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26 प्रविष्टियाँ
चल संपत्ति।
"चल संपत्ति" शब्दों का तात्पर्य भूमि और पृथ्वी से जुड़ी वस्तुओं या पृथ्वी से स्थायी रूप से जुड़ी किसी भी वस्तु को छोड़कर, हर प्रकार की भौतिक संपत्ति से है।
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 84 - विकॄतचित व्यक्ति का कार्य
विकॄतचित व्यक्ति का कार्य कोई बात अपराध नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है, जो उसे करते समय चित्त-विकॄति के कारण उस कार्य की प्रकृति , या यह कि जो कुछ वह कर रहा है वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है, जानने में असमर्थ है ।
पूरा पढ़ेंमानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति का कृत्य।
कोई भी कार्य अपराध नहीं है यदि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जो उस समय मानसिक अस्वस्थता के कारण उस कार्य की प्रकृति को जानने में असमर्थ हो, या यह जानने में असमर्थ हो कि वह जो कर रहा है वह गलत है या कानून के विपरीत है।
पूरा पढ़ेंधारा 185 - लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति का अवैध क्रय या उसके लिए अवैध बोली लगाना
लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति का अवैध क्रय या उसके लिए अवैध बोली लगाना जो कोई संपत्ति के किसी ऐसे विक्रय में, जो लोक सेवक के नाते लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा हो रहा हो, किसी ऐसे व्यक्ति के निमित्त चाहे वह व्यक्ति वह स्वयं हो, या कोई अन्य हो, किसी संपत्ति का क्रय करेगा…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक के अधिकार से बिक्री के लिए पेश की गई संपत्ति की अवैध खरीद या बोली लगाना।
जो कोई भी लोक सेवक के वैध अधिकार से आयोजित संपत्ति की नीलामी में, स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति के खाते पर, किसी ऐसी संपत्ति को खरीदता है या उसके लिए बोली लगाता है, जिसके बारे में वह जानता है कि वह व्यक्ति उस नीलामी में उस संपत्ति को खरीदने के लिए कानूनी रूप से अक्षम है, या ऐसी संपत्ति के लिए बोली लगाता है, लेकिन बोली…
पूरा पढ़ेंधारा 186 - लोक सेवक के लोक कॄत्यों के निर्वहन में बाधा डालना
लोक सेवक के लोक कॄत्यों के निर्वहन में बाधा डालना जो कोई किसी लोक सेवक के लोक कॄत्यों के निर्वहन में स्वेच्छया बाधा डालेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंलोक सेवक को उनके सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना।
जो कोई भी स्वेच्छा से किसी लोक सेवक को उसके लोक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से तीन महीने तक की अवधि के लिए, या दो हजार पांच सौ रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 187 - लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जबकि सहायता देने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो
लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जबकि सहायता देने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो जो कोई किसी लोक सेवक को, उसके लोक कर्तव्य के निष्पादन में सहायता देने या पहुंचाने के लिए विधि द्वारा आबद्ध होते हुए, ऐसी सहायता देने का साशय लोप करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दौ सौ रुपए तक का…
पूरा पढ़ेंकानून द्वारा सहायता प्रदान करने के लिए बाध्य होने पर लोक सेवक की सहायता करने में चूक।
जो कोई भी, लोक सेवक को उसके लोक कर्तव्य के पालन में सहायता प्रदान करने के लिए कानून द्वारा बाध्य होते हुए, जानबूझकर ऐसी सहायता देने में चूक करता है,— (क) उसे एक महीने तक की साधारण कारावास की सजा, या दो हजार पांच सौ रुपये तक के जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जाएगा; (ख) और यदि किसी लोक सेवक द्वारा, जो विधिवत रूप से…
