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24 प्रविष्टियाँ
लोक सेवक''।
लोक सेवक शब्द से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो निम्नलिखित विवरणों में से किसी एक के अंतर्गत आता है, अर्थात्: 1 * * * * * द्वितीय . सैन्य बलों में प्रत्येक कमीशन प्राप्त अधिकारी, 2 [नौसेना या वायु] बल 3 [ 4 *** भारत का]; 5 [ तीसरा . प्रत्येक न्यायाधीश, जिसमें कानून द्वारा किसी भी न्यायिक कार्य को स्वयं या किसी निकाय के…
पूरा पढ़ेंपरिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 83 - सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य
सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य कोई बात अपराध नहीं है, जो सात वर्ष से ऊपर और बारह वर्ष से कम आयु के ऐसे शिशु द्वारा की जाती है जिसकी समझ इतनी परिपक्व नहीं हुई है कि वह उस अवसर पर अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का निर्णय कर सके ।
पूरा पढ़ेंसात से बारह वर्ष की आयु के अपरिपक्व बच्चे द्वारा किया गया कृत्य।
सात वर्ष से अधिक और बारह वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे द्वारा किया गया कोई भी कार्य अपराध नहीं है, यदि उस बच्चे में अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का आकलन करने के लिए पर्याप्त परिपक्वता नहीं आई है।
पूरा पढ़ेंधारा 175 - दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने का लोप
दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने का लोप जो कोई किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते किसी दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख को पेश करने या परिदत्त करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उसको इस प्रकार पेश करने या परिदत्त…
पूरा पढ़ेंकिसी लोक सेवक को दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में कानूनी रूप से बाध्य व्यक्ति द्वारा चूक करना।
जो कोई भी, किसी लोक सेवक को कोई दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख प्रस्तुत करने या सौंपने के लिए विधिवत बाध्य होते हुए, जानबूझकर उसे प्रस्तुत करने या सौंपने में चूक करता है,— (क) उसे एक महीने तक की साधारण कारावास की सजा, या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा, या दोनों से दंडित किया जाएगा; (ख) और जहां दस्तावेज या…
पूरा पढ़ेंधारा 176 - सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप
सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप जो कोई किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते किसी विषय पर कोई सूचना देने या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, विधि द्वारा अपेक्षित प्रकार से और समय पर ऐसी सूचना या इत्तिला देने का साशय लोप करेगा, वह सादा…
पूरा पढ़ेंकिसी लोक सेवक को सूचना या सूचना देने में कानूनी रूप से बाध्य व्यक्ति द्वारा चूक करना।
जो कोई भी, किसी लोक सेवक को किसी विषय पर कोई सूचना देने या जानकारी प्रदान करने के लिए विधिवत बाध्य होते हुए, जानबूझकर कानून द्वारा अपेक्षित तरीके से और समय पर ऐसी सूचना देने या ऐसी जानकारी प्रदान करने में चूक करता है,—। (क) उसे एक महीने तक के साधारण कारावास या पाँच हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया…
पूरा पढ़ेंधारा 177 - मिथ्या इत्तिला देना
मिथ्या इत्तिला देना जो कोई किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते, किसी विषय पर इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उस विषय पर ऐसी इत्तिला सच्ची के रूप में देगा, जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके मिथ्या होने का विश्वास करने का कारण रखता है, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या…
पूरा पढ़ेंगलत जानकारी देना।
