संविधान (60वाँ संशोधन) अधिनियम, 1988
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 276
संविधान के अनुच्छेद 276 के खंड (2) में यह निर्दिष्ट है कि किसी एक व्यक्ति के संबंध में राज्य या किसी एक नगरपालिका, जिला बोर्ड, स्थानीय बोर्ड या राज्य में स्थित किसी अन्य स्थानीय प्राधिकरण को राज्य विधानमंडल द्वारा लगाए गए व्यवसायों, व्यापारों, पेशों और रोजगारों पर करों के रूप में देय कुल राशि...
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (साठवाँ संशोधन) विधेयक, 1988 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (साठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1988 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 276 के खंड (2) में यह निर्दिष्ट है कि किसी एक व्यक्ति द्वारा राज्य या किसी नगरपालिका, जिला बोर्ड, स्थानीय बोर्ड या राज्य में स्थित किसी अन्य स्थानीय प्राधिकरण को, उस अनुच्छेद के खंड (1) के अधीन राज्य विधानमंडल द्वारा लगाए जाने वाले व्यवसायों, व्यापारों, पेशों और रोजगारों पर करों के रूप में देय कुल राशि प्रति वर्ष दो सौ पचास रुपये से अधिक नहीं होगी। यद्यपि, उस खंड का परंतुक किसी राज्य, नगरपालिका आदि में प्रति वर्ष दो सौ पचास रुपये से अधिक की दर से ऐसे कर की वसूली जारी रखने की अनुमति देता है, यदि संविधान के प्रारंभ होने से ठीक पूर्व के वित्तीय वर्ष में उस राज्य, नगरपालिका आदि में उस दर से अधिक का कोई ऐसा कर लागू था।
2. कुछ राज्य सरकारों ने यह निवेदन किया है कि 1949 में निर्धारित ढाई सौ रुपये के इस विक्रय कर को मूल्य वृद्धि और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए संशोधित किया जाना चाहिए। यह भी बताया गया है कि वर्तमान में यह व्यवसाय कर लगभग प्रतिगामी हो गया है क्योंकि इसकी अधिकतम सीमा तय है, यहाँ तक कि उच्च वेतनभोगी लोगों को भी यह कर प्रति वर्ष अधिकतम ढाई सौ रुपये ही देना पड़ता है। व्यवसाय कर में वृद्धि से राज्य सरकारों को अतिरिक्त संसाधन जुटाने में भी सहायता मिलेगी।
3. तदनुसार, संविधान के अनुच्छेद 276 के खंड (2) में संशोधन करके व्यवसाय कर की अधिकतम सीमा को दो सौ पचास रुपये प्रति वर्ष से बढ़ाकर दो हजार पांच सौ रुपये प्रति वर्ष करने का प्रस्ताव है। इस खंड का परंतुक अब प्रासंगिक नहीं है, इसलिए इसे हटाने का प्रस्ताव है।
4. इस विधेयक का उद्देश्य उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति करना है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के उनतीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (साठवां संशोधन) अधिनियम, 1988 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 276 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 276 में, खंड (2) में,-
(क) "दो सौ पचास रुपये" शब्दों के स्थान पर "दो हजार पांच सौ रुपये" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ख) परंतुक हटा दिया जाएगा।
