संविधान (41वाँ संशोधन) अधिनियम, 1976
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 316
संविधान के अनुच्छेद 316(2) में यह प्रावधान है कि राज्य लोक सेवा आयोग या संयुक्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्य 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होंगे या सेवा में प्रवेश करने की तिथि से छह वर्ष की अवधि के लिए पद पर बने रहेंगे, जो भी पहले हो। संविधान के लागू होने के समय यही स्थिति थी।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (तैंतालीसवां संशोधन) विधेयक, 1976 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (इकतालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 316(2) में यह प्रावधान है कि राज्य लोक सेवा आयोग या संयुक्त आयोग के अध्यक्ष और सदस्य 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होंगे या सेवा में शामिल होने की तिथि से छह वर्ष की अवधि के लिए पद पर बने रहेंगे, जो भी पहले हो। संविधान के लागू होने के समय यही स्थिति थी। बाद में, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई, जबकि राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों की सेवानिवृत्ति आयु अपरिवर्तित रही।
इसी अनुच्छेद में यह प्रावधान है कि प्रत्येक लोक सेवा आयोग के आधे सदस्य भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के कर्मचारी होंगे। सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु मूलतः 55 वर्ष थी, जिसे बाद में अखिल भारतीय सेवाओं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों और विभिन्न राज्यों के सरकारी कर्मचारियों के लिए बढ़ाकर 58 वर्ष कर दिया गया। अतः आयोग की सदस्यता उनके लिए आकर्षक नहीं है, क्योंकि उन्हें आयोग में केवल दो वर्ष ही सेवा करने का अवसर मिलेगा, जो आयोग के कुशल संचालन की दृष्टि से वांछनीय नहीं है।
विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों जैसे शिक्षाविद राज्य लोक सेवा आयोगों में नियुक्ति के पात्र होते हैं। विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति आयु हाल ही में बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी गई है। यदि सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष ही रहती है, तो इन शिक्षाविदों के लिए लोक सेवा आयोग में सेवा करना आकर्षक नहीं होगा। राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष/सदस्यों को सेवानिवृत्ति के बाद भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन सेवा करने की अनुमति नहीं है। इसलिए, जब तक सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 62 वर्ष नहीं कर दी जाती, तब तक कोई भी प्रतिष्ठित शिक्षाविद आयोग में नियुक्ति स्वीकार करने के लिए उत्सुक नहीं होगा।
राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों और सदस्यों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 62 वर्ष करने का प्रस्ताव है। विधेयक इसी प्रस्ताव को लागू करने का प्रयास करता है।
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम।
भारत गणराज्य के सत्ताईसवें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित किया जाता है कि:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (इकतालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 316 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 316 में खंड (2) में, "साठ वर्ष" शब्दों के स्थान पर "बासठ वर्ष" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
