संविधान (59वाँ संशोधन) अधिनियम, 1988
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 356
लेख सम्मिलित किए गए
- 359ए
संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (5) के तहत, उस अनुच्छेद के खंड (1) के तहत जारी राष्ट्रपति की घोषणा को एक वर्ष से आगे लागू रखने की मंजूरी देने वाला प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन द्वारा तब तक पारित नहीं किया जा सकता जब तक कि उस खंड में निर्दिष्ट दो शर्तें पूरी न हों।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (उनसठवाँ संशोधन) विधेयक, 1988 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (उनसठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1988 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (5) के अनुसार, उस अनुच्छेद के खंड (1) के तहत जारी राष्ट्रपति की उद्घोषणा को एक वर्ष से अधिक समय तक लागू रखने के लिए संसद के किसी भी सदन द्वारा कोई प्रस्ताव तब तक पारित नहीं किया जा सकता जब तक कि उस खंड में निर्दिष्ट दो शर्तें पूरी न हों। पंजाब राज्य के संबंध में जारी की गई उद्घोषणा के मामले में एक वर्ष की अवधि 10 मई, 1988 को समाप्त होने वाली है। पंजाब में लगातार जारी अशांत स्थिति, आतंकवादियों और राष्ट्रविरोधी ताकतों की बढ़ती गतिविधियों के कारण निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की मृत्यु और इस तथ्य को देखते हुए कि मौजूदा परिस्थितियों में लोकप्रिय सरकार का गठन लगभग असंभव होने के कारण पंजाब राज्य विधानसभा को भंग करना पड़ा, पंजाब में उक्त उद्घोषणा को एक वर्ष से अधिक समय तक लागू रखना आवश्यक हो सकता है। अतः संविधान के अनुच्छेद 356(5) में संशोधन प्रस्तावित किया जाता है ताकि उक्त उद्घोषणा को, यदि आवश्यक हो, तो उस अनुच्छेद के खंड (4) के अनुसार तीन वर्ष की अवधि तक विस्तारित करने की सुविधा प्रदान की जा सके।
ऐसा माना जा रहा है कि 10 मई, 1988 के बाद उद्घोषणा को जारी रखना प्रभावी नहीं होगा क्योंकि आतंकवादी गतिविधियाँ बढ़ रही थीं। पंजाब राज्य में या उसके कुछ विशेष जिलों में आंशिक आपातकाल घोषित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 352 के प्रावधानों का सहारा लेना आवश्यक हो सकता है। यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो उस अनुच्छेद में आपातकाल घोषित करने के आधारों में से एक के रूप में शामिल "सशस्त्र विद्रोह" शब्द (जिसका सहारा केवल आंतरिक आपातकाल की स्थिति में लिया जा सकता है) पंजाब की वर्तमान स्थिति में उद्घोषणा जारी करने के लिए उपयुक्त नहीं होगा। इसलिए, यह माना जा रहा है कि अनुच्छेद 352 को पंजाब राज्य पर लागू करने के लिए उपयुक्त रूप से संशोधित किया जाए ताकि इसमें "आंतरिक अशांति" को उन आधारों में से एक के रूप में शामिल किया जा सके, जिससे भारत की अखंडता को भारत के किसी भी भाग में आंतरिक अशांति से खतरा हो, ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर उस अनुच्छेद के तहत कार्रवाई करना सुगम हो सके। संविधान के प्रारंभ से लेकर संविधान (चौवालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1978 द्वारा संशोधन किए जाने तक, "आंतरिक अशांति" अभिव्यक्ति उस अनुच्छेद में शामिल आधारों में से एक थी। फलस्वरूप, अनुच्छेद 358 और 359 में भी संशोधन प्रस्तावित है ताकि संविधान के अनुच्छेद 19 के स्वतः निलंबन और राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 359 के अंतर्गत भाग III (अनुच्छेद 20 को छोड़कर) में निहित किसी भी अन्य प्रावधान के संचालन को निलंबित करने का आदेश जारी करने का प्रावधान किया जा सके, यदि पंजाब राज्य के संपूर्ण या किसी भाग के संबंध में आंतरिक अशांति के आधार पर आपातकाल की घोषणा जारी की जाती है।
