संविधान (70वाँ संशोधन) अधिनियम, 1992
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 54
- 239एए
संविधान (छहत्तरवाँ संशोधन) विधेयक, 1992 (विधेयक संख्या XXX, 1992) के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (सत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (छहत्तरवाँ संशोधन) विधेयक, 1992 (विधेयक संख्या XXX, 1992) के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (सत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान (चौहत्तरवाँ संशोधन) विधेयक, 1991 और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार विधेयक, 1991 पर विचार करते समय, संविधान के अनुच्छेद 54 के तहत राष्ट्रपति के चुनाव के लिए केंद्र शासित प्रदेशों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों को भी निर्वाचक मंडल में शामिल करने के पक्ष में संसद के दोनों सदनों में विचार व्यक्त किए गए थे। वर्तमान में राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित अनुच्छेद 54 में केवल संसद के निर्वाचित सदस्यों और राज्यों की विधान सभाओं (केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़कर) के निर्वाचित सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल का प्रावधान है। इसी प्रकार, ऐसे चुनाव की विधि से संबंधित अनुच्छेद 55 में भी राज्यों की विधान सभाओं का उल्लेख है। तदनुसार, अनुच्छेद 54 में एक स्पष्टीकरण जोड़ने का प्रस्ताव है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अनुच्छेद 54 और 55 में "राज्य" शब्द के संदर्भ में राष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल के गठन हेतु दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल होंगे। इससे अनुच्छेद 239ए के प्रावधानों के तहत पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के लिए गठित विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों और अनुच्छेद 239एए के तहत दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की प्रस्तावित विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों को निर्वाचक मंडल में शामिल किया जा सकेगा।
2. संविधान (चौहत्तरवाँ संशोधन) विधेयक, 1991, जिसे संविधान (उनसठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1991 के रूप में अधिनियमित किया गया था, को 21 दिसंबर, 1991 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई। उक्त विधेयक को मूल रूप से लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें अनुच्छेद 239AA में खंड (7) में उपखंड (ख) को शामिल करने का प्रस्ताव था। इस प्रस्तावित उपखंड को बाद में हटा दिया गया क्योंकि उक्त उपखंड को शामिल करने से कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा विधेयक के अनुसमर्थन की आवश्यकता होती और इस प्रकार दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश के लिए विधान सभा के शीघ्र गठन में विलंब होता। उक्त उपखंड (वर्तमान विधेयक का खंड 3) को वर्तमान संविधान (संशोधन) विधेयक में पूर्वव्यापी प्रभाव से, अर्थात् 21 दिसंबर, 1991 से, शामिल करने का प्रस्ताव है। अनुच्छेद 54 में संशोधन करने वाले विधेयक के दूसरे खंड के अनुसमर्थन के साथ-साथ इस खंड के लिए भी राज्यों से अनुसमर्थन प्राप्त करने का प्रस्ताव है।
3. यह विधेयक उपरोक्त प्रस्तावों को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के तैंतालीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (सत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 कहा जा सकता है।
(2) इस अधिनियम की धारा 3 21 दिसंबर, 1991 को लागू मानी जाएगी तथा धारा 2 ऐसी तिथि से लागू होगी जो केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
अनुच्छेद 54 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 54 में अंत में निम्नलिखित स्पष्टीकरण जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
स्पष्टीकरण - इस अनुच्छेद और अनुच्छेद 55 में, "राज्य" में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पांडिचेरी केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
अनुच्छेद 239AA का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 239एए में,-
(i) खंड (7) में, कोष्ठक और अंक "(7)" के स्थान पर कोष्ठक, अंक और अक्षर "(7) (क)" प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ii) खंड (7) में, जैसा कि संशोधित किया गया है, निम्नलिखित उपखंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
(ख) उपखंड (क) में निर्दिष्ट कोई भी कानून अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं माना जाएगा, भले ही उसमें कोई ऐसा प्रावधान हो जो इस संविधान में संशोधन करता हो या संशोधन करने का प्रभाव रखता हो।
