संविधान (20वाँ संशोधन) अधिनियम, 1966
अवलोकन
लेख सम्मिलित किए गए
- 233ए
यह विधेयक उपरोक्त प्रस्तावों को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के सत्रहवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
उद्देश्यों और कारणों का कथन
2. यह विधेयक उपरोक्त प्रस्तावों को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के सत्रहवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (बीसवां संशोधन) अधिनियम, 1966 कहा जा सकता है।
नए अनुच्छेद 233A का अंतःस्थापन
संविधान के अनुच्छेद 233 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
233ए. कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का सत्यापन।- किसी भी न्यायालय के किसी निर्णय, आदेश या डिक्री के बावजूद,-
(क) (i) किसी राज्य की न्यायिक सेवा में कार्यरत किसी व्यक्ति की, या किसी ऐसे व्यक्ति की, जो कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या वकील रहा हो, उस राज्य में जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति नहीं की जाएगी, और (ii) संविधान (बीसवां संशोधन) अधिनियम, 1966 के प्रारंभ होने से पूर्व किसी भी समय अनुच्छेद 233 या अनुच्छेद 235 के प्रावधानों के अनुसार न की गई किसी भी ऐसी नियुक्ति, पदोन्नति या स्थानांतरण को, केवल इस तथ्य के कारण अवैध या शून्य नहीं माना जाएगा या कभी अवैध या शून्य नहीं माना जाएगा कि ऐसी नियुक्ति, पदस्थापन, पदोन्नति या स्थानांतरण उक्त प्रावधानों के अनुसार नहीं किया गया था;
(ख) संविधान (बीसवां संशोधन) अधिनियम, 1966 के प्रारंभ होने से पहले, किसी भी राज्य में जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त, पदस्थापित, पदोन्नत या स्थानांतरित किसी भी व्यक्ति द्वारा अनुच्छेद 223 या अनुच्छेद 235 के प्रावधानों के अनुसार नियुक्त, पदस्थापित, पदोन्नत या स्थानांतरित किए जाने के अलावा, कोई भी क्षेत्राधिकार प्रयोग, निर्णय, आदेश, सजा या पारित, और कोई अन्य कार्य या कार्यवाही, केवल इस तथ्य के कारण अवैध या अमान्य नहीं मानी जाएगी या कभी अवैध या अमान्य नहीं हुई होगी कि ऐसी नियुक्ति, पदस्थापन, पदोन्नति या स्थानांतरण उक्त प्रावधानों के अनुसार नहीं किया गया था।
