संविधान (69वाँ संशोधन) अधिनियम, 1991
अवलोकन
लेख सम्मिलित किए गए
- 239एए
दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था के पुनर्गठन का प्रश्न कुछ समय से सरकार के विचाराधीन है। भारत सरकार ने 24-12-1987 को दिल्ली प्रशासन से जुड़े विभिन्न मुद्दों की जांच करने और उपायों की सिफारिश करने के लिए एक समिति नियुक्त की थी।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (चौहत्तरवाँ संशोधन) विधेयक, 1991 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (उनसठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1991 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन का प्रश्न कुछ समय से सरकार के विचाराधीन है। भारत सरकार ने 24-12-1987 को दिल्ली प्रशासन से जुड़े विभिन्न मुद्दों की जांच करने और प्रशासनिक ढांचे को सुव्यवस्थित करने के लिए उपाय सुझाने हेतु एक समिति नियुक्त की। समिति ने इस मामले की गहन जांच की और विभिन्न व्यक्तियों, संगठनों, राजनीतिक दलों और अन्य विशेषज्ञों से विचार-विमर्श करने के बाद मुद्दों पर गौर किया। समिति ने संघीय व्यवस्था वाले अन्य देशों की राजधानियों की व्यवस्थाओं, संविधान सभा में हुई चर्चाओं और पूर्व की समितियों और आयोगों की रिपोर्टों को भी ध्यान में रखा। इस प्रकार की विस्तृत जांच और परीक्षण के बाद, समिति ने सिफारिश की कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश बना रहे और उसे एक विधान सभा और एक मंत्रिपरिषद प्रदान की जाए जो आम जनता से संबंधित मामलों से निपटने के लिए उपयुक्त शक्तियों के साथ उस विधान सभा के प्रति उत्तरदायी हो। समिति ने यह भी सिफारिश की कि स्थिरता और स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिए संविधान में ऐसे प्रावधान शामिल किए जाएं जो केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय राजधानी को विशेष दर्जा प्रदान करें।
2. यह विधेयक उपरोक्त प्रस्तावों को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के बयालीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (उनसठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1991 कहा जा सकता है।
(2) यह ऐसी तिथि_678 से लागू होगा, जैसा कि केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
नए अनुच्छेद 239AA और 239AB का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 239ए के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़े जाएंगे, अर्थात्:-
`239एए. दिल्ली के संबंध में विशेष प्रावधान।-
(1) संविधान (उनसठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1991 के प्रारंभ होने की तिथि से दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश को दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (इसके बाद इस भाग में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के रूप में संदर्भित) कहा जाएगा और अनुच्छेद 239 के तहत नियुक्त इसके प्रशासक को उपराज्यपाल के रूप में नामित किया जाएगा।
(2)
(क) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए एक विधान सभा होगी और ऐसी सभा में सीटें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने गए सदस्यों द्वारा भरी जाएंगी।
(ख) विधान सभा में कुल सीटों की संख्या, अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजन (इस विभाजन के आधार सहित) और विधान सभा के कामकाज से संबंधित अन्य सभी मामले संसद द्वारा बनाए गए कानून द्वारा विनियमित किए जाएंगे।
(ग) अनुच्छेद 324 से 327 और 329 के प्रावधान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की विधान सभा और उसके सदस्यों के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे किसी राज्य, राज्य की विधान सभा और उसके सदस्यों के संबंध में लागू होते हैं; और अनुच्छेद 326 और 329 में "उपयुक्त विधानमंडल" के किसी भी संदर्भ को संसद के संदर्भ के रूप में माना जाएगा।
(3)
(क) इस संविधान के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, विधान सभा को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के संपूर्ण या किसी भाग के लिए राज्य सूची या समवर्ती सूची में सूचीबद्ध किसी भी मामले के संबंध में कानून बनाने का अधिकार होगा, जहाँ तक ऐसा कोई मामला केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होता है, सिवाय राज्य सूची की प्रविष्टियों 1, 2 और 18 तथा उस सूची की प्रविष्टियों 64, 65 और 66 से संबंधित मामलों के, जहाँ तक वे उक्त प्रविष्टियों 1, 2 और 18 से संबंधित हैं।