जो कोई भी, किसी लोक सेवक को किसी विषय पर सूचना प्रदान करने के लिए विधिवत बाध्य होते हुए, उस विषय पर ऐसी सूचना को सत्य बताकर प्रस्तुत करता है जिसे वह जानता है या जिसके असत्य होने का उसे विश्वास करने का कारण है,— (क) उसे छह महीने तक की साधारण कारावास की सजा, या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा, या दोनों से दंडित…
पूरा पढ़ेंधारा 178 - शपथ या प्रतिज्ञान से इंकार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक् रूप से अपेक्षित किया जाए
शपथ या प्रतिज्ञान से इंकार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक् रूप से अपेक्षित किया जाए जो कोई सत्य कथन करने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान द्वारा अपने आप को आबद्ध करने से इंकार करेगा, जबकि उससे अपने को इस प्रकार आबद्ध करने की अपेक्षा ऐसे लोक सेवक द्वारा की जाए जो यह अपेक्षा करने के लिए वैध रूप से सक्षम हो…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक द्वारा विधिवत रूप से शपथ या प्रतिज्ञा लेने के लिए कहे जाने पर शपथ या प्रतिज्ञा लेने से इनकार करना।
जो कोई भी किसी लोक सेवक द्वारा सत्य कथन के लिए शपथ या प्रतिज्ञा लेने से इनकार करता है, जब लोक सेवक उसे ऐसा करने के लिए कानूनी रूप से सक्षम हो, तो उसे छह महीने तक की साधारण कारावास या पांच हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 179 - प्रश्न करने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक का उत्तर देने से इंकार करना
प्रश्न करने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक का उत्तर देने से इंकार करना जो कोई किसी लोक सेवक से किसी विषय पर सत्य कथन करने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, ऐसे लोक सेवक की वैध शक्तियों के प्रयोग में उस लोक सेवक द्वारा उस विषय के बारे में उससे पूछे गए किसी प्रश्न का उत्तर देने से इंकार करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि…
पूरा पढ़ेंप्रश्न पूछने के लिए अधिकृत लोक सेवक के प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार करना।
जो कोई भी लोक सेवक को किसी विषय पर सत्य बताने के लिए विधिवत बाध्य होते हुए भी, उस लोक सेवक द्वारा अपनी विधिवत शक्तियों का प्रयोग करते हुए उस विषय से संबंधित पूछे गए किसी प्रश्न का उत्तर देने से इनकार करता है, उसे छह महीने तक के साधारण कारावास या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 180 - कथन पर हस्ताक्षर करने से इंकार
कथन पर हस्ताक्षर करने से इंकार जो कोई अपने द्वारा किए गए किसी कथन पर हस्ताक्षर करने को ऐसे लोक सेवक द्वारा अपेक्षा किए जाने पर, जो उससे यह अपेक्षा करने के लिए वैध रूप से सक्षम हो कि वह उस कथन पर हस्ताक्षर करे, उस कथन पर हस्ताक्षर करने से इंकार करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने…
पूरा पढ़ेंबयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना।
जो कोई भी किसी लोक सेवक द्वारा, जो कानूनी रूप से उस कथन पर हस्ताक्षर करने के लिए सक्षम है, ऐसा करने के लिए कहे जाने पर, अपने द्वारा दिए गए किसी भी कथन पर हस्ताक्षर करने से इनकार करता है, तो उसे तीन महीने तक के साधारण कारावास या तीन हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 181 - शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक के, या व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर मिथ्या कथन
शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक के, या व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर मिथ्या कथन जो कोई किसी लोक सेवक या किसी अन्य व्यक्ति से, जो ऐसे शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान देने के लिए विधि द्वारा प्राधिकॄत हो, किसी विषय पर सत्य कथन करने के लिए शपथ या प्रतिज्ञान द्वारा वैध रूप से आबद्ध होते हुए ऐसे…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक या शपथ दिलाने के लिए अधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर झूठा बयान देना।
