आईपीसी → बीएनएस

24 प्रविष्टियाँ

  • IPC §21BNS §2(28)

    लोक सेवक''।

    परिभाषाएँ।

  • IPC §83BNS §21

    धारा 83 - सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य

    सात से बारह वर्ष की आयु के अपरिपक्व बच्चे द्वारा किया गया कृत्य।

  • IPC §175BNS §210

    धारा 175 - दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने का लोप

    किसी लोक सेवक को दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में कानूनी रूप से बाध्य व्यक्ति द्वारा चूक करना।

  • IPC §176BNS §211

    धारा 176 - सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप

    किसी लोक सेवक को सूचना या सूचना देने में कानूनी रूप से बाध्य व्यक्ति द्वारा चूक करना।

  • IPC §177BNS §212

    धारा 177 - मिथ्या इत्तिला देना

    गलत जानकारी देना।

  • IPC §178BNS §213

    धारा 178 - शपथ या प्रतिज्ञान से इंकार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक् रूप से अपेक्षित किया जाए

    लोक सेवक द्वारा विधिवत रूप से शपथ या प्रतिज्ञा लेने के लिए कहे जाने पर शपथ या प्रतिज्ञा लेने से इनकार करना।

  • IPC §179BNS §214

    धारा 179 - प्रश्न करने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक का उत्तर देने से इंकार करना

    प्रश्न पूछने के लिए अधिकृत लोक सेवक के प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार करना।

  • IPC §180BNS §215

    धारा 180 - कथन पर हस्ताक्षर करने से इंकार

    बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना।

  • IPC §181BNS §216

    धारा 181 - शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक के, या व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर मिथ्या कथन

    लोक सेवक या शपथ दिलाने के लिए अधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर झूठा बयान देना।

  • IPC §182BNS §217

    धारा 182 - इस आशय से मिथ्या इत्तिला देना कि लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति की क्षति के लिए करे

    किसी लोक सेवक को उसकी वैध शक्ति का दुरुपयोग करके किसी अन्य व्यक्ति को हानि पहुंचाने के इरादे से झूठी सूचना देना।

  • IPC §183BNS §218

    धारा 183 - लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा संपत्ति लिए जाने का प्रतिरोध

    किसी लोक सेवक के वैध अधिकार द्वारा संपत्ति जब्त करने का प्रतिरोध।

  • IPC §184BNS §219

    धारा 184 - लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति के विक्रय में बाधा उपस्थित करना

    लोक सेवक के अधिकार द्वारा बिक्री के लिए प्रस्तुत संपत्ति की बिक्री में बाधा डालना।

  • IPC §210BNS §247

    धारा 210 - ऐसी राशि के लिए जो शोध्य नहीं है कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना

    धारा 247. ऐसी राशि के लिए जो शोध्य नहीं है कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना ।

  • IPC §211BNS §248

    धारा 211 - क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप

    धारा 248. क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप ।

  • IPC §212BNS §249

    धारा 212 - अपराधी को संश्रय देना

    धारा 249. अपराधी को संश्रय देना ।

  • IPC §213BNS §250

    धारा 213 - अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना

    धारा 250. अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना ।

  • IPC §214BNS §251

    धारा 214 - अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन

    धारा 251. अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन ।

  • IPC §215BNS §252

    धारा 215 - चोरी की संपत्ति इत्यादि के वापस लेने में सहायता करने के लिए उपहार लेना

    धारा 252. चोरी की संपत्ति इत्यादि के वापस लेने में सहायता करने के लिए उपहार लेना ।

  • IPC §216BNS §253

    धारा 216 - ऐसे अपराधी को संश्रय देना, जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है

    धारा 253. ऐसे अपराधी को संश्रय देना, जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है।

  • IPC §216ABNS §254

    धारा 216A - लुटेरों या डाकुओं को संश्रय देने के लिए शास्ति

    धारा 254. लुटेरो या डाकुओ को संश्रय देने के लिए शास्ति ।

  • IPC §216BBNS §-

    धारा 216B - धारा 212, धारा 216 और धारा 216क में “संश्रय” की परिभाषा

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    IPC §216BBNS §-
  • IPC §217BNS §255

    धारा 217 - लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा

    धारा 255. लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा ।

  • IPC §218BNS §256

    धारा 218 - किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना

    धारा 256. किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना ।

  • IPC §219BNS §257

    धारा 219 - न्यायिक कार्यवाही में विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट आदि का लोक सेवक द्वारा भ्रष्टतापूर्वक किया जाना

    धारा 257. न्यायिक कार्यवाही में विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट आदि का लोक सेवक द्वारा अष्टतापूर्वक किया जाना ।