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मजिस्ट्रेट सार्वजनिक उपद्रव की पुनरावृत्ति या निरंतरता पर रोक लगा सकता है।
जिला मजिस्ट्रेट या उप-विभागीय मजिस्ट्रेट, या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा इस संबंध में सशक्त कोई अन्य कार्यकारी मजिस्ट्रेट या पुलिस उपायुक्त, किसी भी व्यक्ति को भारतीय न्याय संहिता, 2023 या किसी विशेष या स्थानीय कानून में परिभाषित सार्वजनिक उपद्रव को दोहराने या जारी रखने से रोकने का आदेश दे सकता है।
पूरा पढ़ेंधारा 143. मजिस्ट्रेट लोक न्यूसेंस की पुनरावृत्ति या उसे चालू रखने का प्रतिषेध कर सकेगा
143. मजिस्ट्रेट लोक न्यूसेंस की पुनरावृत्ति या उसे चालू रखने का प्रतिषेध कर सकेगा कोई जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट, या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा इस निमित्त सशक्त किया गया कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट, किसी व्यक्ति को यह आदेश दे सकेगा कि वह ऐसे लोक न्यूसेंस की, जैसा भारतीय दंड संहिता (1860 का 45)…
पूरा पढ़ेंपुलिस को दिए गए बयान और उनका उपयोग।
(1) इस अध्याय के अंतर्गत किसी जांच के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा किसी पुलिस अधिकारी को दिया गया कोई भी बयान, यदि लिखित रूप में दर्ज किया जाता है, तो बयान देने वाले व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित नहीं किया जाएगा; और न ही ऐसा कोई बयान या उसका कोई अभिलेख, चाहे पुलिस डायरी में हो या किसी अन्य रूप में, या ऐसे बयान या अभिलेख का…
पूरा पढ़ेंधारा 162. पुलिस को दिए गए कथनों पर हस्ताक्षर न किया जाना: कथनों का साक्ष्य में उपयोग
162. पुलिस को दिए गए कथनों पर हस्ताक्षर न किया जाना: कथनों का साक्ष्य में उपयोग (1) इस अध्याय के अधीन अन्वेषण के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा किसी पुलिस अधिकारी से किए गए किसी कथन पर, यदि वह लेखबद्ध किया जाता है, उसे करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर नहीं होंगे; और न ऐसा कोई कथन या उसका कोई अभिलेख, चाहे वह पुलिस डायरी में…
पूरा पढ़ें- BNSS §162CRPC §143बदलाव हुआ
मजिस्ट्रेट सार्वजनिक उपद्रव की पुनरावृत्ति या निरंतरता पर रोक लगा सकता है।
धारा 143. मजिस्ट्रेट लोक न्यूसेंस की पुनरावृत्ति या उसे चालू रखने का प्रतिषेध कर सकेगा
- BNSS §181CRPC §162
पुलिस को दिए गए बयान और उनका उपयोग।
धारा 162. पुलिस को दिए गए कथनों पर हस्ताक्षर न किया जाना: कथनों का साक्ष्य में उपयोग
