संविधान (32वाँ संशोधन) अधिनियम, 1973
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 371
लेख सम्मिलित किए गए
- 371डी
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- सातवीं अनुसूची
जब 1956 में आंध्र प्रदेश राज्य का गठन हुआ, तो तेलंगाना क्षेत्र के विकास के साथ-साथ रोजगार के अवसरों और उस क्षेत्र के निवासियों के लिए शैक्षिक सुविधाओं के संबंध में कुछ सुरक्षा उपायों की परिकल्पना की गई थी।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (तैंतीसवां संशोधन) विधेयक, 1973 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (बत्तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1973 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
जब 1956 में आंध्र प्रदेश राज्य का गठन हुआ, तो तेलंगाना क्षेत्र के विकास, रोजगार के अवसरों और शिक्षा सुविधाओं के संबंध में कुछ सुरक्षा उपाय किए गए थे। संविधान के अनुच्छेद 371 के खंड (1) के प्रावधानों का उद्देश्य इन सुरक्षा उपायों के कुछ पहलुओं को प्रभावी बनाना था। सार्वजनिक रोजगार (निवास संबंधी आवश्यकता) अधिनियम, 1957, अन्य बातों के अलावा, तेलंगाना क्षेत्र के निवासियों के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए अधिनियमित किया गया था। लेकिन 1969 में, सर्वोच्च न्यायालय ने अधिनियम के उस प्रावधान को असंवैधानिक घोषित कर दिया, जहाँ तक यह तेलंगाना क्षेत्र के लिए परिकल्पित सुरक्षा उपायों से संबंधित था। विभिन्न कारणों से, सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन से कभी तेलंगाना क्षेत्र में तो कभी राज्य के अन्य क्षेत्रों में असंतोष उत्पन्न हुआ। समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर उपाय किए गए। हाल ही में आंध्र प्रदेश के कई नेताओं ने असंतोष के कारणों का विश्लेषण करने और आंध्र प्रदेश की जनता के पूर्ण भावनात्मक एकीकरण के उद्देश्य से समस्याओं के स्थायी समाधान खोजने के लिए संयुक्त प्रयास किए। 21 सितंबर, 1973 को उन्होंने कुछ उपाय सुझाए (जिन्हें आमतौर पर छह सूत्री सूत्र के रूप में जाना जाता है) जो राज्य के पिछड़े क्षेत्रों के त्वरित विकास को बढ़ावा देने के लिए एक समान दृष्टिकोण का संकेत देते हैं, ताकि राज्य का समग्र रूप से संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके और शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं में करियर की संभावनाओं के मामले में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को समान अवसर प्रदान किए जा सकें। इस सूत्र को आंध्र प्रदेश में व्यापक समर्थन मिला है और राज्य सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया है।
2. यह विधेयक राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सार्वजनिक रोजगार के मामलों में समान अवसर प्रदान करने और सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित कुछ विवादों और शिकायतों से निपटने के अधिकार क्षेत्र वाले एक प्रशासनिक न्यायाधिकरण के गठन से संबंधित छह सूत्री सूत्र को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संवैधानिक अधिकार प्रदान करने हेतु प्रस्तुत किया गया है। विधेयक संसद को राज्य में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए कानून बनाने का अधिकार भी प्रदान करता है और इसमें आकस्मिक और परिणामी प्रकृति के प्रावधान शामिल हैं, जिनमें अतीत में की गई कुछ नियुक्तियों के वैधीकरण का प्रावधान भी शामिल है। चूंकि छह सूत्री सूत्र संविधान के अनुच्छेद 371 के खंड (1) के तहत गठित क्षेत्रीय समिति को समाप्त करने का प्रावधान करता है, इसलिए विधेयक उस खंड को निरस्त करने का भी प्रावधान करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के चौबीसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नानुसार अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (बत्तीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1973 कहा जा सकता है।
(2) यह ऐसी तिथि_666 से लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
अनुच्छेद 371 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 371 के खंड (1) को हटा दिया जाएगा, और उस अनुच्छेद के हाशिये वाले शीर्षक में "आंध्र प्रदेश" शब्द हटा दिए जाएंगे।
नए अनुच्छेद 371D और 371E का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 371सी के बाद निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़े जाएंगे, अर्थात्:-
371डी. आंध्र प्रदेश राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान।
