संविधान (103वाँ संशोधन) अधिनियम, 2019
अवलोकन
अनुच्छेदों में संशोधन किया गया
- 15
- 16
उद्देश्यों और कारणों का कथन
भारत के संविधान में आगे संशोधन करने के लिए एक अधिनियम।
भारत गणराज्य के उनसठवें वर्ष में संसद द्वारा यह अधिनियमित किया जाता है कि:—
संक्षिप्त नाम और प्रारंभ
(1) इस अधिनियम को संविधान (एक सौ तीसरा संशोधन) अधिनियम, 2019 कहा जा सकता है।
(2) यह उस तिथि से लागू होगा जो केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियुक्त करे।
अनुच्छेद 15 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 15 में खंड (5) के बाद निम्नलिखित खंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:—
(6) इस अनुच्छेद या अनुच्छेद 19 के खंड (1) के उपखंड (जी) या अनुच्छेद 29 के खंड (2) में कोई बात राज्य को निम्नलिखित कार्य करने से नहीं रोकेगी,—
(क) खंड (4) और (5) में उल्लिखित वर्गों के अतिरिक्त नागरिकों के किसी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की उन्नति के लिए कोई विशेष प्रावधान; और
(ख) खंड (4) और (5) में उल्लिखित वर्गों के अतिरिक्त, आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों के किसी भी वर्ग की उन्नति के लिए कोई विशेष प्रावधान, जहां तक ऐसे विशेष प्रावधान निजी शैक्षणिक संस्थानों सहित शैक्षणिक संस्थानों में उनके प्रवेश से संबंधित हैं, चाहे वे सरकार द्वारा सहायता प्राप्त हों या न हों।
अनुच्छेद 30 के खंड (1) में निर्दिष्ट अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों के अलावा, राज्य में आरक्षण के मामले में मौजूदा आरक्षण के अतिरिक्त होगा और प्रत्येक श्रेणी में कुल सीटों के अधिकतम दस प्रतिशत के अधीन होगा।
स्पष्टीकरण. —इस अनुच्छेद और अनुच्छेद 16 के प्रयोजनों के लिए, "आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग" वे वर्ग होंगे जिन्हें राज्य द्वारा समय-समय पर पारिवारिक आय और आर्थिक अभाव के अन्य संकेतकों के आधार पर अधिसूचित किया जा सकता है।
अनुच्छेद 16 का संशोधन
संविधान के अनुच्छेद 16 में खंड (5) के बाद निम्नलिखित खंड जोड़ा जाएगा, अर्थात्:—
(6) इस अनुच्छेद में कोई बात राज्य को खंड (4) में उल्लिखित वर्गों के अतिरिक्त, आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों के किसी भी वर्ग के लिए, मौजूदा आरक्षण के अतिरिक्त और प्रत्येक वर्ग के पदों के अधिकतम दस प्रतिशत तक, नियुक्तियों या पदों के आरक्षण का प्रावधान करने से नहीं रोकेगी।
