संविधान (27वाँ संशोधन) अधिनियम, 1971
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 239ए
- 240
लेख सम्मिलित किए गए
- 239बी
- 371सी
उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के पुनर्गठन की योजना के तहत यह प्रस्ताव किया गया है कि इस योजना के अंतर्गत परिकल्पित केंद्र शासित प्रदेश मिजोरम में एक विधानमंडल और मंत्रिपरिषद होनी चाहिए।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (सत्ताईसवाँ संशोधन) विधेयक, 1971 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (सत्ताईसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1971 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के पुनर्गठन की योजना के अंतर्गत, यह प्रस्तावित है कि इस योजना के अधीन परिकल्पित केंद्र शासित प्रदेश मिजोरम में एक विधानमंडल और मंत्रिपरिषद होनी चाहिए। इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मिजोरम केंद्र शासित प्रदेश को संविधान के अनुच्छेद 239ए (खंड 2) में शामिल करने का प्रस्ताव है।
केंद्र शासित प्रदेशों और राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय कृषि संगठन (एनईएफए) के प्रशासन पर प्रशासनिक सुधार आयोग द्वारा नियुक्त अध्ययन दल ने सिफारिश की है कि विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक को विधानमंडल के सत्र में न होने पर अध्यादेश जारी करने का अधिकार हो सकता है। इस सिफारिश को स्वीकार करने और संविधान में एक उपयुक्त प्रावधान शामिल करने का प्रस्ताव है जो ऐसे प्रशासक को अध्यादेश जारी करने का अधिकार प्रदान करता है (खंड 3)।
संविधान की छठी अनुसूची के अनुच्छेद 18(2) और अनुच्छेद 240 के अनुसार, राष्ट्रपति को पूर्वोत्तर सीमांत एजेंसी के लिए विनियम बनाने का अधिकार प्राप्त है। पुनर्गठन योजना के तहत एजेंसी के अरुणाचल प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद भी इन शक्तियों को जारी रखने का प्रस्ताव है। मिजोरम केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में भी इसी प्रकार की शक्तियां रखने का प्रस्ताव है (खंड 4)।
जब किसी राज्य का विधानमंडल संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत जारी किसी घोषणा द्वारा भंग कर दिया जाता है या उसका कामकाज निलंबित कर दिया जाता है, तो संसद अनुच्छेद 357(1) के तहत कानून बनाकर उस राज्य के संबंध में राष्ट्रपति को विधायी शक्तियां प्रदान करने के लिए अधिकृत है। विधानमंडलों वाले केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप जब भी किसी केंद्र शासित प्रदेश का विधानमंडल राष्ट्रपति के आदेश द्वारा भंग कर दिया जाता है या उसका कामकाज निलंबित कर दिया जाता है, तो उस केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित सभी कानून संसद द्वारा पारित किए जाने होते हैं। यह प्रस्तावित है कि ऐसी परिस्थितियों में अनुच्छेद 240 के तहत विनियमन बनाने की शक्ति राष्ट्रपति को उपलब्ध कराई जानी चाहिए (खंड 4)।
मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में मुख्य रूप से अनुसूचित जनजातियों के लोग निवास करते हैं। उनके हितों की रक्षा के लिए केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1963 की धारा 562 में मणिपुर केंद्र शासित प्रदेश की विधान सभा की एक समिति के गठन का विशेष प्रावधान किया गया था, जिसमें पहाड़ी क्षेत्रों के सदस्य शामिल होंगे। पुनर्गठन योजना के तहत मणिपुर केंद्र शासित प्रदेश के राज्य बनने पर उक्त धारा 52 लागू नहीं रहेगी। पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों के लिए सुरक्षा उपायों की योजना के तहत, मणिपुर के राज्य बनने के बाद भी इस व्यवस्था को जारी रखने का प्रस्ताव है। इसलिए, संविधान में ऐसी समिति के गठन के लिए एक विशिष्ट प्रावधान किया जा रहा है (धारा 5)।
यह विधेयक उपरोक्त प्रस्तावों को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है।
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम।
भारत गणराज्य के बाईसवें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित किया जाता है कि:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (सत्ताईसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1971 कहा जा सकता है।
(2) यह धारा और धारा 3 तुरंत लागू होंगी तथा इस अधिनियम के शेष प्रावधान ऐसी तिथि_663 को लागू होंगे, जो उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 की धारा 2 के खंड (ख) के अधीन नियुक्त तिथि से पहले की तिथि न हो, जिसे केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
अनुच्छेद 239A का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 239ए में खंड (1) में, "गोवा, दमन और दीव तथा पुडुचेरी" के स्थान पर "गोवा, दमन और दीव, पुडुचेरी और मिजोरम" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
