संविधान (21वाँ संशोधन) अधिनियम, 1967
अवलोकन
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- आठवीं अनुसूची
सिंधी भाषी लोगों की ओर से सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की लगातार मांग रही है। हालांकि वर्तमान में सिंधी किसी विशिष्ट क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा नहीं है, लेकिन यह अविभाजित भारत के एक प्रांत की भाषा हुआ करती थी और विभाजन के कारण ही संभव हो सका है...
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (बाईसवाँ संशोधन) विधेयक, 1966 (विधेयक संख्या XXIV, 1966) के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (इक्कीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1967 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
सिंधी भाषी लोगों की ओर से सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की लगातार मांग रही है। हालांकि वर्तमान में सिंधी किसी विशिष्ट क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा नहीं है, लेकिन अविभाजित भारत में यह एक प्रांत की भाषा हुआ करती थी और विभाजन न हुआ होता तो यह प्रांत की भाषा बनी रहती। भाषाई अल्पसंख्यक आयुक्त ने भी सिंधी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की सिफारिश की है। 4 नवंबर, 1966 को यह घोषणा की गई कि सरकार ने सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का निर्णय लिया है। यह विधेयक इसी निर्णय को लागू करने का प्रयास करता है।
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम।
भारत गणराज्य के अठारहवें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित किया जाता है कि:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (इक्कीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1967 कहा जा सकता है।
आठवीं अनुसूची का संशोधन
संविधान की आठवीं अनुसूची में (क) प्रविष्टियाँ 12 से 14 को क्रमशः प्रविष्टियाँ 13 से 15 के रूप में पुनः क्रमांकित किया जाएगा, और (ख) इस प्रकार पुनः क्रमांकित प्रविष्टि "13" से पहले प्रविष्टि "12. सिंधी." जोड़ी जाएगी।
