संविधान (19वाँ संशोधन) अधिनियम, 1966
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 324
भारत में 1962 में हुए तीसरे आम चुनाव पर चुनाव आयोग की रिपोर्ट में की गई महत्वपूर्ण सिफारिशों में से एक, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया था, चुनाव न्यायाधिकरणों के उन्मूलन और उच्च न्यायालयों द्वारा चुनाव याचिकाओं के परीक्षण से संबंधित है।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (इक्कीसवाँ संशोधन) विधेयक, 1966 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (उन्नीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1966 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
भारत में 1962 में हुए तीसरे आम चुनाव पर चुनाव आयोग की रिपोर्ट में की गई महत्वपूर्ण सिफारिशों में से एक, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया था, चुनाव न्यायाधिकरणों के उन्मूलन और उच्च न्यायालयों द्वारा चुनाव याचिकाओं के परीक्षण से संबंधित है।
यदि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन करने के लिए एक विधेयक का प्रस्ताव, जिसमें अन्य बातों के अलावा, वर्तमान की तरह चुनाव न्यायाधिकरणों के बजाय उच्च न्यायालयों द्वारा चुनाव याचिकाओं की सुनवाई के प्रावधान शामिल हैं, संसद द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (1) में एक छोटा सा संशोधन करना आवश्यक होगा, ताकि उसमें से "संसद और राज्यों के विधानमंडलों के चुनावों से उत्पन्न होने वाले या उनसे संबंधित संदेहों और विवादों के निर्णय के लिए चुनाव न्यायाधिकरणों की नियुक्ति सहित" शब्दों को हटाया जा सके।
इस विधेयक का उद्देश्य उपरोक्त लक्ष्य को साकार करना है।
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम।
भारत गणराज्य के सत्रहवें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित किया जाता है कि:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (उन्नीसवाँ संशोधन) अधिनियम, 1966 कहा जा सकता है।
अनुच्छेद 324 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 324 में खंड (1) में, "संसद और राज्यों के विधानमंडलों के चुनावों से उत्पन्न होने वाले या उनसे संबंधित संदेह और विवादों के निर्णय के लिए चुनाव न्यायाधिकरणों की नियुक्ति सहित" शब्द हटा दिए जाएंगे।
