।
इस भाग में किसी बात के होते हुए भी, संविधान (चौहत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 के प्रारंभ होने से ठीक पहले किसी राज्य में नगरपालिकाओं से संबंधित लागू किसी भी कानून का कोई भी प्रावधान, जो इस भाग के प्रावधानों के साथ असंगत है, तब तक लागू रहेगा जब तक कि सक्षम विधानमंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसमें संशोधन या उसे निरस्त न कर दिया जाए, या ऐसे प्रारंभ होने की तिथि से एक वर्ष की समाप्ति तक, जो भी पहले हो।
बशर्ते कि ऐसे प्रारंभ होने से ठीक पहले विद्यमान सभी नगरपालिकाएँ अपनी अवधि की समाप्ति तक बनी रहेंगी, जब तक कि उस राज्य की विधान सभा द्वारा या, यदि किसी राज्य में विधान परिषद है, तो उस राज्य के विधानमंडल के प्रत्येक सदन द्वारा इस आशय का प्रस्ताव पारित करके उन्हें पहले भंग न कर दिया जाए।
243ZG. चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक।
इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,-
(क) अनुच्छेद 243जेडए के तहत बनाए गए या बनाए जाने का दावा किए गए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों को सीटों के आवंटन से संबंधित किसी भी कानून की वैधता पर किसी भी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जाएगा;
(ख) किसी भी नगरपालिका के चुनाव पर तब तक प्रश्न नहीं उठाया जाएगा जब तक कि किसी राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी कानून द्वारा निर्धारित तरीके से और ऐसे प्राधिकारी को चुनाव याचिका प्रस्तुत न की जाए।
अनुच्छेद 280 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 280 के खंड (3) में उपखंड (ग) को उपखंड (घ) के रूप में पुनः अंकित किया जाएगा और इस प्रकार पुनः अंकित उपखंड (घ) से पहले निम्नलिखित उपखंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
(ग) राज्य के वित्त आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर राज्य की नगरपालिकाओं के संसाधनों की पूर्ति के लिए राज्य की समेकित निधि को बढ़ाने हेतु आवश्यक उपाय;
बारहवीं अनुसूची का जोड़ा जाना
संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची के बाद निम्नलिखित अनुसूची जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
बारहवीं अनुसूची (अनुच्छेद 243W)
1. नगर नियोजन सहित शहरी नियोजन।
2. भूमि उपयोग और भवनों के निर्माण का विनियमन।
3. आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए योजना बनाना।
4. सड़कें और पुल।
5. घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए जल आपूर्ति।
6. जन स्वास्थ्य, स्वच्छता संरक्षण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन।
7. अग्निशमन सेवाएं।
8. शहरी वानिकी, पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिक पहलुओं को बढ़ावा देना।
9. विकलांग और मानसिक रूप से मंद व्यक्तियों सहित समाज के कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा करना।
10. झुग्गी-झोपड़ी सुधार एवं उन्नयन।
11. शहरी गरीबी उन्मूलन।
12. शहरी सुख-सुविधाओं जैसे पार्क, उद्यान, खेल के मैदान आदि का प्रावधान।
13. सांस्कृतिक, शैक्षिक और सौंदर्यपरक पहलुओं को बढ़ावा देना।
14. दफन और दफन स्थल; दाह संस्कार, दाह संस्कार स्थल और विद्युत श्मशान गृह।
15. पशु बाड़े; पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम।
16. जन्म और मृत्यु के पंजीकरण सहित महत्वपूर्ण आंकड़े।
17. सार्वजनिक सुविधाएं जिनमें स्ट्रीट लाइटिंग, पार्किंग स्थल, बस स्टॉप और सार्वजनिक शौचालय शामिल हैं।
18. वधशालाओं और चमड़ा कारखानों का विनियमन।
