संविधान (47वाँ संशोधन) अधिनियम, 1984
अवलोकन
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- नौवीं अनुसूची
संविधान का अनुच्छेद 31B नौवीं अनुसूची में शामिल कानूनों को किसी भी मौलिक अधिकार के उल्लंघन के दावे से प्रतिरक्षा प्रदान करता है। यह प्रतिरक्षा नौवीं अनुसूची में शामिल होने के बाद इन कानूनों में किए गए किसी भी संशोधन पर लागू नहीं होती है।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (अड़तालीसवाँ संशोधन) विधेयक, 1983 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (सैंतालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1984 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान का अनुच्छेद 31B नौवीं अनुसूची में शामिल कानूनों को किसी भी मौलिक अधिकार के उल्लंघन के दावे से प्रतिरक्षा प्रदान करता है। यह प्रतिरक्षा नौवीं अनुसूची में शामिल होने के बाद इन कानूनों में किए गए किसी भी संशोधन पर लागू नहीं होती है।
2. अतीत में, जब भी जनहित में बनाई गई प्रगतिशील विधियाँ मुकदमेबाजी के कारण खतरे में पाई गईं, तो नौवीं अनुसूची का सहारा लिया गया। भूमि सुधार और कृषि भूमि जोत पर सीमा से संबंधित कई राज्य अधिनियम पहले ही नौवीं अनुसूची में शामिल किए जा चुके हैं। छठी पंचवर्षीय योजना (1980-85) में यह आश्वासन दिया गया है कि "संविधान की नौवीं अनुसूची में अभी तक शामिल नहीं किए गए भूमि सुधार अधिनियमों को संसद के समक्ष तत्काल शामिल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी" और यह भी कि "भविष्य के अधिनियमों के मामले में भी यही प्रक्रिया बिना किसी देरी के अपनाई जाएगी ताकि इन कानूनों को न्यायालयों में चुनौती से बचाया जा सके"। असम, बिहार, हरियाणा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की राज्य सरकारों और गोवा, दमन और दीव के केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन ने भूमि सुधार से संबंधित अपने कुछ अधिनियमों को नौवीं अनुसूची में शामिल करने का सुझाव दिया है। शामिल करने के लिए सुझाए गए कुछ अधिनियम नौवीं अनुसूची में पहले से शामिल अधिनियमों में संशोधन के रूप में हैं। जिन विभिन्न अधिनियमों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है, उनकी जांच की गई है और यह प्रस्ताव है कि नौवीं अनुसूची में ऐसे अधिनियमों को शामिल किया जाए जिन्हें या तो चुनौती दी गई है या चुनौती दिए जाने की संभावना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन अधिनियमों के कार्यान्वयन पर मुकदमेबाजी का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
3. यह विधेयक उपरोक्त उद्देश्य की प्राप्ति का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के पैंतीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (सैंतालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1984 कहा जा सकता है।
नौवीं अनुसूची का संशोधन
संविधान की नौवीं अनुसूची में, प्रविष्टि 188 के बाद और व्याख्या से पहले, निम्नलिखित प्रविष्टियाँ जोड़ी जाएंगी, अर्थात्:-
189. असम (अस्थायी रूप से बसे क्षेत्र) किरायेदारी अधिनियम, 1971 (असम अधिनियम XXIII, 1971)।
190. असम (अस्थायी रूप से बसे क्षेत्र) किरायेदारी (संशोधन) अधिनियम, 1974 (असम अधिनियम XVIII, 1974)।
191. बिहार भूमि सुधार (अधिकतम क्षेत्रफल निर्धारण एवं अधिशेष भूमि अधिग्रहण) (संशोधन) (संशोधन) अधिनियम, 1974 (बिहार अधिनियम 13 ऑफ 1975)।
192. बिहार भूमि सुधार (अधिकतम क्षेत्रफल निर्धारण एवं अधिशेष भूमि अधिग्रहण) (संशोधन) अधिनियम, 1976 (बिहार अधिनियम 22, 1976)।
193. बिहार भूमि सुधार (अधिकतम क्षेत्रफल निर्धारण एवं अधिशेष भूमि अधिग्रहण) (संशोधन) अधिनियम, 1978 (बिहार अधिनियम VII, 1978)।
194. भूमि अधिग्रहण (बिहार संशोधन) अधिनियम, 1979 (बिहार अधिनियम 2 ऑफ 1980)।
195. हरियाणा भूमि जोत पर अधिकतम सीमा (संशोधन) अधिनियम, 1977 (हरियाणा अधिनियम 14 ऑफ 1977)।
196. तमिलनाडु भूमि सुधार (भूमि पर अधिकतम सीमा निर्धारण) संशोधन अधिनियम, 1978 (तमिलनाडु अधिनियम 25, 1978)।
197. तमिलनाडु भूमि सुधार (भूमि पर अधिनियम सीमा निर्धारण) संशोधन अधिनियम, 1979 (तमिलनाडु 11 ऑफ 1979)।
198. उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन कानून (संशोधन) अधिनियम, 1978 (उत्तर प्रदेश अधिनियम 15 ऑफ 1978)।
199. पश्चिम बंगाल परासन्वित भूमि की बहाली (संशोधन) अधिनियम, 1978 (पश्चिम बंगाल अधिनियम XXIV, 1978)।
200. पश्चिम बंगाल परासन्वित भूमि की बहाली (संशोधन) अधिनियम, 1980 (पश्चिम बंगाल अधिनियम एलवीआई, 1980)।
201. गोवा, दमन और दीव कृषि किरायेदारी अधिनियम, 1964 (गोवा, दमन और दीव अधिनियम 7 ऑफ 1964)।
202. गोवा, दमन और दीव कृषि किरायेदारी (पांचवां संशोधन) अधिनियम, 1976 (गोवा, दमन और दीव अधिनियम 17, 1976)।"