पूरा पढ़ेंधारा 188 - लोक सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा
लोक सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा जो कोई यह जानते हुए कि वह ऐसे लोक सेवक द्वारा प्रख्यापित किसी आदेश से, जो ऐसे आदेश को प्रख्यापित करने के लिए विधिपूर्वक सशक्त है, कोई कार्य करने से विरत रहने के लिए या अपने कब्जे में की, या अपने प्रबन्धाधीन, किसी संपत्ति के बारे में कोई विशेष व्यवस्था करने के लिए…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक द्वारा विधिवत जारी किए गए आदेश की अवज्ञा करना।
जो कोई भी, यह जानते हुए कि किसी लोक सेवक द्वारा, जिसे ऐसा आदेश जारी करने का विधिवत अधिकार प्राप्त है, जारी किए गए आदेश के द्वारा उसे किसी विशिष्ट कार्य से परहेज करने या अपने कब्जे में या अपने प्रबंधन के अधीन किसी विशिष्ट संपत्ति के संबंध में कोई विशिष्ट आदेश लेने का निर्देश दिया गया है, ऐसे निर्देश का उल्लंघन करता…
पूरा पढ़ेंधारा 189 - लोक सेवक को क्षति करने की धमकी
लोक सेवक को क्षति करने की धमकी जो कोई किसी लोक सेवक को या ऐसे किसी व्यक्ति को जिससे उस लोक सेवक के हितबद्ध होने का उसे विश्वास हो, इस प्रयोजन से क्षति की कोई धमकी देगा कि उस लोक सेवक को उत्प्रेरित किया जाए कि वह ऐसे लोक सेवक के कॄत्यों के प्रयोग से संसक्त कोई कार्य करे, या करने से प्रविरत रहे, या करने में विलम्ब करे,…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकी।
जो कोई भी किसी लोक सेवक को, या किसी ऐसे व्यक्ति को जिसमें वह मानता है कि लोक सेवक का हित है, किसी प्रकार की चोट पहुँचाने की धमकी देता है, ताकि उस लोक सेवक को उसके लोक कर्तव्यों के निर्वहन से संबंधित कोई कार्य करने के लिए प्रेरित किया जा सके, या किसी कार्य को करने से रोकने या उसमें देरी करने के लिए उकसाया जा सके, तो…
पूरा पढ़ेंधारा 190 - लोक सेवक से संरक्षा के लिए आवेदन करने से विरत रहने के लिए किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिए क्षति की धमकी
लोक सेवक से संरक्षा के लिए आवेदन करने से विरत रहने के लिए किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिए क्षति की धमकी जो कोई किसी व्यक्ति को इस प्रयोजन से क्षति की कोई धमकी देगा कि वह उस व्यक्ति को उत्प्रेरित करे कि वह किसी क्षति से संरक्षा के लिए कोई वैध आवेदन किसी ऐसे लोक सेवक से करने से विरत रहे, या प्रतिविरत रहे, जो ऐसे…
पूरा पढ़ेंकिसी व्यक्ति को लोक सेवक से सुरक्षा प्राप्त करने के लिए आवेदन करने से रोकने हेतु चोट पहुँचाने की धमकी देना।
जो कोई भी किसी व्यक्ति को किसी प्रकार की चोट पहुँचाने की धमकी देता है ताकि वह व्यक्ति किसी लोक सेवक को, जो कानूनी रूप से ऐसी सुरक्षा प्रदान करने या ऐसी सुरक्षा दिलाने के लिए अधिकृत है, किसी प्रकार की चोट से सुरक्षा के लिए कानूनी आवेदन करने से रोके या मना करे, उसे एक वर्ष तक की कारावास की सजा, जुर्माना या दोनों से…
पूरा पढ़ेंझूठी गवाही देना।
जो कोई भी, शपथ द्वारा या कानून के किसी स्पष्ट प्रावधान द्वारा सत्य बताने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होते हुए, या कानून द्वारा किसी विषय पर घोषणा करने के लिए बाध्य होते हुए, कोई ऐसा कथन देता है जो झूठा है, और जिसे वह या तो झूठा जानता है या मानता है या सत्य नहीं मानता है, तो उसे झूठी गवाही देने वाला कहा जाता है।…
पूरा पढ़ेंझूठी गवाही देना।
जो कोई भी, शपथ द्वारा या कानून के किसी स्पष्ट प्रावधान द्वारा सत्य बताने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होते हुए, या कानून द्वारा किसी विषय पर घोषणा करने के लिए बाध्य होते हुए, कोई ऐसा कथन देता है जो झूठा है, और जिसे वह या तो झूठा जानता है या मानता है या सत्य नहीं मानता है, तो उसे झूठी गवाही देने वाला कहा जाता है।…
