संविधान (53वाँ संशोधन) अधिनियम, 1986
अवलोकन
लेख सम्मिलित किए गए
- 371जी
30 जून, 1986 को भारत सरकार और मिजोरम सरकार ने मिजो नेशनल फ्रंट के साथ मिजोरम पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अन्य बातों के अलावा, ज्ञापन में निहित अन्य शर्तों के अधीन मिजोरम को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा प्रदान करने की परिकल्पना की गई है।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (तिरेपनवां संशोधन) विधेयक, 1986 (विधेयक संख्या 88, 1986) के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (तिरेपनवां संशोधन) अधिनियम, 1986 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
30 जून, 1986 को भारत सरकार और मिजोरम सरकार ने मिजो नेशनल फ्रंट के साथ मिजोरम पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अन्य बातों के अलावा, ज्ञापन में निहित अन्य शर्तों के अधीन मिजोरम को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा प्रदान करने की परिकल्पना की गई है। ज्ञापन के अनुच्छेद 4.2 में यह प्रावधान है कि निर्णय को प्रभावी बनाने के लिए "सभी आवश्यक विधायी और प्रशासनिक उपाय किए जाएंगे, जिनमें संविधान संशोधन विधेयकों और उपर्युक्त राज्य का दर्जा प्रदान करने के लिए अन्य कानूनों को अधिनियमित करना शामिल है, जो केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित तिथि से प्रभावी होंगे"।
2. ज्ञापन के अनुच्छेद 4.3 में निम्नलिखित प्रावधान है:- संसद के अधिनियम मिजोरम के नए राज्य पर तब तक लागू नहीं होंगे जब तक कि मिजोरम विधानमंडल द्वारा निम्नलिखित मामलों में ऐसा निर्णय न लिया गया हो: (i) मिजो लोगों की धार्मिक या सामाजिक प्रथाएं; (ii) मिजो प्रथागत कानून और प्रक्रिया; (iii) मिजो प्रथागत कानून के अनुसार निर्णय लेने से संबंधित दीवानी और आपराधिक न्याय प्रशासन; (iv) भूमि का स्वामित्व और हस्तांतरण। हालांकि, उपरोक्त प्रावधान उन केंद्रीय अधिनियमों पर लागू नहीं होगा जो संविधान (संशोधन) अधिनियम के लागू होने की तिथि से ठीक पहले मिजोरम केंद्र शासित प्रदेश में लागू थे।
3. ज्ञापन में यह भी प्रावधान है कि प्रस्तावित नए मिजोरम राज्य की विधान सभा में कम से कम चालीस सदस्य होंगे।
4. चूंकि अनुच्छेद 2 और 3 में निर्दिष्ट मामले प्रस्तावित नए मिजोरम राज्य के लिए विशिष्ट हैं, इसलिए उनसे संबंधित प्रावधान संविधान में ही किए जाने चाहिए। तदनुसार, यह विधेयक उपरोक्त मामलों के लिए संविधान में संशोधन करना चाहता है। अनुच्छेद 2 से संबंधित नए राज्य की स्थापना के लिए एक अलग विधेयक भी प्रस्तुत किया जा रहा है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के सैंतीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नानुसार अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (तिरेपनवां संशोधन) अधिनियम, 1986 कहा जा सकता है।
(2) यह ऐसी तिथि_672 से लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
नए अनुच्छेद 371G का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 371एफ के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
371 जी. मिजोरम राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान।-इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,-
(क) संसद का कोई अधिनियम नहीं-
(i) मिज़ो लोगों की धार्मिक या सामाजिक प्रथाएँ,
(ii) मिज़ो प्रथागत कानून और प्रक्रिया,
(iii) मिज़ो प्रथागत कानून के अनुसार लिए गए निर्णयों सहित नागरिक और आपराधिक न्याय का प्रशासन,
(iv) भूमि का स्वामित्व और हस्तांतरण, मिजोरम राज्य पर लागू होगा, जब तक कि मिजोरम राज्य की विधान सभा किसी प्रस्ताव द्वारा ऐसा निर्णय न ले ले:
बशर्ते कि इस खंड में कोई भी बात संविधान (तिरेपनवां संशोधन) अधिनियम, 1986 के प्रारंभ होने से ठीक पहले मिजोरम केंद्र शासित प्रदेश में लागू किसी भी केंद्रीय अधिनियम पर लागू नहीं होगी;
(ख) मिजोरम राज्य की विधान सभा में कम से कम चालीस सदस्य होंगे।