जो कोई भी, किसी लोक सेवक या विधि द्वारा ऐसे शपथ या प्रतिज्ञा दिलाने के लिए अधिकृत अन्य व्यक्ति के समक्ष किसी विषय पर सत्य कथन करने के लिए विधिवत रूप से शपथ या प्रतिज्ञा से बाध्य होते हुए, उस लोक सेवक या उपर्युक्त अन्य व्यक्ति के समक्ष उस विषय पर कोई ऐसा कथन करता है जो असत्य है, और जिसे वह या तो असत्य जानता है या मानता…
पूरा पढ़ेंधारा 182 - इस आशय से मिथ्या इत्तिला देना कि लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति की क्षति के लिए करे
इस आशय से मिथ्या इत्तिला देना कि लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति की क्षति के लिए करे जो कोई किसी लोक सेवक को कोई ऐसी इत्तिला देगा, जिसका मिथ्या होना वह जानता है या विश्वास करता है, इस आशय से कि तद्द्वारा वह ऐसे लोक सेवक से यह कराए, या यह जानते हुए कि तद्द्वारा वह ऐसे लोक सेवक से यह कराएगा यह…
पूरा पढ़ेंकिसी लोक सेवक को उसकी वैध शक्ति का दुरुपयोग करके किसी अन्य व्यक्ति को हानि पहुंचाने के इरादे से झूठी सूचना देना।
जो कोई भी किसी लोक सेवक को ऐसी कोई जानकारी देता है जिसे वह जानता हो या मानता हो कि वह झूठी है, और ऐसा करने का उसका इरादा हो, या यह जानते हुए कि ऐसा करने से ऐसे लोक सेवक को झूठी सूचना मिलने की संभावना है— (क) ऐसा कोई कार्य करना या न करना जो ऐसे लोक सेवक को नहीं करना चाहिए था या नहीं करना चाहिए था यदि उसे उस जानकारी से…
पूरा पढ़ेंधारा 183 - लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा संपत्ति लिए जाने का प्रतिरोध
लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा संपत्ति लिए जाने का प्रतिरोध जो कोई किसी लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा किसी संपत्ति के ले लिए जाने का प्रतिरोध यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए करेगा कि वह ऐसा लोक सेवक है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या…
पूरा पढ़ेंकिसी लोक सेवक के वैध अधिकार द्वारा संपत्ति जब्त करने का प्रतिरोध।
जो कोई भी किसी लोक सेवक के वैध अधिकार द्वारा किसी संपत्ति को लेने का विरोध करता है, यह जानते हुए या यह मानने का कारण रखते हुए कि वह लोक सेवक है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से छह महीने तक की अवधि के लिए, या दस हजार रुपये तक के जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 184 - लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति के विक्रय में बाधा उपस्थित करना
लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति के विक्रय में बाधा उपस्थित करना जो कोई ऐसी किसी संपत्ति के विक्रय में, जो ऐसे लोक सेवक के नाते किसी लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई हो, साशय बाधा डालेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक मास…
पूरा पढ़ेंलोक सेवक के अधिकार द्वारा बिक्री के लिए प्रस्तुत संपत्ति की बिक्री में बाधा डालना।
जो कोई भी जानबूझकर किसी लोक सेवक के वैध अधिकार द्वारा बिक्री के लिए प्रस्तावित संपत्ति की बिक्री में बाधा डालता है, उसे एक महीने तक की अवधि के लिए किसी भी प्रकार के कारावास या पांच हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूरा पढ़ेंधारा 210 - ऐसी राशि के लिए जो शोध्य नहीं है कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना
ऐसी राशि के लिए जो शोध्य नहीं है कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना जो कोई किसी व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी राशि के लिए, जो शोध्य न हो, या जो शोध्य राशि से अधिक हो, या किसी संपत्ति या संपत्ति में के हित के लिए, जिसका वह हकदार न हो, डिक्री या आदेश कपटपूर्वक अभिप्राप्त कर लेगा या किसी डिक्री या आदेश को, उसके तुष्ट कर दिए जाने…
पूरा पढ़ेंधारा 247. ऐसी राशि के लिए जो शोध्य नहीं है कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना ।