पूरा पढ़ेंधारा 192 - मिथ्या साक्ष्य गढ़ना
मिथ्या साक्ष्य गढ़ना जो कोई किसी परिस्थिति का अस्तित्व कारित करेगा, या किसी पुस्तक या अभिलेख या इलैक्ट्रानिक अभिलेख में कोई मिथ्या प्रविष्टि करेगा, या ऐसी कोई दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख बनाएगा, जिसमें कोई मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट हो, इस आशय से कि ऐसी परिस्थिति, मिथ्या प्रविष्टि या मिथ्या कथन, किसी न्यायिक कार्यवाही…
पूरा पढ़ेंझूठे सबूत गढ़ना।
जो कोई भी किसी परिस्थिति को उत्पन्न करता है या किसी पुस्तक, अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख में कोई झूठी प्रविष्टि करता है या कोई ऐसा दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख बनाता है जिसमें झूठा कथन हो, इस इरादे से कि ऐसी परिस्थिति, झूठी प्रविष्टि या झूठा कथन किसी न्यायिक कार्यवाही में, या किसी लोक सेवक के समक्ष विधि द्वारा की…
पूरा पढ़ेंधारा 193 - मिथ्या साक्ष्य के लिए दण्ड
मिथ्या साक्ष्य के लिए दण्ड जो कोई किसी न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में साशय मिथ्या साक्ष्य देगा, या किसी न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में उपयोग में लाए जाने के प्रयोजन से मिथ्या साक्ष्य गढ़ेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी…
पूरा पढ़ेंझूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने पर दंड।
(1) जो कोई जानबूझकर न्यायिक कार्यवाही के किसी भी चरण में झूठी गवाही देता है, या न्यायिक कार्यवाही के किसी भी चरण में उपयोग किए जाने के उद्देश्य से झूठी गवाही गढ़ता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और उस पर दस हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। (2) उपधारा (1)…
पूरा पढ़ेंधारा 220 - प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा जो यह जानता है कि वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, विचारण के लिए या परिरोध करने के लिए सुपुर्दगी
प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा जो यह जानता है कि वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, विचारण के लिए या परिरोध करने के लिए सुपुर्दगी जो कोई किसी ऐसे पद पर होते हुए, जिससे व्यक्तियों को विचारण या परिरोध के लिए सुपुर्द करने का, या व्यक्तियों को परिरोध में रखने का उसे वैध प्राधिकार हो किसी व्यक्ति को उस प्राधिकार के प्रयोग…
पूरा पढ़ेंधारा 258. प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा जो यह जानता है कि वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, विचारण के लिए या परिरोध करने के लिए सुपुर्दगी ।
258. जो कोई किसी ऐसे पद पर होते हुए, जिससे व्यक्तियों को विचारण या परिरोध के लिए सुपुर्द करने का, या व्यक्तियों को परिरोध में रखने का उसे वैध प्राधिकार हो किसी व्यक्ति को उस प्राधिकार के प्रयोग में यह जानते हुए भ्र्ष्टतापूर्वक या विद्वेषपूर्वक विचारण या परिरोध के लिए सुपुर्द करेगा या परिरोध में रखेगा कि ऐसा करने में…
पूरा पढ़ेंधारा 221 - पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप
पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप जो कोई ऐसा लोक सेवक होते हुए, जो किसी अपराध के लिए आरोपित या पकड़े जाने के दायित्व के अधीन किसी व्यक्ति को पकड़ने या परिरोध में रखने के लिए लोक सेवक के नाते वैध रूप से आबद्ध है, ऐसे व्यक्ति को पकड़ने का साशय लोप करेगा या ऐसे परिरोध में से ऐसे व्यक्ति का निकल भागना…