(1) राष्ट्रपति आंध्र प्रदेश राज्य के संबंध में आदेश द्वारा, राज्य की समग्र आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, राज्य के विभिन्न भागों के लोगों के लिए सार्वजनिक रोजगार और शिक्षा के मामले में समान अवसर और सुविधाएं प्रदान कर सकता है, और राज्य के विभिन्न भागों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए जा सकते हैं।
(2) खंड (1) के अंतर्गत दिया गया आदेश, विशेष रूप से,-
(क) राज्य सरकार को राज्य की सिविल सेवा में किसी वर्ग या वर्गों के पदों को, या राज्य के अधीन किसी वर्ग या वर्गों के सिविल पदों को, राज्य के विभिन्न भागों के लिए विभिन्न स्थानीय कैडरों में संगठित करने और आदेश में निर्दिष्ट सिद्धांतों और प्रक्रिया के अनुसार ऐसे पदों पर आसीन व्यक्तियों को इस प्रकार संगठित स्थानीय कैडरों में आवंटित करने की आवश्यकता हो सकती है;
(ख) राज्य के किसी भाग या भागों को निर्दिष्ट करना जिन्हें स्थानीय क्षेत्र माना जाएगा-
(i) राज्य सरकार के अधीन किसी स्थानीय कैडर (चाहे इस अनुच्छेद के तहत किसी आदेश के अनुसरण में संगठित हो या अन्यथा गठित हो) में पदों पर सीधी भर्ती के लिए;
(ii) राज्य के भीतर किसी स्थानीय प्राधिकरण के अधीन किसी कैडर में पदों पर सीधी भर्ती के लिए; और
(iii) राज्य के भीतर किसी विश्वविद्यालय में या राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन किसी अन्य शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश के प्रयोजनों के लिए;
(ग) वरीयता या आरक्षण किस हद तक, किस तरीके से और किन शर्तों के अधीन दिया जाएगा, यह निर्दिष्ट करना।
(i) उपखंड (ख) में निर्दिष्ट किसी भी कैडर में पदों पर सीधी भर्ती के मामले में, जैसा कि इस संबंध में आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(ii) उप-खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था में प्रवेश के मामले में, जैसा कि इस संबंध में आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है, उन उम्मीदवारों के लिए या उनके पक्ष में, जो ऐसे कैडर, विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था के संबंध में स्थानीय क्षेत्र में आदेश में निर्दिष्ट अवधि के लिए निवास कर चुके हों या अध्ययन कर चुके हों।
(3) राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, आंध्र प्रदेश राज्य के लिए एक प्रशासनिक न्यायाधिकरण के गठन का प्रावधान कर सकता है, जो निम्नलिखित मामलों के संबंध में ऐसे अधिकार, शक्तियां और प्राधिकार [जिनमें कोई भी अधिकार, शक्ति और प्राधिकार शामिल हैं जो संविधान (बत्तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1973 के प्रारंभ होने से ठीक पहले किसी न्यायालय (सर्वोच्च न्यायालय के अलावा) या किसी न्यायाधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा प्रयोग किए जा सकते थे] का प्रयोग करेगा, अर्थात्:---
(क) राज्य की किसी सिविल सेवा में ऐसे वर्ग या वर्गों के पदों पर, या राज्य के अधीन ऐसे वर्ग या वर्गों के सिविल पदों पर, या राज्य के भीतर किसी स्थानीय प्राधिकरण के नियंत्रण के अधीन ऐसे वर्ग या वर्गों के पदों पर नियुक्ति, आवंटन या पदोन्नति, जैसा कि आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(ख) राज्य की किसी सिविल सेवा में ऐसे वर्ग या वर्गों के पदों पर, या राज्य के अधीन ऐसे वर्ग या वर्गों के सिविल पदों पर, या राज्य के भीतर किसी स्थानीय प्राधिकरण के नियंत्रण में ऐसे वर्ग या वर्गों के पदों पर नियुक्त, आवंटित या पदोन्नत व्यक्तियों की वरिष्ठता, जैसा कि आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(ग) राज्य की किसी सिविल सेवा में ऐसे वर्ग या वर्गों के पदों पर नियुक्त, आवंटित या पदोन्नत व्यक्तियों की सेवा की ऐसी अन्य शर्तें, या राज्य के अधीन ऐसे वर्ग या वर्गों के सिविल पदों पर, या राज्य के भीतर किसी स्थानीय प्राधिकरण के नियंत्रण में ऐसे वर्ग या वर्गों के पदों पर, जैसा कि आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है।
(4) खंड (3) के तहत दिया गया आदेश-
(क) प्रशासनिक न्यायाधिकरण को अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले किसी भी मामले से संबंधित शिकायतों के निवारण हेतु अभ्यावेदन प्राप्त करने के लिए अधिकृत करना, जैसा कि राष्ट्रपति आदेश में निर्दिष्ट कर सकते हैं, और उस पर ऐसे आदेश देना जैसा प्रशासनिक न्यायाधिकरण उचित समझे;
