संविधान (28वाँ संशोधन) अधिनियम, 1972
अवलोकन
लेख सम्मिलित किए गए
- 312ए
लेख हटा दिए गए
- 314
संविधान का अनुच्छेद 314 उन व्यक्तियों को, जिन्हें राज्य सचिव या राज्य परिषद के सचिव द्वारा भारत में क्राउन की सिविल सेवा में नियुक्त किया गया था और जिन्होंने संविधान के प्रारंभ होने के बाद भी भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन सेवा जारी रखी, समान सेवा शर्तें प्रदान करता है...
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 1972 (विधेयक संख्या 55, 1972) के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (अट्ठाईसवां संशोधन) अधिनियम, 1972 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान का अनुच्छेद 314 उन व्यक्तियों को, जिन्हें राज्य सचिव या राज्य परिषद के सचिव द्वारा भारत में क्राउन की सिविल सेवा में नियुक्त किया गया था और जिन्होंने संविधान के लागू होने के बाद भी भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन सेवा जारी रखी, पारिश्रमिक, अवकाश और पेंशन के संबंध में वही सेवा शर्तें और अनुशासनात्मक मामलों के संबंध में वही अधिकार या उनसे मिलते-जुलते अधिकार, जो परिवर्तित परिस्थितियों के अनुसार अनुमत हों, प्राप्त करने की गारंटी देता है, जो ऐसे व्यक्तियों को संविधान के लागू होने से ठीक पहले प्राप्त थे। अपरिवर्तनीय सेवा शर्तों वाले अधिकारियों के एक वर्ग की अवधारणा परिवर्तित सामाजिक व्यवस्था के साथ असंगत है। इसलिए, अनुच्छेद 314 को हटाने और एक नए अनुच्छेद 312ए को शामिल करने के लिए संविधान में संशोधन करना आवश्यक समझा जाता है, जो संसद को उपरोक्त अधिकारियों की सेवा शर्तों को कानून द्वारा बदलने या निरस्त करने की शक्तियां प्रदान करता है और इसमें उपयुक्त परिणामी और आकस्मिक प्रावधान शामिल हैं।
2. यह विधेयक उपरोक्त उद्देश्यों को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के तेईसवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (अट्ठाईसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1972 कहा जा सकता है।
(2) यह ऐसी तिथि_664 से लागू होगा, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
नए अनुच्छेद 312A का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 312 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
312ए. कुछ सेवाओं के अधिकारियों की सेवा शर्तों को बदलने या निरस्त करने की संसद की शक्ति (1) संसद विधि द्वारा-
(क) भारत में क्राउन की सिविल सेवा में इस संविधान के प्रारंभ होने से पहले राज्य सचिव या राज्य परिषद सचिव द्वारा नियुक्त किए गए व्यक्तियों के पारिश्रमिक, अवकाश और पेंशन संबंधी सेवा शर्तों और अनुशासनात्मक मामलों संबंधी अधिकारों को, चाहे भविष्य में या पूर्वव्यापी रूप से, परिवर्तित या निरस्त करना, जो संविधान (अट्ठाईसवां संशोधन) अधिनियम, 1972 के प्रारंभ होने के बाद भी भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी सेवा या पद पर कार्यरत हैं;
(ख) उन व्यक्तियों की पेंशन संबंधी सेवा शर्तों में, चाहे भविष्य में या पूर्वव्यापी रूप से, परिवर्तन करना या निरस्त करना, जो इस संविधान के प्रारंभ होने से पहले भारत में क्राउन की सिविल सेवा में राज्य सचिव या राज्य परिषद सचिव द्वारा नियुक्त किए गए थे और संविधान (अट्ठाईसवां संशोधन) अधिनियम, 1972 के प्रारंभ होने से पहले किसी भी समय सेवानिवृत्त हो गए थे या अन्यथा सेवा में नहीं रहे थे:
बशर्ते कि ऐसे किसी व्यक्ति के मामले में जो सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या अन्य न्यायाधीश, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, संघ या राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य या मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर कार्यरत है या रह चुका है, उप-खंड (क) या उप-खंड (ख) में कुछ भी संसद को ऐसे पद पर उसकी नियुक्ति के बाद उसकी सेवा शर्तों को उसके प्रतिकूल रूप से बदलने या निरस्त करने का अधिकार नहीं देगा, सिवाय उस हद तक जहां तक ऐसी सेवा शर्तें उस पर इस कारण लागू होती हैं कि वह भारत में क्राउन की सिविल सेवा में राज्य सचिव या राज्य परिषद के सचिव द्वारा नियुक्त व्यक्ति है।
(2) इस अनुच्छेद के अधीन संसद द्वारा विधि द्वारा प्रदान की गई सीमा को छोड़कर, इस अनुच्छेद में कोई बात किसी विधानमंडल या अन्य प्राधिकरण की इस संविधान के किसी अन्य प्रावधान के अधीन खंड (1) में निर्दिष्ट व्यक्तियों की सेवा शर्तों को विनियमित करने की शक्ति को प्रभावित नहीं करेगी।
(3) न तो सर्वोच्च न्यायालय और न ही किसी अन्य न्यायालय को अधिकार क्षेत्र होगा-
(क) खंड (1) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति द्वारा किए गए या निष्पादित किसी अनुबंध, समझौते या अन्य समान दस्तावेज के किसी प्रावधान या उस पर किए गए किसी पृष्ठांकन से उत्पन्न कोई विवाद, या भारत में क्राउन की किसी सिविल सेवा में उसकी नियुक्ति या भारत डोमिनियन या उसके किसी प्रांत की सरकार के अधीन उसकी सेवा में निरंतरता के संबंध में ऐसे व्यक्ति को जारी किए गए किसी पत्र से उत्पन्न कोई विवाद;
(ख) अनुच्छेद 314 के तहत मूल रूप से अधिनियमित किसी अधिकार, दायित्व या बाध्यता के संबंध में कोई विवाद।
(4) इस अनुच्छेद के प्रावधान मूल रूप से अधिनियमित अनुच्छेद 314 या इस संविधान के किसी अन्य प्रावधान में किसी भी बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे।
अनुच्छेद 314 का लोप
संविधान के अनुच्छेद 314 को हटा दिया जाएगा।