पूरा पढ़ेंधारा 259. पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का जानबूझकर लोप ।
259. कोई ऐसा लोक सेवक होते हुए, जो किसी अपराध के लिए आरोपित या पकड़े जाने के दायित्व के अधीन किसी व्यक्ति को पकड़ने या परिरोध में रखने के लिए सेवक के नाते वैध रूप से आबद्ध है, ऐसे व्यक्ति को पकड़ने का जानबूझकर लोप करता है या ऐसे परिरोध में से ऐसे व्यक्ति का निकल भागना जानबूझकर सहन करता है या ऐसे व्यक्ति के निकल भागने…
पूरा पढ़ेंधारा 222 - दंडादेश के अधीन या विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए व्यक्ति को पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप
दंडादेश के अधीन या विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए व्यक्ति को पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप जो कोई ऐसा लोक सेवक होते हुए, जो किसी अपराध के लिए न्यायालय के दंडादेश के अधीन या अभिरक्षा में रखे जाने के लिए विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए किसी व्यक्ति को पकड़ने या परिरोध में रखने के लिए ऐसे लोक सेवक के नाते…
पूरा पढ़ेंधारा 260. दंडादेश के अधीन या विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए व्यक्ति को पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का जानबूझकर लोप ।
260. जो कोई ऐसा लोक सेवक होते हुए, जो किसी अपराध के लिए न्यायालय के दंडादेश के अधीन या अभिक्षा में रखे जाने के लिए विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए किसी व्यक्ति को पकड़ने या परिरोध में रखने के लिए ऐसे लोक सेवक के नाते वैध रूप से आबद्ध है, ऐसे व्यक्ति को पकड़ने का जानबूझकर लोप करता है, या ऐसे परिरोध में से जानबूझकर ऐसे…
पूरा पढ़ेंधारा 223 - लोक सेवक द्वारा उपेक्षा से परिरोध या अभिरक्षा में से निकल भागना सहन करना
लोक सेवक द्वारा उपेक्षा से परिरोध या अभिरक्षा में से निकल भागना सहन करना जो कोई ऐसा लोक सेवक होते हुए, जो अपराध के लिए आरोपित या दोषसिद्ध या, अभिरक्षा में रखे जाने के लिए विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए किसी व्यक्ति को परिरोध में रखने के लिए ऐसे लोक सेवक के नाते वैध रूप से आबद्ध हो, ऐसे व्यक्ति का परिरोध में से निकल भागना…
पूरा पढ़ेंधारा 261. लोक सेवक द्वारा उपेक्षा से परिरोध या अभिरक्षा में से निकल भागना सहन करना ।
261. जो कोई ऐसा लोक सेवक होते हुए, जो अपराध के लिए आरोपित या दोषसिंद्ध या अभिरक्षा में रखे जाने के लिए विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए किसी व्यक्ति को परिरोध में रखने के लिए ऐसे लोक सेवक के नाते वैध रूप से आबद्ध हो, ऐसे व्यक्ति का परिरोध में से निकल भागना उपेक्षा से सहन करता है, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की…
पूरा पढ़ेंधारा 224 - किसी व्यक्ति द्वारा विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा
किसी व्यक्ति द्वारा विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा जो कोई किसी ऐसे अपराध के लिए, जिसका उस पर आरोप हो, या जिसके लिए वह दोषसिद्ध किया गया हो, विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने में साशय प्रतिरोध करेगा या अवैध बाधा डालेगा, या किसी अभिरक्षा से, जिसमें वह किसी ऐसे अपराध के लिए विधिपूर्वक निरुद्ध हो, निकल…
पूरा पढ़ेंधारा 262. किसी व्यक्ति द्वारा विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने मेँ प्रतिरोध या बाधा ।
262. जो कोई किसी ऐसे अपराध के लिए, जिसका उस पर आरोप हो, या जिसके लिए वह दोषसिद्ध किया गया है, विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने में जानबूझकर प्रतिरोध करता है या अवैध बाधा डालता है, या किसी अभिरक्षा से, जिसमें वह किसी ऐसे अपराध के लिए विधिपूर्वक निरुद्ध हो, निकल भागता है, या निकल भागने का प्रयत्न करता है, वह दोनों में से…