(ख) उपखंड (क) में कोई बात किसी संघ राज्य या उसके किसी भाग के लिए किसी मामले के संबंध में कानून बनाने के लिए इस संविधान के अधीन संसद की शक्तियों को कम नहीं करेगी।
(ग) यदि किसी विषय के संबंध में विधान सभा द्वारा बनाए गए किसी कानून का कोई प्रावधान, उसी विषय के संबंध में संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून के किसी प्रावधान के विपरीत हो, चाहे वह विधान सभा द्वारा बनाए गए कानून से पहले या बाद में पारित किया गया हो, या किसी पूर्ववर्ती कानून के विपरीत हो, जो विधान सभा द्वारा बनाया गया कानून न हो, तो दोनों ही मामलों में, संसद द्वारा बनाया गया कानून, या जैसा भी मामला हो, ऐसा पूर्ववर्ती कानून प्रभावी होगा और विधान सभा द्वारा बनाया गया कानून, उस विपरीतता की सीमा तक, शून्य होगा।
बशर्ते कि यदि विधान सभा द्वारा बनाया गया कोई ऐसा कानून राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित किया गया हो और उसे राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हो गई हो, तो ऐसा कानून राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रभावी होगा।
इसके अलावा, इस उपखंड में कोई भी बात संसद को किसी भी समय उसी विषय के संबंध में कोई भी कानून बनाने से नहीं रोकेगी, जिसमें विधान सभा द्वारा बनाए गए कानून में कोई संशोधन, परिवर्तन या निरसन करने वाला कानून भी शामिल है।
(4) विधान सभा में मंत्रिपरिषद होगी जिसमें कुल सदस्यों की संख्या के दस प्रतिशत से अधिक सदस्य नहीं होंगे, जिसके प्रमुख मुख्यमंत्री होंगे, जो उन मामलों के संबंध में उपराज्यपाल को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देंगे जिनके संबंध में विधान सभा को कानून बनाने का अधिकार है, सिवाय उस स्थिति के जब उन्हें किसी कानून द्वारा या उसके अधीन अपने विवेक से कार्य करने की आवश्यकता हो।
बशर्ते कि किसी भी मामले पर उपराज्यपाल और उनके मंत्रियों के बीच मतभेद होने की स्थिति में, उपराज्यपाल उस मामले को निर्णय के लिए राष्ट्रपति के पास भेजेंगे और राष्ट्रपति द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार कार्य करेंगे। ऐसे निर्णय के लंबित रहने के दौरान, यदि उपराज्यपाल को लगता है कि मामला इतना अत्यावश्यक है कि उनके लिए तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक है, तो वे उस मामले में ऐसी कार्रवाई कर सकते हैं या ऐसा निर्देश दे सकते हैं जैसा वे आवश्यक समझें।
(5) मुख्यमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाएगी तथा मंत्री राष्ट्रपति की इच्छा के अनुसार पद पर बने रहेंगे।
(6) मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधान सभा के प्रति उत्तरदायी होगी।
(7) संसद विधि द्वारा पूर्वोक्त खंडों में निहित प्रावधानों को प्रभावी करने या पूरक करने तथा उनसे संबंधित सभी मामलों के लिए प्रावधान कर सकती है।
(8) अनुच्छेद 239B के प्रावधान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, उपराज्यपाल और विधान सभा के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे, जिस प्रकार वे क्रमशः पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश, प्रशासक और उसके विधानमंडल के संबंध में लागू होते हैं; और उस अनुच्छेद में "अनुच्छेद 239A के खंड (1)" का कोई भी संदर्भ इस अनुच्छेद या अनुच्छेद 239AB का संदर्भ माना जाएगा, जैसा भी मामला हो।
239AB. संवैधानिक तंत्र के विफल होने की स्थिति में प्रावधान.-यदि राष्ट्रपति, उपराज्यपाल से रिपोर्ट प्राप्त होने पर या अन्यथा, संतुष्ट हो जाते हैं-
(क) ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का प्रशासन अनुच्छेद 239एए या उस अनुच्छेद के अनुसरण में बनाए गए किसी कानून के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता; या
(ख) यदि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के उचित प्रशासन के लिए ऐसा करना आवश्यक या उपयुक्त हो, तो राष्ट्रपति आदेश द्वारा अनुच्छेद 239एए के किसी प्रावधान या उस अनुच्छेद के अनुसरण में बनाए गए किसी कानून के सभी या किसी भी प्रावधान के संचालन को ऐसी अवधि और ऐसी शर्तों के अधीन निलंबित कर सकते हैं, जैसा कि उस कानून में निर्दिष्ट किया जा सकता है, और ऐसे आकस्मिक और परिणामी प्रावधान कर सकते हैं जो उन्हें अनुच्छेद 239 और अनुच्छेद 239एए के प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रशासन के लिए आवश्यक या उपयुक्त प्रतीत हों।
