संविधान (71वाँ संशोधन) अधिनियम, 1992
अवलोकन
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- आठवीं अनुसूची
संविधान की आठवीं अनुसूची में कुछ भाषाओं को शामिल करने की मांग की गई है। कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव है। यह विधेयक इसी निर्णय को लागू करने का प्रयास करता है।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (अठहत्तरवाँ संशोधन) विधेयक, 1992 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (इकहत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान की आठवीं अनुसूची में कुछ भाषाओं को शामिल करने की मांग की गई है। कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव है। यह विधेयक इसी निर्णय को लागू करने का प्रयास करता है।
2. नेपाली भाषा को कुछ क्षेत्रों में 'गोरखा भाषा' के नाम से भी जाना जाता है। जनगणना कार्यों में 'गोरखाली', 'गोरखदी', 'गुरखिया', 'खस्कुरा' या 'नैपाली' जैसे अन्य नामों का भी प्रयोग किया गया है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के तैंतालीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (इकहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992 कहा जा सकता है।
आठवीं अनुसूची का संशोधन
संविधान की आठवीं अनुसूची में,-
(क) मौजूदा प्रविष्टि 7 को पुनः क्रमांकित करके प्रविष्टि 8 कर दिया जाएगा, और इस प्रकार पुनः क्रमांकित प्रविष्टि 8 से पहले "7. कोंकणी." प्रविष्टि जोड़ी जाएगी;
(ख) मौजूदा प्रविष्टि 8 को पुनः क्रमांकित करके प्रविष्टि 10 कर दिया जाएगा, और इस प्रकार पुनः क्रमांकित प्रविष्टि 10 से पहले, प्रविष्टि "9. मणिपुरी." डाली जाएगी;
(ग) मौजूदा प्रविष्टियाँ 9 से 15 को क्रमशः प्रविष्टियाँ 12 से 18 के रूप में पुनः क्रमांकित किया जाएगा, और इस प्रकार पुनः क्रमांकित प्रविष्टि 12 से पहले, प्रविष्टि "11. नेपाली." डाली जाएगी।
