संविधान (48वाँ संशोधन) अधिनियम, 1984
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 356
संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति द्वारा 6 अक्टूबर, 1983 को पंजाब राज्य के संबंध में जारी की गई उद्घोषणा एक वर्ष से अधिक समय तक लागू नहीं रह सकती, जब तक कि संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (5) में उल्लिखित विशेष शर्तें पूरी न हो जाएं।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (पचासवां संशोधन) विधेयक, 1984 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (अड़तालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1984 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति द्वारा 6 अक्टूबर, 1983 को पंजाब राज्य के संबंध में जारी की गई उद्घोषणा एक वर्ष से अधिक समय तक लागू नहीं रह सकती, जब तक कि संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (5) में उल्लिखित विशेष शर्तें पूरी न हों। यद्यपि विधान सभा निलंबित अवस्था में है और एक लोकप्रिय सरकार का गठन किया जा सकता है, राज्य की मौजूदा स्थिति को देखते हुए, 5 अक्टूबर, 1984 के बाद उद्घोषणा को लागू रखना आवश्यक हो सकता है। संसद के दोनों सदनों द्वारा 5 अक्टूबर, 1984 के बाद उद्घोषणा को लागू रखने के प्रस्ताव को पारित करने में सुविधा प्रदान करने के लिए, संविधान के अनुच्छेद 356 में संशोधन करना आवश्यक है। अतः अनुच्छेद 356 के खंड (5) में संशोधन प्रस्तावित है ताकि उक्त उद्घोषणा को जारी होने की तिथि से दो वर्ष की अवधि तक लागू रखने के प्रयोजनों के लिए उसमें उल्लिखित शर्तें लागू न हों।
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम।
भारत गणराज्य के पैंतीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (अड़तालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1984 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 356 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (5) में अंत में निम्नलिखित परंतुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
बशर्ते कि पंजाब राज्य के संबंध में 6 अक्टूबर, 1983 को खंड (1) के तहत जारी की गई उद्घोषणा के मामले में, इस खंड में "एक वर्ष की समाप्ति के बाद की कोई अवधि" का संदर्भ "दो वर्ष की समाप्ति के बाद की कोई अवधि" के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
