संविधान (36वाँ संशोधन) अधिनियम, 1975
अवलोकन
लेख सम्मिलित किए गए
- 371एफ
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- पहली अनुसूची
- चौथी अनुसूची
सिक्किम विधानसभा ने 10 अप्रैल, 1975 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें अन्य बातों के अलावा, चोग्याल की लगातार हानिकारक गतिविधियों का उल्लेख किया गया था, जिनका उद्देश्य 8 मई, 1973 के समझौते और सिक्किम सरकार अधिनियम, 1974 के प्रावधानों के तहत स्थापित जिम्मेदार लोकतांत्रिक सरकार को कमजोर करना था।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (अड़तीसवां संशोधन) विधेयक, 1975 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (छत्तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1975 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
सिक्किम विधानसभा ने 10 अप्रैल, 1975 को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें अन्य बातों के अलावा, चोग्याल की लगातार हानिकारक गतिविधियों का उल्लेख किया गया था, जिनका उद्देश्य 8 मई, 1973 के समझौते और सिक्किम सरकार अधिनियम, 1974 के प्रावधानों के तहत स्थापित उत्तरदायी लोकतांत्रिक सरकार को कमजोर करना था। प्रस्ताव में कहा गया कि विधानसभा इस बात से संतुष्ट है कि चोग्याल की ये गतिविधियाँ न केवल 8 मई, 1973 के समझौते के उद्देश्यों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि सिक्किम के लोगों की इच्छाओं के भी विरुद्ध हैं और उनके लोकतांत्रिक विकास और भारत के राजनीतिक और आर्थिक जीवन में उनकी भागीदारी में बाधा डालती हैं। तदनुसार, विधानसभा ने पूर्णतया घोषणा और संकल्प लिया कि "चोग्याल संस्था को समाप्त किया जाता है और सिक्किम अब से भारत का एक घटक इकाई होगा, जो एक लोकतांत्रिक और पूर्णतया उत्तरदायी सरकार का कर्ताधार होगा"।
2. विधानसभा ने यह भी संकल्प लिया कि इस प्रस्ताव को सिक्किम की जनता के समक्ष उनकी स्वीकृति के लिए तुरंत प्रस्तुत किया जाए। सिक्किम सरकार द्वारा 14 अप्रैल, 1975 को कराए गए एक विशेष जनमत सर्वेक्षण में लगभग 97,000 मतदाताओं में से 59,637 मत प्रस्ताव के पक्ष में और 1,496 मत इसके विरोध में पड़े।
3. इस चुनाव के परिणाम की सूचना सिक्किम के मुख्यमंत्री द्वारा 15 अप्रैल, 1975 को भारत सरकार को दी गई। मुख्यमंत्री ने मंत्रिपरिषद की ओर से भारत सरकार से तत्काल प्रतिक्रिया देने और उपरोक्त निर्णय को स्वीकार करने का पुरजोर अनुरोध किया, साथ ही विधानसभा के 10 अप्रैल, 1975 के प्रस्ताव में किए गए अनुरोध के अनुसार, निर्णय को यथाशीघ्र लागू करने के लिए आवश्यक और उचित उपाय करने का भी अनुरोध किया।
4. सिक्किम के मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों ने भी 16-17 अप्रैल, 1975 को नई दिल्ली का दौरा किया और भारत सरकार से इस संबंध में तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया।
5. तदनुसार, सिक्किम को संविधान की प्रथम अनुसूची में पूर्ण राज्य के रूप में शामिल करने और राज्य परिषद में सिक्किम को एक सीट और लोकसभा में एक सीट आवंटित करने का प्रस्ताव है। सिक्किम की विशेष परिस्थितियों और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक समझे जाने वाले प्रावधानों को शामिल करते हुए एक नया अनुच्छेद जोड़ने का भी प्रस्ताव है।
6. इस विधेयक का उद्देश्य उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति करना है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के छब्बीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (छत्तीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1975 कहा जा सकता है।
(2) यह अधिनियम दिनांक_668 से लागू माना जाएगा, जिस दिन इस अधिनियम का विधेयक [लोक सभा में संविधान (अड़तीसवाँ संशोधन) विधेयक, 1975 के रूप में प्रस्तुत किया गया], लोक सभा द्वारा पारित होने के बाद, राज्य परिषद द्वारा पारित किया जाता है।
