संविधान (61वाँ संशोधन) अधिनियम, 1988
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 326
संविधान के अनुच्छेद 326 में यह प्रावधान है कि लोकसभा और प्रत्येक राज्य की विधान सभा के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे, अर्थात् किसी व्यक्ति की आयु 21 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (बासठवाँ संशोधन) विधेयक, 1988 (विधेयक संख्या 129, 1988) के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (इकसठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1988 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 326 में यह प्रावधान है कि लोकसभा और प्रत्येक राज्य की विधान सभा के चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होंगे, अर्थात् किसी व्यक्ति की आयु 21 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। यह देखा गया है कि कई देशों ने मतदान की आयु 18 वर्ष निर्धारित की है। हमारे देश में कुछ राज्य सरकारों ने स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए भी 18 वर्ष की आयु निर्धारित की है। आज के युवा साक्षर और जागरूक हैं और मतदान की आयु कम करने से देश के उन युवाओं को, जिनका प्रतिनिधित्व नहीं होता, अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर मिलेगा और वे राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे। आज के युवा राजनीतिक रूप से काफी जागरूक हैं। इसलिए, मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने का प्रस्ताव है।
2. यह विधेयक उपरोक्त उद्देश्य की प्राप्ति का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के उनतीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (इकसठवाँ संशोधन) अधिनियम, 1988 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 326 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 326 में, "इक्कीस वर्ष" शब्दों के स्थान पर "अठारह वर्ष" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