चूंकि प्रस्तावित संशोधन केवल पंजाब राज्य में आतंकवादी गतिविधियों पर अधिक प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने के उद्देश्य से हैं, इसलिए इन संशोधनों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग उक्त उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक अवधि से अधिक समय के लिए नहीं किया जाएगा। तदनुसार, अनुच्छेद 352, 358 और 359 में प्रस्तावित संशोधन इस संशोधन के प्रारंभ होने की तिथि से केवल दो वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी होंगे।
इस विधेयक का उद्देश्य उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना है।
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम।
भारत गणराज्य के उनतीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (उनसठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1988 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 356 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 356 में खंड (5) में परंतुक के स्थान पर निम्नलिखित परंतुक प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
इस खंड में कोई भी बात पंजाब राज्य के संबंध में 11 मई, 1987 को खंड (1) के तहत जारी की गई उद्घोषणा पर लागू नहीं होगी।
नए अनुच्छेद 359A का अंतःस्थापन
(1) संविधान के अनुच्छेद 359 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
`359ए. इस भाग का पंजाब राज्य पर लागू होना.- इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, पंजाब राज्य के संबंध में इस भाग में निम्नलिखित संशोधन किए जाएंगे, अर्थात्:-
(क) अनुच्छेद 352 में,-
(i) खंड (1) में,-
(ए) आरंभिक भाग के स्थान पर निम्नलिखित प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
यदि राष्ट्रपति संतुष्ट हैं कि कोई गंभीर आपात स्थिति मौजूद है जिसके कारण-
(क) भारत की सुरक्षा या उसके किसी भाग की सुरक्षा को युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से खतरा हो; या
(ख) पंजाब के पूरे या किसी भाग में आंतरिक अशांति के कारण भारत की अखंडता खतरे में है।
वह उद्घोषणा द्वारा संपूर्ण पंजाब या उसके ऐसे भाग के संबंध में, जैसा कि उद्घोषणा में निर्दिष्ट किया गया हो, इस आशय की घोषणा कर सकता है।
(ख) स्पष्टीकरण में,-
(1) "सशस्त्र विद्रोह" शब्दों के बाद, "या यह कि पंजाब के पूरे या किसी भाग में आंतरिक अशांति से भारत की अखंडता खतरे में है" शब्द जोड़े जाएंगे;
(2) "या विद्रोह" शब्दों के बाद, "या अशांति" शब्द जोड़े जाएंगे:
(ii) खंड (9) में, "सशस्त्र विद्रोह" शब्दों के बाद, दोनों स्थानों पर जहाँ वे आते हैं, "या आंतरिक अशांति" शब्द जोड़े जाएँगे;
(ख) अनुच्छेद 358 में, खंड (1) में, "या बाह्य आक्रमण द्वारा" शब्दों के पश्चात, "या सशस्त्र विद्रोह द्वारा, या कि भारत की अखंडता पंजाब के संपूर्ण या किसी भाग में आंतरिक अशांति से खतरे में है" शब्द जोड़े जाएंगे;
(ग) अनुच्छेद 359 में, "अनुच्छेद 20 और 21" शब्दों और अंकों के स्थान पर, दोनों स्थानों पर जहां वे आते हैं, "अनुच्छेद 20" शब्द और अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
(2) उपधारा (1) द्वारा संविधान में किया गया संशोधन इस अधिनियम के प्रारंभ होने के दो वर्ष की अवधि समाप्त होने पर समाप्त हो जाएगा, सिवाय उन कार्यों के जो ऐसे समाप्ति से पहले किए गए हों या न किए गए हों।
