संविधान (39वाँ संशोधन) अधिनियम, 1975
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 329
लेख सम्मिलित किए गए
- 329ए
लेख प्रतिस्थापित
- 71
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- नौवीं अनुसूची
संविधान के अनुच्छेद 71 में यह प्रावधान है कि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से उत्पन्न विवादों का निपटारा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किया जाएगा। इसी अनुच्छेद में यह भी प्रावधान है कि उनके चुनाव से संबंधित मामलों को संसदीय कानून द्वारा विनियमित किया जाएगा।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (चालीसवाँ संशोधन) विधेयक, 1975 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (उनतीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1975 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 71 में यह प्रावधान है कि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से उत्पन्न विवादों का निपटारा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किया जाएगा। इसी अनुच्छेद में यह भी प्रावधान है कि उनके चुनाव से संबंधित मामलों का विनियमन संसदीय कानून द्वारा किया जाएगा। प्रधानमंत्री और अध्यक्ष के संबंध में, उनके चुनाव से संबंधित मामलों का विनियमन लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों द्वारा किया जाता है। इस अधिनियम के अंतर्गत, उच्च न्यायालय को उनमें से किसी के भी विरुद्ध प्रस्तुत चुनाव याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार है।
2. राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अध्यक्ष उच्च पदों पर आसीन हैं। राष्ट्रपति अपने कार्यकाल के दौरान अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए किए गए किसी भी कार्य के लिए न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं। इसलिए, उनके चुनाव से संबंधित मामलों को न्यायालय के समक्ष नहीं लाया जाना चाहिए, बल्कि न्यायालय के अलावा किसी अन्य मंच को सौंपा जाना चाहिए। यही तर्क उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अध्यक्ष के पदों पर आसीन व्यक्तियों पर भी समान रूप से लागू होता है। तदनुसार, यह प्रस्ताव किया जाता है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित विवादों का निपटारा संसदीय कानून द्वारा निर्धारित मंच द्वारा किया जाएगा। संसद के किसी भी सदन या, जैसा भी मामला हो, लोकसभा में प्रधानमंत्री या अध्यक्ष के पद पर आसीन व्यक्ति के चुनाव के मामले में भी इसी प्रकार का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, ऐसे चुनाव के संबंध में मौजूदा कानून के तहत लंबित कार्यवाही को शून्य और अमान्य घोषित करने का भी प्रस्ताव है। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि उपर्युक्त उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों से संबंधित चुनाव मामलों की सुनवाई के लिए एक नया मंच बनाने वाले संसदीय कानून को किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जाएगी।
3. अतीत में, जब भी जनहित में बनाई गई प्रगतिशील विधियाँ मुकदमेबाजी के कारण खतरे में पाई गईं, तो नौवीं अनुसूची का सहारा लिया गया। अब एक बार फिर इस उपाय का सहारा लेना आवश्यक हो गया है। 1971 और 1973 के बीच इस्पात उद्योग के हित में इन संसाधनों के संरक्षण हेतु कोकिंग कोयले और कोयला खानों के राष्ट्रीयकरण के लिए कानून बनाए गए थे। इन कानूनों को असंवैधानिक बताते हुए अदालतों में लाया गया है। 1974 में राष्ट्रीयकृत की गई बीमार कपड़ा कंपनियों का भी यही हाल है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली वस्तुओं की तस्करी और विदेशी मुद्रा के गबन को रोकने के लिए संसद ने कानून बनाए, जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में चुनौती दी गई है। इन और अन्य महत्वपूर्ण एवं विशेष कानूनों को, जिन्हें अनुच्छेद 31B के अंतर्गत संवैधानिक संरक्षण प्राप्त होना आवश्यक समझा जाता है, नौवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव है। भूमि सुधार और कृषि भूमि जोत पर सीमा से संबंधित कुछ राज्य कानूनों को पहले ही नौवीं अनुसूची में शामिल किया जा चुका है। इन कानूनों में किए गए कुछ संशोधनों के लिए अनुच्छेद 31बी के प्रावधानों के संरक्षण की भी आवश्यकता होती है।