पूरा पढ़ेंधारा 225 - किसी अन्य व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा
किसी अन्य व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा जो कोई किसी अपराध के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में साशय प्रतिरोध करेगा या अवैध बाधा डालेगा, या किसी दूसरे व्यक्ति को किसी ऐसी अभिरक्षा से, जिसमें वह व्यक्ति किसी अपराध के लिए विधिपूर्वक निरुद्ध हो, साशय छुड़ाएगा या छुड़ाने का…
पूरा पढ़ेंधारा 263. किसी अन्य व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा ।
263. जो कोई किसी अपराध के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में जानवूझकर प्रतिरोध करता है या अवैध बाधा डालता है, या किसी दूसरे व्यक्ति को किसी ऐसी अभिरक्षा से, जिसमें वह व्यक्ति किसी अपराध के लिए विधिपूर्वक निरुद्ध हो, जानबूझकर छुड़ावाता है या छुड़ाने का प्रयत्न करता है,- (क) वह दोनों में से किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 225A - उन दशाओं में जिनके लिए अन्यथा उपबंध नहीं है लोक सेवक द्वारा पकड़ने का लोप या निकल भागना सहन करना
उन दशाओं में जिनके लिए अन्यथा उपबंध नहीं है लोक सेवक द्वारा पकड़ने का लोप या निकल भागना सहन करना जो कोई ऐसा लोक सेवक होते हुए जो किसी व्यक्ति को पकड़ने या परिरोध में रखने के लिए लोक सेवक के नाते वैध रूप से आबद्ध हो उस व्यक्ति को किसी ऐसी दशा में, जिसके लिए धारा 221, धारा 222 या धारा 223 अथवा किसी अन्य तत्समय प्रवॄत्त…
पूरा पढ़ेंधारा 264. उन दशाओं में, जिनके लिए अन्यथा उपबंध नहीं है, लोक सेवक द्वारा पकड़ने का लोप या निकल भागना सहन करना ।
264. जो कोई ऐसा लोक सेवक होते हुए जो किसी व्यक्ति को पकड़ने या परिरोध में रखने के लिए लोक सेवक के नाते वैध रूप से आबद्ध हो उस व्यक्ति को किसी ऐसी दशा में, जिसके लिए धारा 259, धारा 260 या धारा 261 या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में कोई उपबंध नहीं है, पकड़ने का लोप करेगा या परिरोध में से निकल भागना सहन करेगा,-- (क)…
पूरा पढ़ेंधारा 225B - अन्यथा अनुपबंधित दशाओं में विधिपूर्वक पकड़ने में प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना
अन्यथा अनुपबंधित दशाओं में विधिपूर्वक पकड़ने में प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना जो कोई स्वयं अपने या किसी अन्य व्यक्ति के विधिपूर्वक पकड़े जाने में साशय कोई प्रतिरोध करेगा या अवैध बाधा डालेगा या किसी अभिरक्षा में से, जिसमें वह विधिपूर्वक निरुद्ध हो, निकल भागेगा या निकल भागने का प्रयत्न करेगा या किसी अन्य…
पूरा पढ़ेंधारा 265. अन्यथा अनुपबंधित दशाओँ में विधिपूर्वक पकड़ने मैं प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना ।
265. जो कोई स्वयं अपने या किसी अन्य व्यक्ति के विधिपूर्वक पकड़े जाने में जानबूझकर कोई प्रतिरोध करता है या अवैध बाधा डालता है या किसी अभिरक्षा में से, जिसमें वह विधिपूर्वक निरदूध हो, निकत्र भागता है या निकल भागने का प्रयत्न करता है या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी अभिरक्षा में से, जिसमें वह व्यक्ति विधिपूर्वक निरुदृध हो,…
पूरा पढ़ेंधारा 226 - निर्वासन से विधिविरुद्ध वापसी
निर्वासन से विधिविरुद्ध वापसी दंड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 1955 (1955 का 26) की धारा 117 और अनुसूची द्वारा निरसित ।
पूरा पढ़ें—
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धारा 227 - दंड के परिहार की शर्त का अतिक्रमण
