संविधान (12वाँ संशोधन) अधिनियम, 1962
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 240
कार्यक्रम प्रभावित हुए
- पहली अनुसूची
20 दिसंबर, 1961 से गोवा, दमन और दीव के क्षेत्रों के अधिग्रहण के बाद, संविधान के अनुच्छेद 1 के खंड (3) के उपखंड (ग) के अनुसार, ये क्षेत्र उस तिथि से भारत के भूभाग में समाहित हैं और इनका प्रशासन केंद्र शासित प्रदेश के रूप में किया जा रहा है।
उद्देश्यों और कारणों का कथन
संविधान (बारहवां संशोधन) विधेयक, 1962 के साथ संलग्न उद्देश्यों और कारणों का विवरण, जिसे संविधान (बारहवां संशोधन) अधिनियम, 1962 के रूप में अधिनियमित किया गया था।
20 दिसंबर, 1961 से गोवा, दमन और दीव के क्षेत्रों के अधिग्रहण के बाद, संविधान के अनुच्छेद 1 के खंड (3) के उपखंड (ग) के अनुसार, ये क्षेत्र उस तिथि से भारत के भूभाग में समाहित हैं और संविधान के अनुच्छेद 239 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा एक प्रशासक के माध्यम से इनका प्रशासन केंद्र शासित प्रदेश के रूप में किया जा रहा है। हालांकि, यह वांछनीय समझा जाता है कि गोवा, दमन और दीव को संविधान की प्रथम अनुसूची में केंद्र शासित प्रदेश के रूप में विशेष रूप से शामिल किया जाए। यह भी उचित समझा जाता है कि अनुच्छेद 240 के खंड (1) में उपयुक्त संशोधन किया जाए ताकि राष्ट्रपति को गोवा, दमन और दीव की शांति, प्रगति और सुशासन के लिए नियम बनाने की शक्ति प्रदान की जा सके, जैसा कि दादरा और नगर हवेली के मामले में किया गया है।
संविधान (बारहवां संशोधन) विधेयक, 1962 में उपर्युक्त प्रावधानों को लागू करने का प्रयास किया गया है।
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम।
भारत गणराज्य के तेरहवें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित किया जाता है कि:-
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (बारहवां संशोधन) अधिनियम, 1962 कहा जा सकता है।
(2) यह 20 दिसंबर 1961 को लागू हुआ माना जाएगा।
संविधान की पहली अनुसूची का संशोधन
संविधान की प्रथम अनुसूची में, "संघ राज्यक्षेत्र" शीर्षक के अंतर्गत, प्रविष्टि 7 के बाद निम्नलिखित प्रविष्टि जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
8. गोवा, दमन और दीव: वे क्षेत्र जो 20 दिसंबर, 1961 से ठीक पहले गोवा, दमन और दीव में शामिल थे।
अनुच्छेद 240 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 240 के खंड (1) में प्रविष्टि (ग) के बाद निम्नलिखित प्रविष्टि जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
(घ) गोवा, दमन और दीव।