4. यह विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के छब्बीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान का उनतीसवाँ संशोधन अधिनियम, 1975 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 71 के स्थान पर नए अनुच्छेद का प्रतिस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 71 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
71. राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित या उससे जुड़े मामले।
(1) इस संविधान के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, संसद राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित किसी भी मामले को, जिसमें ऐसे चुनाव पर प्रश्न उठाने के आधार भी शामिल हैं, विधि द्वारा विनियमित कर सकती है:
बशर्ते कि किसी व्यक्ति के राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के रूप में चुने जाने पर, उसे चुनने वाले निर्वाचक मंडल के सदस्यों में किसी भी कारण से कोई रिक्ति होने के आधार पर प्रश्न नहीं उठाया जाएगा।
(2) राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से उत्पन्न होने वाले या उससे संबंधित सभी संदेह और विवादों की जांच और निर्णय ऐसे प्राधिकरण या निकाय द्वारा और ऐसे तरीके से किया जाएगा जैसा कि खंड (1) में निर्दिष्ट किसी कानून द्वारा या उसके अधीन प्रावधान किया गया हो।
(3) खंड (1) में निर्दिष्ट किसी भी कानून की वैधता और ऐसे कानून के तहत किसी प्राधिकरण या निकाय के निर्णय पर किसी भी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जाएगा।
(4) यदि किसी व्यक्ति का राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के रूप में चुनाव खंड (1) में निर्दिष्ट किसी कानून के तहत अमान्य घोषित कर दिया जाता है, तो राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के पद की शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग एवं निष्पादन में उसके द्वारा ऐसे घोषणा की तिथि को या उससे पूर्व किए गए कार्य उस घोषणा के कारण अमान्य नहीं होंगे।
अनुच्छेद 329 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 329 में, "इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, अनुच्छेद 329ए के प्रावधानों के अधीन रहते हुए" शब्दों के स्थान पर, "इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, लेकिन अनुच्छेद 329ए के प्रावधानों के अधीन रहते हुए" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
नए अनुच्छेद 329A का अंतःस्थापन
संविधान के भाग पंद्रह में अनुच्छेद 329 के बाद निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
329ए. प्रधानमंत्री और अध्यक्ष के मामले में संसद के चुनावों के संबंध में विशेष प्रावधान।
(1) भाग V के अध्याय II के प्रावधानों के अधीन रहते हुए [अनुच्छेद 102 के खंड (1) के उपखंड (ई) को छोड़कर], कोई चुनाव-
(क) संसद के किसी भी सदन में ऐसे व्यक्ति को, जो ऐसे चुनाव के समय प्रधानमंत्री के पद पर हो या ऐसे चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया हो;