247. जो कोई किसी व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी राशि के लिए, जो शोध्य न हो, या जो शोध्य राशि से अधिक हो, या किसी संपत्ति या संपत्ति में के हित के लिए, जिसका वह हकदार न हो, डिक्री या आदेश कपटपूर्वक अभिप्राप्त कर लेगा या किसी डिक्री या आदेश को, उसके तुष्ट कर दिए जाने के पश्चात् या ऐसी बात के लिए, जिसके विषय में उस डिक्री या…
पूरा पढ़ेंधारा 211 - क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप
क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप जो कोई किसी व्यक्ति को यह जानते हुए कि उस व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही या आरोप के लिए कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है क्षति कारित करने के आशय से उस व्यक्ति के विरुद्ध कोई दांडिक कार्यवाही संस्थित करेगा या करवाएगा या उस व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगाएगा कि उसने अपराध…
पूरा पढ़ेंधारा 248. क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप ।
248. जो कोई किसी व्यक्ति को यह जानते हुए कि उस व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही या आरोप के लिए कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है क्षति कारित करने कै आशय से उस व्यक्ति के विरूद्ध कोई दांडिक कार्यवाही संस्थित करेगा या करवाएगा या उस व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगाएगा कि उसने अपराध किया है-- (क) वह दोनों में से किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 212 - अपराधी को संश्रय देना
अपराधी को संश्रय देना जबकि कोई अपराध किया जा चुका हो, तब जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके बारे में वह जानता हो या विश्वास करने का कारण रखता हो कि वह अपराधी है, वैध दंड से प्रतिच्छादित करने के आशय से संश्रय देगा या छिपाएगा ; यदि अपराध मॄत्यु से दंडनीय हो - यदि वह अपराध मॄत्यु से दंडनीय हो तो वह दोनों में से किसी भांति…
पूरा पढ़ेंधारा 249. अपराधी को संश्रय देना ।
249. जब कोई अपराध किया जा चुका हो, तब जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके बारे में वह जानता हो या विश्वास करने का कारण रखता हो कि वह अपराधी है, वैध दंड से प्रतिच्छादित करने के आशय से संश्रय देगा या छिपाएगा-- (क) यदि वह अपराध मृत्यु से दंडनीय हो तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो…
पूरा पढ़ेंधारा 213 - अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना
अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना जो कोई अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई परितोषण या अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए किसी संपत्ति का प्रत्यास्थापन, किसी अपराध के छिपाने के लिए या किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए वैध दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए, या किसी व्यक्ति के विरुद्ध वैध दंड दिलाने…
पूरा पढ़ेंधारा 250. अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना ।
250. जो कोई अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई परितोषण या अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए किसी संपति का प्रत्यास्थापन, किसी अपराध के छिपाने के लिए या किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए वैध दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए, या किसी व्यक्ति के विरुद्ध वैध दंड दिलाने के प्रयोजन से उसके विरुद्ध की जाने वाली कार्यवाही न…
पूरा पढ़ेंधारा 214 - अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन
अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन जो कोई किसी व्यक्ति को कोई अपराध उस व्यक्ति द्वारा छिपाए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए वैध दंड से प्रतिच्छादित किए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को वैध दंड दिलाने के प्रयोजन से…