नए अनुच्छेद 239B का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 239ए के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
239ख. विधानमंडल के अवकाश के दौरान अध्यादेश जारी करने की प्रशासक की शक्ति।
(1) यदि किसी भी समय, अनुच्छेद 239ए के खंड (1) में निर्दिष्ट संघ राज्य क्षेत्र के विधानमंडल के सत्र में होने के अलावा, उसके प्रशासक को यह प्रतीत हो कि ऐसी परिस्थितियाँ मौजूद हैं जिनके कारण उसके लिए तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक है, तो वह ऐसे अध्यादेश जारी कर सकता है जैसा कि परिस्थितियों के अनुसार उसे आवश्यक प्रतीत होता है:
बशर्ते कि प्रशासक द्वारा ऐसा कोई अध्यादेश राष्ट्रपति से इस संबंध में निर्देश प्राप्त किए बिना जारी नहीं किया जाएगा:
इसके अलावा, जब भी उक्त विधानमंडल भंग हो जाता है, या अनुच्छेद 239ए के खंड (1) में निर्दिष्ट किसी कानून के तहत की गई किसी कार्रवाई के कारण उसका कामकाज निलंबित रहता है, तो प्रशासक ऐसे विघटन या निलंबन की अवधि के दौरान कोई अध्यादेश जारी नहीं करेगा।
(2) राष्ट्रपति के निर्देशों के अनुसरण में इस अनुच्छेद के अंतर्गत जारी किया गया अध्यादेश संघ राज्य के विधानमंडल का अधिनियम माना जाएगा, जिसे अनुच्छेद 239ए के खंड (1) में निर्दिष्ट किसी कानून में इस संबंध में निहित प्रावधानों का अनुपालन करते हुए विधिवत अधिनियमित किया गया हो, परन्तु ऐसा प्रत्येक अध्यादेश-
(क) इसे संघ राज्य क्षेत्र के विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा और विधानमंडल के पुन: एकत्र होने के छह सप्ताह बाद या यदि उस अवधि के समाप्त होने से पहले विधानमंडल द्वारा इसे अस्वीकृत करने वाला प्रस्ताव पारित किया जाता है, तो प्रस्ताव पारित होने पर यह लागू होना बंद हो जाएगा; और
(ख) प्रशासक द्वारा राष्ट्रपति से इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने के बाद किसी भी समय इसे वापस लिया जा सकता है।
(3) यदि और जहाँ तक इस अनुच्छेद के अंतर्गत किसी अध्यादेश में कोई ऐसा प्रावधान है जो संघ शासित प्रदेश के विधानमंडल के किसी अधिनियम में, अनुच्छेद 239ए के खंड (1) में निर्दिष्ट किसी कानून में इस संबंध में निहित प्रावधानों का अनुपालन करने के बाद अधिनियमित किए जाने पर वैध नहीं होगा, तो वह अध्यादेश शून्य होगा।
अनुच्छेद 240 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 240 में,-
(क) खंड (1) में,-
(i) प्रविष्टि (ई) के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टियाँ जोड़ी जाएँगी, अर्थात्:-
"(एफ) मिजोरम;
(जी) अरुणाचल प्रदेश:";
(ii) परंतुक में, "गोवा, दमन और दीव या पुडुचेरी के केंद्र शासित प्रदेश" शब्दों के स्थान पर "गोवा, दमन और दीव, पुडुचेरी या मिजोरम के केंद्र शासित प्रदेश" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे;
(iii) इस प्रकार संशोधित परंतुक के बाद, निम्नलिखित अतिरिक्त परंतुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
इसके अलावा, जब भी गोवा, दमन और दीव, पुडुचेरी या मिजोरम के केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विधानमंडल के रूप में कार्य करने वाला निकाय भंग हो जाता है, या अनुच्छेद 239ए के खंड (1) में निर्दिष्ट किसी कानून के तहत की गई किसी कार्रवाई के कारण ऐसे विधानमंडल के रूप में उस निकाय का कार्य निलंबित रहता है, तो राष्ट्रपति ऐसे विघटन या निलंबन की अवधि के दौरान उस केंद्र शासित प्रदेश की शांति, प्रगति और सुशासन के लिए नियम बना सकते हैं।
(ख) खंड (2) में, "कोई मौजूदा कानून" शब्दों के स्थान पर "कोई अन्य कानून" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
नए अनुच्छेद 371C का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 371B के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
371सी. मणिपुर राज्य के संबंध में विशेष प्रावधान।-
(1) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रपति मणिपुर राज्य के संबंध में आदेश द्वारा राज्य की विधान सभा की एक समिति के गठन एवं कार्यों का प्रावधान कर सकता है, जिसमें उस राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों से निर्वाचित सदस्य शामिल हों, सरकार के कामकाज के नियमों और राज्य की विधान सभा की प्रक्रिया के नियमों में संशोधन करने का प्रावधान कर सकता है, और ऐसी समिति के उचित कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए राज्यपाल की किसी विशेष जिम्मेदारी का प्रावधान कर सकता है।
(2) राज्यपाल प्रतिवर्ष, या जब भी राष्ट्रपति द्वारा ऐसा अपेक्षित हो, मणिपुर राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा और संघ की कार्यकारी शक्ति उक्त क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में राज्य को निर्देश देने तक विस्तारित होगी।
स्पष्टीकरण - इस लेख में, "पहाड़ी क्षेत्र" अभिव्यक्ति से तात्पर्य ऐसे क्षेत्रों से है जिन्हें राष्ट्रपति आदेश द्वारा पहाड़ी क्षेत्र घोषित कर सकते हैं।
