संविधान (33वाँ संशोधन) अधिनियम, 1974
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 101
- 190
संविधान के अनुच्छेद 101 (3) (ख) और 190 (3) (ख) संसद के किसी सदन के सदस्य या राज्य के विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य को अध्यक्ष या अध्यक्ष को संबोधित अपने हाथ से लिखित रूप में अपनी सीट से इस्तीफा देने की अनुमति देते हैं।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (पैंतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 1974 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (तैंतीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1974 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 101 (3) (ख) और 190 (3) (ख) के अनुसार संसद के किसी भी सदन का सदस्य या राज्य विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य अध्यक्ष या चेयरमैन को संबोधित लिखित पत्र द्वारा अपने हस्ताक्षर से अपना पद त्याग सकता है। हाल के दिनों में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां विधान सभा के सदस्यों को सदस्यता से विदा लेने के लिए दबाव बनाने हेतु दंडात्मक उपायों का सहारा लिया गया है। यदि इस पर रोक नहीं लगाई गई तो विधानमंडलों के लिए संविधान के प्रावधानों के अनुसार कार्य करना कठिन हो सकता है। अतः उपरोक्त दोनों अनुच्छेदों में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि अध्यक्ष या चेयरमैन द्वारा इस्तीफे की स्वीकृति अनिवार्य हो और यह प्रावधान किया जाए कि यदि अध्यक्ष या चेयरमैन उचित जांच करने के बाद संतुष्ट हो जाते हैं कि इस्तीफा स्वैच्छिक या वास्तविक नहीं है, तो वे इस्तीफा स्वीकार नहीं करेंगे।
2. यह विधेयक उपरोक्त उद्देश्य की प्राप्ति का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के पच्चीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:---
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (तैंतीसवां संशोधन) अधिनियम, 1974 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 101 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 101 में, खंड (3) में,-
(1) उपखंड (ख) के स्थान पर निम्नलिखित उपखंड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
(ख) अध्यक्ष या स्पीकर को संबोधित अपने हाथ से लिखित रूप में अपना पद त्याग देता है, और उसका त्यागपत्र अध्यक्ष या स्पीकर द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है;
(2) अंत में निम्नलिखित प्रावधान जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
बशर्ते कि उप-खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी भी त्यागपत्र के मामले में, यदि प्राप्त जानकारी या अन्य किसी माध्यम से तथा उचित समझे जाने वाली जांच करने के बाद अध्यक्ष या स्पीकर, जैसा भी मामला हो, संतुष्ट हो जाए कि ऐसा त्यागपत्र स्वैच्छिक या वास्तविक नहीं है, तो वह ऐसे त्यागपत्र को स्वीकार नहीं करेगा।
अनुच्छेद 190 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 190 में, खंड (3) में,-
(1) उपखंड (ख) के स्थान पर निम्नलिखित उपखंड प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
(ख) अध्यक्ष या चेयरमैन को संबोधित अपने हाथ से लिखित रूप में अपना पद त्याग देता है, और उसका त्यागपत्र अध्यक्ष या चेयरमैन द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है;
(2) अंत में निम्नलिखित प्रावधान जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
बशर्ते कि उपखंड (ख) में निर्दिष्ट किसी भी त्यागपत्र के मामले में, यदि प्राप्त जानकारी या अन्य किसी माध्यम से तथा उचित समझे जाने वाली जांच करने के बाद अध्यक्ष या चेयरमैन, जैसा भी मामला हो, संतुष्ट हो जाए कि ऐसा त्यागपत्र स्वैच्छिक या वास्तविक नहीं है, तो वह ऐसे त्यागपत्र को स्वीकार नहीं करेगा।