पूरा पढ़ेंधारा 251. अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन ।
251. जो कोई, किसी व्यक्ति को कोई अपराध उस व्यक्ति द्वारा छिपाए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए वैध दंड से प्रतिच्छादित किए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को वैध दंड दिलाने के प्रयोजन से उसके विरुद्ध की जाने वाली कार्यवाही न की जाने के लिए प्रतिफलस्वरूप कोई परितोषण देगा…
पूरा पढ़ेंधारा 215 - चोरी की संपत्ति इत्यादि के वापस लेने में सहायता करने के लिए उपहार लेना
चोरी की संपत्ति इत्यादि के वापस लेने में सहायता करने के लिए उपहार लेना जो कोई किसी व्यक्ति को कोई अपराध उस व्यक्ति द्वारा छिपाए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए वैध दंड से प्रतिच्छादित किए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को वैध दंड दिलाने के प्रयोजन से उसके विरुद्ध की…
पूरा पढ़ेंधारा 252. चोरी की संपत्ति इत्यादि के वापस लेने में सहायता करने के लिए उपहार लेना ।
252. जो कोई किसी व्यक्ति की किसी ऐसी जंगम संपत्ति के वापस करा लेने में, जिससे इस संहिता के अधीन दंडनीय किसी अपराध द्वारा वह व्यक्ति वंचित कर दिया गया हों, सहायता करने कै बहाने या सहायता करने की बाबत कोई परितोषण लेगा या लेने का करार करेगा या लेने को सम्मत होगा, वह, जब तक कि अपनी शक्ति में के सब साधनों को अपराधी को…
पूरा पढ़ेंधारा 216 - ऐसे अपराधी को संश्रय देना, जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है
ऐसे अपराधी को संश्रय देना, जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है जब किसी अपराध के लिए दोषसिद्धि या आरोपित व्यक्ति उस अपराध के लिए वैध अभिरक्षा में होते हुए ऐसी अभिरक्षा से निकल भागे, अथवा जब कभी कोई लोक सेवक ऐसे लोक सेवक की विधिपूर्ण शक्तियों का प्रयोग करते हुए किसी अपराध के लिए किसी…
पूरा पढ़ेंधारा 253. ऐसे अपराधी को संश्रय देना, जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है।
253. जब किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध या आरोपित व्यक्ति उस अपराध के लिए वैध अभिरक्षा में होते हुए ऐसी अभिरक्षा से निकल आगे, या जब कभी कोई रोक सेवक ऐसे लौक सेवक की विधिपूर्ण शक्तियों का प्रयोग करते हुए किसी अपराध के लिए किसी व्यक्ति को पकड़ने का आदेश दे, तब जो कोई ऐसे निकल भागने को या पकड़े जाने के आदेश को जानते हुए, उस…
पूरा पढ़ेंधारा 216A - लुटेरों या डाकुओं को संश्रय देने के लिए शास्ति
लुटेरों या डाकुओं को संश्रय देने के लिए शास्ति जो कोई यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई व्यक्ति लूट या डकैती हाल ही में करने वाले हैं या हाल ही में लूट या डकैती कर चुके हैं, उनको या उनमें से किसी को, ऐसी लूट या डकैती का किया जाना सुकर बनाने के, या उनको या उनमें से किसी को दंड से प्रतिच्छादित करने के…
पूरा पढ़ेंधारा 254. लुटेरो या डाकुओ को संश्रय देने के लिए शास्ति ।
254. जो कोई यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई व्यक्ति लूट. या डकैती हाल ही में करने वाले हैं या हाल ही में लूट या डकैती कर चुके हैं, उनको या उनमें से किसी को, ऐसी लूट या डकैती का किया जाना सुकर बनाने के, या उनको या उनमें से किसी को दंड से प्रतिच्छादित करने के आशय से संश्रय देगा, वह कठिन कारावास से,…
पूरा पढ़ेंधारा 216B - धारा 212, धारा 216 और धारा 216क में “संश्रय” की परिभाषा
धारा 212, धारा 216 और धारा 216क में “संश्रय” की परिभाषा भारतीय दंड संहिता (संशोधन) अधिनियम, 1942 (1942 का 8) की धारा 3 द्वारा निरसित ।
पूरा पढ़ें—
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धारा 217 - लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा
लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा जो कोई लोक सेवक होते हुए विधि के ऐसे किसी निदेश की, जो उस संबंध में हो कि उससे ऐसे लोक सेवक के नाते किस ढंग का आचरण करना चाहिए, जानते हुए अवज्ञा किसी व्यक्ति को वैध दंड से बचाने के आशय से या संभाव्यतः तद्द्वारा…
पूरा पढ़ेंधारा 255. लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा ।
255. जो कोई लोक सेवक होते हुए विधि के ऐसे किसी निदेश की, जो उस संबंध में हो कि उससे ऐसे लोक सेवक के नाते किस दंग का आचरण करना चाहिए, जानते हुए अवज्ञा किसी व्यक्ति को वैध दंड से बचाने के आशय से या संभाव्यत: तदद्वारा बचाएगा यह जानते हुए या उतने दंड की अपेक्षा, जिससे वह दंडनीय है, तदद्वारा कम दंड दिलवाएगा यह संभाव्य…
पूरा पढ़ेंधारा 218 - किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना
किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना जो कोई लोक सेवक होते हुए और ऐसे लोक सेवक के नाते कोई अभिलेख या अन्य लेख तैयार करने का भार रखते हुए, उस अभिलेख या लेख की इस प्रकार से रचना, जिसे वह जानता है कि अशुद्ध है लोक को या किसी व्यक्ति को हानि या…
पूरा पढ़ेंधारा 256. किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना ।
256. जो कोई लोक सेवक होते हुए और ऐसे लोक सेवक के नाते कोई अभिलेख या अन्य लेख तैयार करने का भार रखते हुए, उस अभिलेख या लेख की इस प्रकार से रचना, जिसे वह जानता है कि अशुद्ध है लोक को या किसी व्यक्ति को हानि या क्षति कारित करने के आशय से या संभाव्यत: तदद्वारा कारित करेगा यह जानते हुए या किसी व्यक्ति को वैध दंड से बचाने…
पूरा पढ़ेंधारा 219 - न्यायिक कार्यवाही में विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट आदि का लोक सेवक द्वारा भ्रष्टतापूर्वक किया जाना
न्यायिक कार्यवाही में विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट आदि का लोक सेवक द्वारा भ्रष्टतापूर्वक किया जाना जो कोई लोक सेवक होते हुए, न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में कोई रिपोर्ट, आदेश, अधिमत या विनिश्चय, जिसका विधि के प्रतिकूल होना वह जानता हो, भ्रष्टतापूर्वक या विद्वेषपूर्वक देगा, या सुनाएगा, वह दोनों में से किसी भांति के…
पूरा पढ़ेंधारा 257. न्यायिक कार्यवाही में विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट आदि का लोक सेवक द्वारा अष्टतापूर्वक किया जाना ।
257. जो कोई लोक सेवक होते हुए, न्यायिक कार्यवाही के किसी प्रक्रम में कोई रिपोर्ट, आदेश, अधिमत या विनिश्चय, जिसका विधि के प्रतिकूल होना वह जानता हो, भ्र्ष्टतापूर्वक या विद्वेषपूर्वक देगा, या सुनाएगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया…
पूरा पढ़ें- IPC §21BNS §2(28)
लोक सेवक''।
परिभाषाएँ।
- IPC §83BNS §21
धारा 83 - सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य
सात से बारह वर्ष की आयु के अपरिपक्व बच्चे द्वारा किया गया कृत्य।
- IPC §175BNS §210
धारा 175 - दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख पेश करने का लोप
किसी लोक सेवक को दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में कानूनी रूप से बाध्य व्यक्ति द्वारा चूक करना।
- IPC §176BNS §211
धारा 176 - सूचना या इत्तिला देने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप
किसी लोक सेवक को सूचना या सूचना देने में कानूनी रूप से बाध्य व्यक्ति द्वारा चूक करना।
- IPC §177BNS §212
धारा 177 - मिथ्या इत्तिला देना
गलत जानकारी देना।
- IPC §178BNS §213
धारा 178 - शपथ या प्रतिज्ञान से इंकार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक् रूप से अपेक्षित किया जाए
लोक सेवक द्वारा विधिवत रूप से शपथ या प्रतिज्ञा लेने के लिए कहे जाने पर शपथ या प्रतिज्ञा लेने से इनकार करना।
- IPC §179BNS §214
धारा 179 - प्रश्न करने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक का उत्तर देने से इंकार करना
