संविधान (11वाँ संशोधन) अधिनियम, 1961
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 71
संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में एकत्रित सदस्यों द्वारा किया जाना आवश्यक है। उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए दोनों सदनों के सदस्यों का संयुक्त सत्र में एकत्रित होना अनिवार्य होना पूरी तरह से अनावश्यक प्रतीत होता है और इससे समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं…
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (ग्यारहवां संशोधन) विधेयक, 1961 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (ग्यारहवां संशोधन) अधिनियम, 1961 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में उपस्थित सदस्यों द्वारा किया जाना अनिवार्य है। उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए दोनों सदनों के सदस्यों का संयुक्त सत्र में उपस्थित होना अनिवार्य होना पूरी तरह से अनावश्यक प्रतीत होता है और इससे व्यावहारिक कठिनाइयाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। अतः, इस अनुच्छेद में संशोधन प्रस्तावित है ताकि उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जा सके। संविधान के अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों और राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति चुनाव की तिथि से पहले ऐसे चुनाव संपन्न कराने का हर संभव प्रयास किया जाता है। यद्यपि, यह संभव है कि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव से पहले संसद के दोनों सदनों के चुनाव संपन्न न हो पाएँ। अतः संविधान के अनुच्छेद 71 में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उपयुक्त निर्वाचक मंडल में किसी भी कारण से रिक्ति होने पर राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती।
2. इस विधेयक का उद्देश्य निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करना है। विधेयक के साथ संलग्न खंडों पर टिप्पणियाँ इसके प्रावधानों की व्याख्या करती हैं। भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम। भारत गणराज्य के बारहवें वर्ष में संसद द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित किया जाता है:-
संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम को संविधान (ग्यारहवां संशोधन) अधिनियम, 1961 कहा जा सकता है।
(2) अनुच्छेद 66 का संशोधन.- संविधान के अनुच्छेद 66 में खंड (1) में, "संसद के दोनों सदनों के संयुक्त बैठक में एकत्रित सदस्य" शब्दों के स्थान पर "संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल के सदस्य" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
अनुच्छेद 71 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 71 में खंड (3) के बाद निम्नलिखित खंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
(4) किसी व्यक्ति का राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के रूप में चुनाव, उसे चुनने वाले निर्वाचक मंडल के सदस्यों में किसी भी कारण से रिक्ति होने के आधार पर प्रश्न में नहीं उठाया जाएगा।