दंड के परिहार की शर्त का अतिक्रमण जो कोई दंड का सशर्त परिहार प्रतिगॄहीत कर लेने पर किसी शर्त का जिस पर ऐसा परिहार दिया गया था, जानते हुए अतिक्रमण करेगा, यदि वह उस दंड का, जिसके लिए वह मूलतः दंडादिष्ट किया गया था, कोई भाग पहले ही न भोग चुका हो, तो वह उस दंड से और यदि वह उस दंड का कोई भाग भोग चुका हो, तो वह उस दंड के…
पूरा पढ़ेंधारा 266. दंड के परिहार की शर्त का अतिक्रमण ।
266. जो कोई दंड का सशर्त परिहार स्वीकृत कर लेने पर किसी शर्त का जिस पर ऐसा परिहार दिया गया था, जानते हुए अतिक्रमण करता है, यदि वह उस दंड का, जिसके लिए वह मूलतः दंडादिष्ट किया गया था, कोई भाग पहले ही न भोग चुका हो, तो वह उस दंड से और यदि वह उस दंड का कोई भाग भोग चुका हो, तो वह उस दंड कै उतने भाग से, जितने को वह पहले ही…
पूरा पढ़ेंधारा 228 - न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए लोक सेवक का साशय अपमान या उसके कार्य में विघ्न
न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए लोक सेवक का साशय अपमान या उसके कार्य में विघ्न जो कोई किसी लोक सेवक का उस समय, जब कि ऐसा लोक सेवक न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में बैठा हुआ हो, साशय कोई अपमान करेगा या उसके कार्य में कोई विध्न डालेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार…
पूरा पढ़ेंधारा 267. न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए लोक सेवक का जानबूझकर अपमान या उसके कार्य में विघ्न ।
267. जो कोई किसी लोक सेवक का उस समय, जबकि ऐसा लोक सेवक न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में बैठा हुआ हो, जानबूझकर कोई अपमान करेगा या उसके कार्य कोई विघ्न डालेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
पूरा पढ़ेंधारा 228A - कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण
कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण (1) जो कोई किसी नाम या अन्य बात को, जिससे किसी ऐसे व्यक्ति की (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् पीड़ित व्यक्ति कहा गया है) पहचान हो सकती है, जिसके विरुद्ध धारा 376, धारा 376क, धारा 376ख, धारा 376ग या धारा 376घ के अधीन किसी अपराध का किया जाना अभिकथित है या किया गया…
पूरा पढ़ेंकुछ अपराधों के पीड़ितों की पहचान का खुलासा करना, आदि।
(1) जो कोई भी किसी ऐसे व्यक्ति का नाम या कोई ऐसी सामग्री छापता या प्रकाशित करता है जिससे उस व्यक्ति की पहचान ज्ञात हो सके जिसके विरुद्ध धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 या धारा 67 या धारा 68 या धारा 69 या धारा 70 या धारा 71 के अंतर्गत अपराध किया गया हो या पाया गया हो (जिसे इस धारा में आगे पीड़ित कहा गया है), उसे किसी भी…
पूरा पढ़ेंधारा 228A - कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण
कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण (1) जो कोई किसी नाम या अन्य बात को, जिससे किसी ऐसे व्यक्ति की (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् पीड़ित व्यक्ति कहा गया है) पहचान हो सकती है, जिसके विरुद्ध धारा 376, धारा 376क, धारा 376ख, धारा 376ग या धारा 376घ के अधीन किसी अपराध का किया जाना अभिकथित है या किया गया…
पूरा पढ़ेंअदालती कार्यवाही से संबंधित किसी भी सामग्री को बिना अनुमति के छापना या प्रकाशित करना।
धारा 72 में निर्दिष्ट अपराध के संबंध में न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही से संबंधित कोई भी सामग्री, न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना, मुद्रित या प्रकाशित करने वाले किसी भी व्यक्ति को दो वर्ष तक की कारावास की सजा दी जाएगी और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। स्पष्टीकरण .---किसी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय…