पहली अनुसूची का संशोधन
संविधान की प्रथम अनुसूची में, "I. राज्य" शीर्षक के अंतर्गत, प्रविष्टि 21 के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टि जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
22. सिक्किम: वे क्षेत्र जो संविधान (छत्तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1975 के लागू होने से ठीक पहले सिक्किम में शामिल थे।
नए अनुच्छेद 371F का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 371ई के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
371F. सिक्किम राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान।- इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी,-
(क) सिक्किम राज्य की विधान सभा में कम से कम तीस सदस्य होंगे;
(ख) संविधान (छत्तीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1975 के लागू होने की तिथि से (जिसे इस अनुच्छेद में आगे नियुक्त दिवस कहा गया है)-
(i) सिक्किम में अप्रैल, 1974 में हुए चुनावों के परिणामस्वरूप गठित सिक्किम विधानसभा, जिसमें उक्त चुनावों में बत्तीस सदस्य निर्वाचित हुए (जिन्हें इसके बाद मौजूदा सदस्य कहा जाएगा), को इस संविधान के तहत विधिवत गठित सिक्किम राज्य की विधान सभा माना जाएगा;
(ii) वर्तमान सदस्यों को इस संविधान के अधीन विधिवत निर्वाचित सिक्किम राज्य की विधान सभा के सदस्य माना जाएगा; और
(iii) सिक्किम राज्य की उक्त विधान सभा इस संविधान के अधीन किसी राज्य की विधान सभा की शक्तियों का प्रयोग करेगी तथा उसके कार्यों का निष्पादन करेगी;
(ग) खंड (ख) के अधीन सिक्किम राज्य की विधान सभा मानी जाने वाली विधानसभा के मामले में, अनुच्छेद 172 के खंड (1) में पाँच वर्ष की अवधि के संदर्भों को चार वर्ष की अवधि के संदर्भों के रूप में समझा जाएगा और उक्त चार वर्ष की अवधि नियुक्त दिन से प्रारंभ मानी जाएगी;
(घ) जब तक संसद द्वारा कानून द्वारा अन्य प्रावधान नहीं किए जाते, तब तक लोकसभा में सिक्किम राज्य को एक सीट आवंटित की जाएगी और सिक्किम राज्य एक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र बनाएगा जिसे सिक्किम के लिए संसदीय निर्वाचन क्षेत्र कहा जाएगा;
(ई) नियुक्त तिथि को विद्यमान लोक सभा में सिक्किम राज्य के प्रतिनिधि का चुनाव सिक्किम राज्य की विधान सभा के सदस्यों द्वारा किया जाएगा;
(f) सिक्किम की जनसंख्या के विभिन्न वर्गों के अधिकारों और हितों की रक्षा के उद्देश्य से संसद सिक्किम राज्य की विधान सभा में उन सीटों की संख्या के लिए प्रावधान कर सकती है जिन्हें ऐसे वर्गों से संबंधित उम्मीदवारों द्वारा भरा जा सकता है और उन विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए प्रावधान कर सकती है जिनसे केवल ऐसे वर्गों से संबंधित उम्मीदवार ही सिक्किम राज्य की विधान सभा के चुनाव में खड़े हो सकते हैं;
(जी) सिक्किम के राज्यपाल को शांति और सिक्किम की आबादी के विभिन्न वर्गों की सामाजिक और आर्थिक उन्नति सुनिश्चित करने के लिए एक न्यायसंगत व्यवस्था के लिए विशेष जिम्मेदारी होगी और इस खंड के तहत अपनी विशेष जिम्मेदारी के निर्वहन में, सिक्किम के राज्यपाल, राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले ऐसे निर्देशों के अधीन रहते हुए, अपने विवेक से कार्य करेंगे;
(h) सभी संपत्ति और परिसंपत्तियां (चाहे सिक्किम राज्य के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के भीतर हों या बाहर) जो नियुक्ति दिवस से ठीक पहले सिक्किम सरकार या किसी अन्य प्राधिकरण या सिक्किम सरकार के प्रयोजनों के लिए किसी व्यक्ति में निहित थीं, नियुक्ति दिवस से सिक्किम राज्य सरकार में निहित हो जाएंगी;
(i) सिक्किम राज्य में शामिल क्षेत्रों में नियुक्त दिन से ठीक पहले इस प्रकार कार्यरत उच्च न्यायालय, नियुक्त दिन से सिक्किम राज्य का उच्च न्यायालय माना जाएगा;
