संविधान (55वाँ संशोधन) अधिनियम, 1986
अवलोकन
लेख सम्मिलित किए गए
- 371एच
भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव निम्नलिखित प्रकार से है:-
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (पचपनवाँ संशोधन) विधेयक, 1986 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (पचपनवाँ संशोधन) अधिनियम, 1986 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव निम्नलिखित प्रकार से है:-
अरुणाचल प्रदेश की संवेदनशील भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, प्रस्तावित नए राज्य के राज्यपाल को राज्य में कानून और व्यवस्था के संबंध में विशेष जिम्मेदारी होगी और अपने कार्यों के निर्वहन में, राज्यपाल मंत्रिपरिषद से परामर्श करने के बाद, की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में अपने व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करेंगे और राज्यपाल की यह विशेष जिम्मेदारी तब समाप्त हो जाएगी जब राष्ट्रपति आदेश द्वारा ऐसा निर्देश देंगे।
अरुणाचल प्रदेश के नए राज्य की विधान सभा में चालीस सदस्य होंगे। लेकिन चूंकि अरुणाचल प्रदेश के केंद्र शासित प्रदेश की मौजूदा तीस सदस्यीय विधान सभा को मौजूदा विधान सभा के पांच वर्षीय कार्यकाल की समाप्ति पर चुनाव होने तक अरुणाचल प्रदेश के नए राज्य की अंतरिम विधान सभा बनाने का प्रस्ताव है, इसलिए यह प्रस्ताव है कि अरुणाचल प्रदेश के नए राज्य की विधान सभा में कम से कम तीस सदस्य होंगे।
2. उपरोक्त प्रस्तावों को प्रभावी बनाने के लिए संविधान में विशेष प्रावधान करना आवश्यक है। तदनुसार, यह विधेयक उपरोक्त मामलों के लिए संविधान में संशोधन करना चाहता है। अनुच्छेद 2 से संबंधित नए राज्य की स्थापना के लिए एक अलग विधेयक भी प्रस्तुत किया जा रहा है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के सैंतीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नानुसार अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (पचपनवाँ संशोधन) अधिनियम, 1986 कहा जा सकता है।
(2) यह ऐसी तिथि_673 से लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
नए अनुच्छेद 371H का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 371जी के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
371H. अरुणाचल प्रदेश राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान।- इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,-
(क) अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल को राज्य में कानून और व्यवस्था के संबंध में विशेष उत्तरदायित्व होगा और इस संबंध में अपने कार्यों के निर्वहन में राज्यपाल मंत्रिपरिषद से परामर्श करने के बाद, की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में अपने व्यक्तिगत विवेक का प्रयोग करेंगे।
बशर्ते कि यदि कोई प्रश्न उठता है कि कोई मामला ऐसा मामला है या नहीं जिसके संबंध में राज्यपाल को इस खंड के अधीन अपने व्यक्तिगत विवेक के प्रयोग में कार्य करना आवश्यक है, तो राज्यपाल का अपने विवेक से लिया गया निर्णय अंतिम होगा, और राज्यपाल द्वारा किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर इस आधार पर प्रश्न नहीं उठाया जाएगा कि उसे अपने व्यक्तिगत विवेक के प्रयोग में कार्य करना चाहिए था या नहीं।
इसके अलावा, यदि राष्ट्रपति राज्यपाल से रिपोर्ट प्राप्त होने पर या अन्यथा संतुष्ट हो जाते हैं कि अरुणाचल प्रदेश राज्य में कानून और व्यवस्था के संबंध में राज्यपाल के लिए विशेष उत्तरदायित्व रखना अब आवश्यक नहीं है, तो वे आदेश द्वारा यह निर्देश दे सकते हैं कि राज्यपाल उस उत्तरदायित्व से उस तिथि से मुक्त हो जाएंगे जो आदेश में निर्दिष्ट की जा सकती है;
(ख) अरुणाचल प्रदेश राज्य की विधान सभा में कम से कम तीस सदस्य होंगे। हमारे बारे में हमसे संपर्क करें प्रतिक्रिया आगंतुक सारांश सहायता हमसे लिंक करें न्यूज़लेटर किसी मित्र को बताएं वेबसाइट नीति साइटमैप