पूरा पढ़ेंधारा 229 - जूरी सदस्य या असेसर का प्रतिरूपण
जूरी सदस्य या असेसर का प्रतिरूपण जो कोई किसी मामले में प्रतिरूपण द्वारा या अन्यथा, अपने को यह जानते हुए जूरी सदस्य या असेसर के रूप में तालिकांकित, पेनलित या गॄहीतशपथ साशय कराएगा या होने देना जानते हुए सहन करेगा कि वह इस प्रकार तालिकांकित, पेनलित या गॄहीतशपथ होने का विधि द्वारा हकदार नहीं है या यह जानते हुए कि वह इस…
पूरा पढ़ेंधारा 268. असेसर का प्रतिरूपण ।
268. जो कोई किसी मामले में प्रतिरूपण द्वारा या अन्यथा, अपने को यह जानते हुए असैसर के रूप में तालिकांकित, पेनलित या गृहीतशपथ जानबूझकर कराएगा या होने देना जानते हुए सहन करेगा कि वह इस प्रकार तालिकांकित, पेनलित या गृहीतशपथ होने का विधि द्वारा हकदार नहीं है या यह जानते हुए कि वह इस प्रकार तालिकांकित, पेनलित या गृहीतशपथ…
पूरा पढ़ेंधारा 229A - जमानत या बंधपत्र पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में हाजिर होने में असफलता
जमानत या बंधपत्र पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में हाजिर होने में असफलता जो कोई, किसी अपराध से आरोपित किए जाने पर और जमानत पर या प्रतिभुओं के बिना बंधपत्र पर छोड़ दिए जाने पर, जमानत या बंधपत्र के निबंधनों के अनुसार न्यायालय में हाजिर होने में पर्याप्त कारण के बिना (जिसे साबित करने का भार उस पर होगा) असफल रहेगा,…
पूरा पढ़ेंधारा 269. जमानतपत्र या बंधपत्र पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में हाजिर होने में असफलता ।
269. जो कोई, किसी अपराध से आरोपित किए जाने पर और जमानतपत्र पर या अपने बंधपत्र पर छोड़ दिए जाने पर, जमानत या बंधपत्र के निबंधनों के अनुसार न्यायालय में पर्याप्त कारणों के बिना (जो साबित करने का भार उस पर होगा) हाजिर होने में असफल रहता है वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या…
पूरा पढ़ें- IPC §22BNS §2(21)
चल संपत्ति।
परिभाषाएँ।
- IPC §84BNS §22
धारा 84 - विकॄतचित व्यक्ति का कार्य
मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति का कृत्य।
- IPC §185BNS §220
धारा 185 - लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति का अवैध क्रय या उसके लिए अवैध बोली लगाना
लोक सेवक के अधिकार से बिक्री के लिए पेश की गई संपत्ति की अवैध खरीद या बोली लगाना।
- IPC §186BNS §221
धारा 186 - लोक सेवक के लोक कॄत्यों के निर्वहन में बाधा डालना
लोक सेवक को उनके सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना।
- IPC §187BNS §222
धारा 187 - लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जबकि सहायता देने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो
कानून द्वारा सहायता प्रदान करने के लिए बाध्य होने पर लोक सेवक की सहायता करने में चूक।
- IPC §188BNS §223
धारा 188 - लोक सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा
लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी किए गए आदेश की अवज्ञा करना।
- IPC §189BNS §224
धारा 189 - लोक सेवक को क्षति करने की धमकी
लोक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकी।
- IPC §190BNS §225
धारा 190 - लोक सेवक से संरक्षा के लिए आवेदन करने से विरत रहने के लिए किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिए क्षति की धमकी
किसी व्यक्ति को लोक सेवक से सुरक्षा प्राप्त करने के लिए आवेदन करने से रोकने हेतु चोट पहुँचाने की धमकी देना।
- IPC §191BNS §227
झूठी गवाही देना।
- IPC §192BNS §228
धारा 192 - मिथ्या साक्ष्य गढ़ना
झूठे सबूत गढ़ना।
- IPC §193BNS §229