(ख) प्रशासनिक न्यायाधिकरण की शक्तियों, अधिकारों और प्रक्रिया के संबंध में ऐसे प्रावधान शामिल हों (जिनमें स्वयं की अवमानना के लिए दंड देने की प्रशासनिक न्यायाधिकरण की शक्तियों से संबंधित प्रावधान भी शामिल हों) जिन्हें राष्ट्रपति आवश्यक समझें;
(ग) प्रशासनिक न्यायाधिकरण को ऐसी कार्यवाहियों के हस्तांतरण का प्रावधान करना, जो उसके अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मामलों से संबंधित हों और किसी न्यायालय (सर्वोच्च न्यायालय के अलावा) या न्यायाधिकरण या अन्य प्राधिकरण के समक्ष ऐसे आदेश के प्रारंभ होने से ठीक पहले लंबित हों, जैसा कि आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(घ) इसमें ऐसे पूरक, आकस्मिक और परिणामी प्रावधान (शुल्क और सीमा, साक्ष्य या किसी भी कानून के आवेदन के संबंध में प्रावधान शामिल हैं जो किसी भी अपवाद या संशोधन के अधीन हो) शामिल होंगे जिन्हें राष्ट्रपति आवश्यक समझे।
(5) प्रशासनिक न्यायाधिकरण द्वारा किसी मामले का अंतिम निपटारा करने वाला आदेश राज्य सरकार द्वारा उसकी पुष्टि होने पर या आदेश जारी होने की तिथि से तीन माह की समाप्ति पर, जो भी पहले हो, प्रभावी हो जाएगा:
बशर्ते कि राज्य सरकार, लिखित में जारी किए गए विशेष आदेश द्वारा और उसमें निर्दिष्ट कारणों से, प्रशासनिक न्यायाधिकरण के किसी आदेश को उसके प्रभावी होने से पहले संशोधित या रद्द कर सकती है, और ऐसे मामले में, प्रशासनिक न्यायाधिकरण का आदेश केवल संशोधित रूप में ही प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो।
(6) खंड (5) के परंतुक के अधीन राज्य सरकार द्वारा जारी किया गया प्रत्येक विशेष आदेश, जारी किए जाने के बाद यथाशीघ्र राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाएगा।
(7) राज्य के उच्च न्यायालय को प्रशासनिक न्यायाधिकरण पर अधीक्षण की कोई शक्ति नहीं होगी और कोई न्यायालय (सर्वोच्च न्यायालय के अलावा) या न्यायाधिकरण किसी ऐसे मामले के संबंध में कोई अधिकार क्षेत्र, शक्ति या अधिकार का प्रयोग नहीं करेगा जो प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र, शक्ति या अधिकार के अधीन हो।
(8) यदि राष्ट्रपति संतुष्ट हैं कि प्रशासनिक न्यायाधिकरण का निरंतर अस्तित्व आवश्यक नहीं है, तो राष्ट्रपति आदेश द्वारा प्रशासनिक न्यायाधिकरण को समाप्त कर सकते हैं और ऐसे आदेश में ऐसे प्रावधान कर सकते हैं जैसा वे न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित मामलों के हस्तांतरण और निपटान के लिए उचित समझें, जो ऐसे उन्मूलन से ठीक पहले लंबित थे।
(9) किसी न्यायालय, न्यायाधिकरण या अन्य प्राधिकरण के किसी निर्णय, आदेश या डिक्री के बावजूद,-
(क) किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति, पदस्थापन, पदोन्नति या स्थानांतरण नहीं किया जाएगा-
(i) 1 नवंबर, 1956 से पहले हैदराबाद राज्य की सरकार या उसके अंतर्गत किसी स्थानीय प्राधिकरण के अधीन किसी पद पर नियुक्त की गई नियुक्ति; या
(ii) संविधान (बत्तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1973 के प्रारंभ होने से पहले आंध्र प्रदेश राज्य की सरकार या उसके भीतर किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण के अधीन किसी पद पर नियुक्त की गई नियुक्ति; और
(ख) उप-खंड (क) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति द्वारा या उसके समक्ष की गई कोई भी कार्रवाई या कार्य केवल इस आधार पर अवैध या शून्य नहीं माना जाएगा या कभी अवैध या शून्य नहीं हुआ होगा कि ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति, पदस्थापन, पदोन्नति या स्थानांतरण किसी ऐसे कानून के अनुसार नहीं किया गया था, जो उस समय लागू हो और जिसमें हैदराबाद राज्य के भीतर या, जैसा भी मामला हो, आंध्र प्रदेश राज्य के किसी भाग में निवास संबंधी कोई आवश्यकता निर्धारित हो।
(10) इस अनुच्छेद के प्रावधान और इसके अधीन राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए किसी भी आदेश का प्रभाव इस संविधान के किसी अन्य प्रावधान या किसी अन्य कानून में यथास्थिति होने के बावजूद लागू होगा।
अनुच्छेद 371ई. आंध्र प्रदेश में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना।- संसद विधि द्वारा आंध्र प्रदेश राज्य में एक विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रावधान कर सकती है।
सातवीं अनुसूची का संशोधन
संविधान की सातवीं अनुसूची में, सूची I में, प्रविष्टि 63 में, "दिल्ली विश्वविद्यालय, और" शब्दों के स्थान पर, "दिल्ली विश्वविद्यालय; अनुच्छेद 371ई के अनुसरण में स्थापित विश्वविद्यालय;" शब्द, अंक और अक्षर प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
