संविधान (49वाँ संशोधन) अधिनियम, 1984
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 244
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- पांचवीं अनुसूची
- छठी अनुसूची
त्रिपुरा विधानसभा ने 19 मार्च, 1982 और फिर 11 फरवरी, 1983 को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें भारत सरकार से त्रिपुरा राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधानों को लागू करने का आग्रह किया गया।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (इक्यावनवाँ संशोधन) विधेयक, 1984 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (उनतालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1984 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
त्रिपुरा विधानसभा ने 19 मार्च, 1982 और फिर 11 फरवरी, 1983 को प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार से आग्रह किया कि वह संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधानों को त्रिपुरा राज्य के आदिवासी क्षेत्रों पर लागू करे। अतः त्रिपुरा सरकार ने इस उद्देश्य के लिए संविधान में संशोधन की सिफारिश की। यद्यपि त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद अधिनियम, 1979 के अंतर्गत राज्य में एक स्वायत्त जिला परिषद कार्यरत थी, फिर भी आदिवासी आबादी की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए इसे संवैधानिक मान्यता देना आवश्यक समझा गया। परिषद से आदिवासी क्षेत्रों के तीव्र विकास और आदिवासियों द्वारा स्वशासन सुनिश्चित करने की अपेक्षा की जाती है।
2. यह विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के पैंतीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (उनतालीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1984 कहा जा सकता है।
(2) यह ऐसी तिथि_669 से लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
अनुच्छेद 244 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 244 में खंड (1) और (2) में, "और मेघालय" शब्दों के स्थान पर "मेघालय और त्रिपुरा" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
पाँचवीं अनुसूची का संशोधन
संविधान की पांचवीं अनुसूची के अनुच्छेद 1 में, "और मेघालय" शब्दों के स्थान पर "मेघालय और त्रिपुरा" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
छठी अनुसूची का संशोधन
संविधान की छठी अनुसूची में,-
(क) शीर्षक में, "और मेघालय" शब्दों के स्थान पर "मेघालय और त्रिपुरा" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ख) अनुच्छेद 1 के उप-अनुच्छेद (1) में, शब्द और अंक "भाग 1 और 2" के स्थान पर, शब्द, अंक और अक्षर "भाग 1, 2 और 31" प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(ग) अनुच्छेद 12ए के बाद निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
12एए. त्रिपुरा राज्य के स्वायत्त जिलों और स्वायत्त क्षेत्रों पर संसद और त्रिपुरा राज्य के विधानमंडल के अधिनियमों का अनुप्रयोग।-इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,-
(क) यदि त्रिपुरा राज्य में जिला या क्षेत्रीय परिषद द्वारा इस अनुसूची के अनुच्छेद 3 के उप-अनुच्छेद (1) में निर्दिष्ट किसी विषय के संबंध में बनाए गए किसी कानून का कोई प्रावधान, या यदि उस राज्य में जिला परिषद या क्षेत्रीय परिषद द्वारा इस अनुसूची के अनुच्छेद 8 या अनुच्छेद 10 के अधीन बनाए गए किसी विनियम का कोई प्रावधान, त्रिपुरा राज्य के विधानमंडल द्वारा उस विषय के संबंध में बनाए गए किसी कानून के किसी प्रावधान के विपरीत है, तो जिला परिषद या क्षेत्रीय परिषद द्वारा बनाया गया कानून या विनियम, चाहे वह त्रिपुरा राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानून से पहले या बाद में बनाया गया हो, विपरीतता की सीमा तक शून्य होगा और त्रिपुरा राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून प्रभावी होगा;
(ख) राष्ट्रपति संसद के किसी अधिनियम के संबंध में अधिसूचना द्वारा यह निर्देश दे सकते हैं कि वह अधिनियम त्रिपुरा राज्य के किसी स्वायत्त जिले या स्वायत्त क्षेत्र पर लागू नहीं होगा, या ऐसे जिले या क्षेत्र या उसके किसी भाग पर ऐसे अपवादों या संशोधनों के अधीन लागू होगा जैसा कि वे अधिसूचना में निर्दिष्ट करें और ऐसा कोई भी निर्देश पूर्वव्यापी प्रभाव से दिया जा सकता है।
(घ) अनुच्छेद 17 में, "या मेघालय" शब्दों के बाद, दोनों स्थानों पर जहाँ वे आते हैं, "या त्रिपुरा" शब्द जोड़े जाएँगे;
(ई) अनुच्छेद 20 में,-
(i) उप-अनुच्छेद (1) में,-
(ए) शब्दों और अंकों "भाग I, II" के बाद, अंक और अक्षर ", IIA" सम्मिलित किए जाएंगे;
(ख) "मेघालय राज्य" शब्दों के बाद, "त्रिपुरा राज्य" शब्द जोड़े जाएंगे;
(ii) उप-अनुच्छेद (2) में, "नीचे दी गई तालिका में कोई संदर्भ" शब्दों के स्थान पर, "नीचे दी गई तालिका के भाग I, भाग II या भाग III में कोई संदर्भ" शब्द और अंक प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(iii) उप-अनुच्छेद (2) के बाद, निम्नलिखित उप-अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
(3) नीचे दी गई तालिका के भाग IIA में "त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र जिला" के संदर्भ को त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद अधिनियम, 1979 की प्रथम अनुसूची में निर्दिष्ट जनजातीय क्षेत्रों वाले क्षेत्र के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा।
(f) तालिका में, भाग II और उससे संबंधित प्रविष्टियों के बाद, निम्नलिखित भाग जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
भाग III त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र जिला।