(ख) लोक सभा में ऐसे चुनाव के समय सदन के अध्यक्ष पद पर आसीन व्यक्ति या ऐसे चुनाव के बाद सदन के अध्यक्ष के रूप में चुने गए व्यक्ति के संबंध में प्रश्न उठाया जाएगा, सिवाय ऐसे प्राधिकारी [अनुच्छेद 329 के खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी प्राधिकारी को छोड़कर] या निकाय के समक्ष और ऐसे तरीके से जैसा संसद द्वारा बनाए गए किसी कानून द्वारा या उसके तहत निर्धारित किया गया हो, और ऐसा कोई कानून ऐसे चुनाव से संबंधित संदेह और विवादों से संबंधित अन्य सभी मामलों के लिए प्रावधान कर सकता है, जिसमें वे आधार भी शामिल हैं जिन पर ऐसे चुनाव पर प्रश्न उठाया जा सकता है।
(2) खंड (1) में निर्दिष्ट किसी भी कानून की वैधता और ऐसे कानून के तहत किसी प्राधिकरण या निकाय के निर्णय पर किसी भी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जाएगा।
(3) जहाँ किसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है या, जैसा भी मामला हो, लोकसभा के अध्यक्ष पद के लिए चुना जाता है, जबकि संसद के किसी सदन या, जैसा भी मामला हो, लोकसभा के लिए उसके चुनाव के संबंध में अनुच्छेद 329 के खंड (ख) में निर्दिष्ट चुनाव याचिका लंबित है, तो ऐसे व्यक्ति के प्रधानमंत्री नियुक्त होने या, जैसा भी मामला हो, लोकसभा के अध्यक्ष पद के लिए चुने जाने पर ऐसी चुनाव याचिका समाप्त हो जाएगी, परन्तु ऐसे चुनाव पर खंड (1) में निर्दिष्ट किसी कानून के तहत प्रश्न उठाया जा सकता है।
(4) संविधान (उनतीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1975 के प्रारंभ होने से पूर्व संसद द्वारा निर्मित कोई भी कानून, जहाँ तक वह चुनाव याचिकाओं और उससे संबंधित मामलों से संबंधित है, संसद के किसी भी सदन में खंड (1) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति के चुनाव पर लागू नहीं होगा और न ही कभी लागू माना जाएगा, और ऐसा चुनाव किसी भी ऐसे आधार पर शून्य नहीं माना जाएगा या कभी शून्य नहीं हुआ होगा जिस पर ऐसे चुनाव को शून्य घोषित किया जा सकता था या ऐसे प्रारंभ होने से पहले किसी ऐसे कानून के तहत शून्य घोषित किया गया था, और ऐसे प्रारंभ होने से पहले किसी भी न्यायालय द्वारा ऐसे चुनाव को शून्य घोषित करने वाले किसी भी आदेश के बावजूद, ऐसा चुनाव सभी मामलों में वैध बना रहेगा और ऐसा कोई भी आदेश और ऐसा कोई भी निर्णय जिस पर ऐसा आदेश आधारित है, शून्य और अप्रभावी होगा और हमेशा के लिए शून्य माना जाएगा।
(5) किसी न्यायालय के ऐसे किसी आदेश के विरुद्ध कोई अपील या क्रॉस अपील, जैसा कि खंड (4) में निर्दिष्ट है, संविधान (उनतीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1975 के प्रारंभ होने से ठीक पहले सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित हो, तो उसका निपटारा खंड (4) के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
(6) इस अनुच्छेद के प्रावधान इस संविधान में निहित किसी भी बात के बावजूद प्रभावी होंगे।
नौवीं अनुसूची का संशोधन
संविधान की नौवीं अनुसूची में, प्रविष्टि 86 के बाद और व्याख्या से पहले, निम्नलिखित प्रविष्टियाँ जोड़ी जाएंगी, अर्थात्:-
87. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (केंद्रीय अधिनियम 43 ऑफ 1951), लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) अधिनियम, 1974 (केंद्रीय अधिनियम 58 ऑफ 1974) और चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम, 1975 (केंद्रीय अधिनियम 40 ऑफ 1975)।
88. उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1951 (केंद्रीय अधिनियम 65, 1951)।
89. अचल संपत्ति अधिग्रहण एवं अधिग्रहण अधिनियम, 1952 (केंद्रीय अधिनियम 30 ऑफ 1952)।
90. खान एवं खनिज (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 1957 (केंद्रीय अधिनियम 67, 1957)।
91. एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम, 1969 (केंद्रीय अधिनियम 54, 1969)।
92. आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम, 1971 (केंद्रीय अधिनियम 26, 1971)।
93. कोकिंग कोल माइंस (आपातकालीन प्रावधान) अधिनियम, 1971 (केंद्रीय अधिनियम 64 ऑफ 1971)।
