संविधान (29वाँ संशोधन) अधिनियम, 1972
अवलोकन
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- नौवीं अनुसूची
केरल भूमि सुधार अधिनियम, 1963 (अधिनियम 1 ऑफ 1964), केरल राज्य का प्रमुख भूमि सुधार कानून है और इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया गया है।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (बत्तीसवां संशोधन) विधेयक, 1972 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (सत्ताईसवां संशोधन) अधिनियम, 1972 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
केरल भूमि सुधार अधिनियम, 1963 (अधिनियम 1 ऑफ 1964), केरल राज्य का प्रमुख भूमि सुधार कानून है और इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया गया है। इसके कार्यान्वयन के दौरान, राज्य सरकार को गंभीर व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और इनसे निपटने के लिए, केरल भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1969 (अधिनियम 35 ऑफ 1969) और केरल भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1971 (अधिनियम 25 ऑफ 1971) द्वारा इस अधिनियम में व्यापक संशोधन किए गए। संशोधित मूल अधिनियम के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों को केरल उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, जिससे भूमि सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन में अनिश्चितता का माहौल बन गया। यद्यपि केरल उच्च न्यायालय ने आम तौर पर संशोधित मूल अधिनियम में परिकल्पित भूमि सुधार योजनाओं को बरकरार रखा है, फिर भी उच्च न्यायालय ने कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों को निरस्त कर दिया है। उच्च न्यायालय द्वारा बरकरार रखे गए प्रावधानों के संबंध में भी, प्रभावित पक्षों ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी। कुछ व्यक्तियों ने अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती देते हुए मूल याचिकाओं के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। सर्वोच्च न्यायालय ने 26 और 28 अप्रैल, 1972 को दिए गए अपने निर्णयों में आम तौर पर संशोधित मूल अधिनियम में परिकल्पित भूमि सुधार योजना को बरकरार रखा, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों को अमान्य घोषित करने के उच्च न्यायालय के फैसले से सहमति व्यक्त की। आशंका है कि इससे राज्य में भूमि सुधार कार्यक्रम के कार्यान्वयन पर दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और हजारों किरायेदार उन प्रावधानों से बुरी तरह प्रभावित होंगे जिन्हें या तो निरस्त कर दिया गया है या अप्रभावी बना दिया गया है। यह भी आशंका है कि निर्णयों में सर्वोच्च न्यायालय की कुछ टिप्पणियां मुकदमेबाजी का अंबार लगा सकती हैं, जिससे राज्य के हजारों कुडिकिडप्पुकरों को भारी नुकसान होगा, जो लंबी कानूनी कार्यवाही में अपना बचाव करने में असमर्थ होंगे। इसके अलावा, केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ अपीलें दायर की गई हैं जिसमें संशोधित मूल अधिनियम के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों [जैसे धारा 4ए (1) (ए) और (बी), 7, 7डी (1) और 103] को अमान्य घोषित किया गया है और वे सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं।
2. अतः, केरल भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1969 और केरल भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1971 को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि उन्हें अनुच्छेद 31B के अंतर्गत संरक्षण प्राप्त हो सके और इन अधिनियमों की वैधता के संबंध में उत्पन्न होने वाली किसी भी अनिश्चितता या संदेह को दूर किया जा सके। विधेयक इसी उद्देश्य की पूर्ति करना चाहता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने हेतु एक अधिनियम। भारत गणराज्य के तेईसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (सत्ताईसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1972 कहा जा सकता है।
नौवीं अनुसूची का संशोधन
संविधान की नौवीं अनुसूची में, प्रविष्टि 64 के बाद और व्याख्या से पहले निम्नलिखित प्रविष्टियाँ जोड़ी जाएंगी, अर्थात्:-
65. केरल भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1969 (केरल अधिनियम 35 ऑफ 1969)।
66. केरल भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1971 (केरल अधिनियम 25, 1971)।