प्रश्न पूछने के लिए अधिकृत लोक सेवक के प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार करना।
- IPC §180BNS §215
धारा 180 - कथन पर हस्ताक्षर करने से इंकार
बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना।
- IPC §181BNS §216
धारा 181 - शपथ दिलाने या प्रतिज्ञान कराने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक के, या व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर मिथ्या कथन
लोक सेवक या शपथ दिलाने के लिए अधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर झूठा बयान देना।
- IPC §182BNS §217
धारा 182 - इस आशय से मिथ्या इत्तिला देना कि लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति की क्षति के लिए करे
किसी लोक सेवक को उसकी वैध शक्ति का दुरुपयोग करके किसी अन्य व्यक्ति को हानि पहुंचाने के इरादे से झूठी सूचना देना।
- IPC §183BNS §218
धारा 183 - लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा संपत्ति लिए जाने का प्रतिरोध
किसी लोक सेवक के वैध अधिकार द्वारा संपत्ति जब्त करने का प्रतिरोध।
- IPC §184BNS §219
धारा 184 - लोक सेवक के प्राधिकार द्वारा विक्रय के लिए प्रस्थापित की गई संपत्ति के विक्रय में बाधा उपस्थित करना
लोक सेवक के अधिकार द्वारा बिक्री के लिए प्रस्तुत संपत्ति की बिक्री में बाधा डालना।
- IPC §210BNS §247
धारा 210 - ऐसी राशि के लिए जो शोध्य नहीं है कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना
धारा 247. ऐसी राशि के लिए जो शोध्य नहीं है कपटपूर्वक डिक्री अभिप्राप्त करना ।
- IPC §211BNS §248
धारा 211 - क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप
धारा 248. क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप ।
- IPC §212BNS §249
धारा 212 - अपराधी को संश्रय देना
धारा 249. अपराधी को संश्रय देना ।
- IPC §213BNS §250
धारा 213 - अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना
धारा 250. अपराधी को दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए उपहार आदि लेना ।
- IPC §214BNS §251
धारा 214 - अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन
धारा 251. अपराधी के प्रतिच्छादन के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन ।
- IPC §215BNS §252
धारा 215 - चोरी की संपत्ति इत्यादि के वापस लेने में सहायता करने के लिए उपहार लेना
धारा 252. चोरी की संपत्ति इत्यादि के वापस लेने में सहायता करने के लिए उपहार लेना ।
- IPC §216BNS §253
धारा 216 - ऐसे अपराधी को संश्रय देना, जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है
धारा 253. ऐसे अपराधी को संश्रय देना, जो अभिरक्षा से निकल भागा है या जिसको पकड़ने का आदेश दिया जा चुका है।
- IPC §216ABNS §254
धारा 216A - लुटेरों या डाकुओं को संश्रय देने के लिए शास्ति
धारा 254. लुटेरो या डाकुओ को संश्रय देने के लिए शास्ति ।
- IPC §216BBNS §-
धारा 216B - धारा 212, धारा 216 और धारा 216क में “संश्रय” की परिभाषा
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IPC §216BBNS §- - IPC §217BNS §255
धारा 217 - लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा
धारा 255. लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निदेश की अवज्ञा ।
- IPC §218BNS §256
धारा 218 - किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना
धारा 256. किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को समपहरण से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना ।
- IPC §219BNS §257
धारा 219 - न्यायिक कार्यवाही में विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट आदि का लोक सेवक द्वारा भ्रष्टतापूर्वक किया जाना
धारा 257. न्यायिक कार्यवाही में विधि के प्रतिकूल रिपोर्ट आदि का लोक सेवक द्वारा अष्टतापूर्वक किया जाना ।