94. कोकिंग कोल माइंस (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (केंद्रीय अधिनियम 36 ऑफ 1972)।
95. सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (केंद्रीय अधिनियम 57, 1972)।
96. भारतीय तांबा निगम (उपक्रम अधिग्रहण) अधिनियम, 1972 (केंद्रीय अधिनियम 58 ऑफ 1972)।
97. बीमार वस्त्र उपक्रम (प्रबंधन का अधिग्रहण) अधिनियम, 1972 (केंद्रीय अधिनियम 72, 1972)।
98. कोयला खान (प्रबंधन का अधिग्रहण) अधिनियम, 1973 (केंद्रीय अधिनियम 15 ऑफ 1973)।
99. कोयला खान (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1973 (केंद्रीय अधिनियम 26, 1973)।
100. विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (केंद्रीय अधिनियम 46, 1973)।
101. एल्कोक ऐशडाउन कंपनी लिमिटेड (उपक्रमों का अधिग्रहण) अधिनियम, 1973 (केंद्रीय अधिनियम 56 ऑफ 1973)।
102. कोयला खान (संरक्षण एवं विकास) अधिनियम, 1974 (केंद्रीय अधिनियम 28, 1974)।
103. अतिरिक्त पारिश्रमिक (अनिवार्य जमा) अधिनियम, 1974 (केंद्रीय अधिनियम 37 ऑफ 1974)।
104. विदेशी मुद्रा संरक्षण एवं तस्करी निवारण अधिनियम, 1974 (केंद्रीय अधिनियम 52 ऑफ 1974)।
105. बीमार वस्त्र उपक्रम (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1974 (केंद्रीय अधिनियम 57 ऑफ 1974)।
106. महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत पर अधिकतम सीमा) (संशोधन) अधिनियम, 1964 (महाराष्ट्र अधिनियम XVI, 1965)।
107. महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत पर अधिकतम सीमा) (संशोधन) अधिनियम, 1965 (महाराष्ट्र अधिनियम XXXII, 1965)।
108. महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत पर अधिकतम सीमा) (संशोधन) अधिनियम, 1968 (महाराष्ट्र अधिनियम XVI, 1968)।
109. महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत पर अधिकतम सीमा) (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 1968 (महाराष्ट्र अधिनियम XXXIII, 1968)।
110. महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत पर अधिकतम सीमा) (संशोधन) अधिनियम, 1969 (महाराष्ट्र अधिनियम XXXVII ऑफ 1969)।
111. महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत पर अधिकतम सीमा) (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 1969 (महाराष्ट्र अधिनियम XXXVIII, 1969)।
112. महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत पर अधिकतम सीमा) (संशोधन) अधिनियम, 1970 (महाराष्ट्र अधिनियम XXVII, 1970)।
113. महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत पर अधिकतम सीमा) (संशोधन) अधिनियम, 1972 (महाराष्ट्र अधिनियम XIII, 1972)।
114. महाराष्ट्र कृषि भूमि (जोत पर अधिकतम सीमा) (संशोधन) अधिनियम, 1973 (महाराष्ट्र अधिनियम एल ऑफ 1973)।
115. उड़ीसा भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1965 (उड़ीसा अधिनियम 13 ऑफ 1965)।
116. उड़ीसा भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1966 (उड़ीसा अधिनियम 8 ऑफ 1967)।
117. उड़ीसा भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1967 (उड़ीसा अधिनियम 13 ऑफ 1967)।
118. उड़ीसा भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1969 (उड़ीसा अधिनियम 13 ऑफ 1969)।
119. उड़ीसा भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1970 (उड़ीसा अधिनियम 18 ऑफ 1970)।
120. उत्तर प्रदेश भूमि जोत पर अधिकतम सीमा निर्धारण (संशोधन) अधिनियम, 1972 (उत्तर प्रदेश अधिनियम 18 ऑफ 1973)।
121. उत्तर प्रदेश भूमि जोत पर अधिकतम सीमा निर्धारण (संशोधन) अधिनियम, 1974 (उत्तर प्रदेश अधिनियम 2 ऑफ 1975)।
122. त्रिपुरा भूमि राजस्व और भूमि सुधार अधिनियम, 1975 (त्रिपुरा अधिनियम 3 ऑफ 1975)।
123. दादरा और नगर हवेली भूमि सुधार विनियमन, 1971 (3 ऑफ 1971)।
124. दादरा और नगर हवेली भूमि सुधार (संशोधन) विनियमन, 1973 (1973 का 5)।"