धारा 193 - मिथ्या साक्ष्य के लिए दण्ड
झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने पर दंड।
- IPC §220BNS §258
धारा 220 - प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा जो यह जानता है कि वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, विचारण के लिए या परिरोध करने के लिए सुपुर्दगी
धारा 258. प्राधिकार वाले व्यक्ति द्वारा जो यह जानता है कि वह विधि के प्रतिकूल कार्य कर रहा है, विचारण के लिए या परिरोध करने के लिए सुपुर्दगी ।
- IPC §221BNS §259
धारा 221 - पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप
धारा 259. पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का जानबूझकर लोप ।
- IPC §222BNS §260
धारा 222 - दंडादेश के अधीन या विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए व्यक्ति को पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप
धारा 260. दंडादेश के अधीन या विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए व्यक्ति को पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का जानबूझकर लोप ।
- IPC §223BNS §261
धारा 223 - लोक सेवक द्वारा उपेक्षा से परिरोध या अभिरक्षा में से निकल भागना सहन करना
धारा 261. लोक सेवक द्वारा उपेक्षा से परिरोध या अभिरक्षा में से निकल भागना सहन करना ।
- IPC §224BNS §262
धारा 224 - किसी व्यक्ति द्वारा विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा
धारा 262. किसी व्यक्ति द्वारा विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने मेँ प्रतिरोध या बाधा ।
- IPC §225BNS §263
धारा 225 - किसी अन्य व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा
धारा 263. किसी अन्य व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा ।
- IPC §225ABNS §264
धारा 225A - उन दशाओं में जिनके लिए अन्यथा उपबंध नहीं है लोक सेवक द्वारा पकड़ने का लोप या निकल भागना सहन करना
धारा 264. उन दशाओं में, जिनके लिए अन्यथा उपबंध नहीं है, लोक सेवक द्वारा पकड़ने का लोप या निकल भागना सहन करना ।
- IPC §225BBNS §265
धारा 225B - अन्यथा अनुपबंधित दशाओं में विधिपूर्वक पकड़ने में प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना
धारा 265. अन्यथा अनुपबंधित दशाओँ में विधिपूर्वक पकड़ने मैं प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना ।
- IPC §226BNS §-
धारा 226 - निर्वासन से विधिविरुद्ध वापसी
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IPC §226BNS §- - IPC §227BNS §266
धारा 227 - दंड के परिहार की शर्त का अतिक्रमण
धारा 266. दंड के परिहार की शर्त का अतिक्रमण ।
- IPC §228BNS §267
धारा 228 - न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए लोक सेवक का साशय अपमान या उसके कार्य में विघ्न
धारा 267. न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए लोक सेवक का जानबूझकर अपमान या उसके कार्य में विघ्न ।
- IPC §228ABNS §72
धारा 228A - कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण
कुछ अपराधों के पीड़ितों की पहचान का खुलासा करना, आदि।
- IPC §228A(3)BNS §73
धारा 228A - कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण
अदालती कार्यवाही से संबंधित किसी भी सामग्री को बिना अनुमति के छापना या प्रकाशित करना।
- IPC §229BNS §268
धारा 229 - जूरी सदस्य या असेसर का प्रतिरूपण
धारा 268. असेसर का प्रतिरूपण ।
- IPC §229ABNS §269
धारा 229A - जमानत या बंधपत्र पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में हाजिर होने में असफलता
धारा 269. जमानतपत्र या बंधपत्र पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में हाजिर होने में असफलता ।