(j) सिक्किम राज्य के पूरे क्षेत्र में सभी दीवानी, आपराधिक और राजस्व क्षेत्राधिकार के न्यायालय, सभी प्राधिकरण और सभी अधिकारी, न्यायिक, कार्यकारी और मंत्रिस्तरीय, नियुक्त दिन से इस संविधान के प्रावधानों के अधीन अपने-अपने कार्यों का निर्वाह करना जारी रखेंगे;
(k) सिक्किम राज्य में या उसके किसी भाग में स्थित क्षेत्रों में नियुक्त दिन से ठीक पहले लागू सभी कानून तब तक लागू रहेंगे जब तक कि किसी सक्षम विधानमंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा उनमें संशोधन या निरस्त न कर दिया जाए;
(l) सिक्किम राज्य के प्रशासन के संबंध में खंड (k) में निर्दिष्ट किसी भी कानून के आवेदन को सुगम बनाने के उद्देश्य से और ऐसे किसी भी कानून के प्रावधानों को इस संविधान के प्रावधानों के अनुरूप लाने के उद्देश्य से, राष्ट्रपति, नियुक्त दिन से दो वर्ष के भीतर, आदेश द्वारा, कानून में ऐसे अनुकूलन और संशोधन कर सकते हैं, चाहे निरसन या संशोधन के माध्यम से, जैसे आवश्यक या उपयुक्त हों, और इसके बाद, ऐसा प्रत्येक कानून किए गए अनुकूलन और संशोधनों के अधीन प्रभावी होगा, और ऐसे किसी भी अनुकूलन या संशोधन पर किसी भी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जाएगा;
(m) सिक्किम से संबंधित किसी संधि, समझौते, अनुबंध या अन्य समान दस्तावेज से उत्पन्न किसी विवाद या अन्य मामले के संबंध में न तो सर्वोच्च न्यायालय और न ही किसी अन्य न्यायालय को अधिकार क्षेत्र होगा, जो नियुक्त दिन से पहले किया गया हो या निष्पादित किया गया हो और जिसमें भारत सरकार या उसकी पूर्ववर्ती सरकारों में से कोई एक पक्षकार रही हो, परन्तु इस खंड में कुछ भी अनुच्छेद 143 के प्रावधानों से विचलन करने के रूप में नहीं समझा जाएगा;
(n) राष्ट्रपति सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा, ऐसे प्रतिबंधों या संशोधनों के साथ, जैसा वह उचित समझे, सिक्किम राज्य में किसी ऐसे अधिनियम का विस्तार कर सकता है जो अधिसूचना की तिथि को भारत के किसी राज्य में लागू हो;
(ओ) यदि इस अनुच्छेद के पूर्वगामी प्रावधानों में से किसी को लागू करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो राष्ट्रपति आदेश द्वारा ऐसा कोई कार्य (किसी अन्य अनुच्छेद का अनुकूलन या संशोधन सहित) कर सकता है जो उसे उस कठिनाई को दूर करने के उद्देश्य से आवश्यक प्रतीत हो।
बशर्ते कि ऐसा कोई आदेश निर्धारित दिन से दो वर्ष की समाप्ति के बाद जारी नहीं किया जाएगा;
(p) सिक्किम राज्य या उसमें समाहित क्षेत्रों में या उसके संबंध में, निर्धारित तिथि से प्रारंभ होकर संविधान (छत्तीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1975 को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त होने की तिथि से ठीक पहले समाप्त होने वाली अवधि के दौरान किए गए सभी कार्य और की गई सभी कार्रवाइयाँ, जहाँ तक वे संविधान (छत्तीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा संशोधित इस संविधान के प्रावधानों के अनुरूप हैं, सभी प्रयोजनों के लिए इस संशोधित संविधान के अंतर्गत वैध रूप से किए गए या की गई मानी जाएँगी।
चौथी अनुसूची का संशोधन
संविधान की चौथी अनुसूची में, तालिका में,-
(क) प्रविष्टि 21 के बाद, निम्नलिखित प्रविष्टि जोड़ी जाएगी, अर्थात्:--- "22. सिक्किम 1";
(ख) मौजूदा प्रविष्टियाँ 22 से 25 को क्रमशः प्रविष्टियाँ 23 से 26 के रूप में पुनः क्रमांकित किया जाएगा;
(सी) अंकों "231" के स्थान पर अंक "232" प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
परिणामिक संशोधन
संविधान में निम्नलिखित परिणामी संशोधन किए जाएंगे, अर्थात्:-
(क) अनुच्छेद 2ए को हटा दिया जाएगा;
(ख) अनुच्छेद 80 में खंड (1) में, "दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद 4 के प्रावधानों के अधीन" शब्द और अंक हटा दिए जाएंगे;
(ग) अनुच्छेद 81 में खंड (1) में "और दसवीं अनुसूची का अनुच्छेद 4" शब्द और अंक हटा दिए जाएंगे;
(घ) दसवीं अनुसूची को हटा दिया जाएगा।
