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22 प्रविष्टियाँ
परिभाषाएँ।
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--- (1) "कार्य" से तात्पर्य कार्यों की श्रृंखला के साथ-साथ एक एकल कार्य से भी है; (2) "पशु" से तात्पर्य मनुष्य के अलावा किसी भी जीवित प्राणी से है; (3) "बाल" से तात्पर्य अठारह वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति से है; (4) "नकली".---वह व्यक्ति "नकली" कहलाता है जो किसी…
पूरा पढ़ेंसंख्या।
जब तक संदर्भ से अन्यथा स्पष्ट न हो, एकवचन संख्या वाले शब्दों में बहुवचन संख्या भी शामिल होती है, और बहुवचन संख्या वाले शब्दों में एकवचन संख्या भी शामिल होती है।
पूरा पढ़ेंअनेक अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए सजा की सीमा।
(1) जहाँ कोई अपराध ऐसे भागों से बना हो, जिनमें से कोई भाग स्वयं अपराध हो, तो अपराधी को ऐसे अपराधों में से एक से अधिक के दंड से दंडित नहीं किया जाएगा, जब तक कि ऐसा स्पष्ट रूप से प्रावधान न किया गया हो। (2) जहाँ--- (क) कोई भी चीज़ किसी ऐसे कानून की दो या दो से अधिक अलग-अलग परिभाषाओं के अंतर्गत आने वाला अपराध है जिसके…
पूरा पढ़ेंधारा 71 - कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए दण्ड की अवधि
कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए दण्ड की अवधि जहां कि कोई बात, जो अपराध है, ऐसे भागों से, जिनमें का कोई भाग स्वयं अपराध है, मिलकर बनी है, वहां अपराधी अपने ऐसे अपराधों में से एक से अधिक के दण्ड से दण्डित न किया जाएगा, जब तक कि ऐसा अभिव्यक्त रूप से उपबन्धित न हो । जहां कि कोई बात अपराधों को परिभाषित या दण्डित करने…
पूरा पढ़ेंभय या गलतफहमी के तहत दी गई सहमति।
ऐसी सहमति, इस संहिता की किसी भी धारा के अनुसार अभिप्रेत सहमति नहीं है,—। (क) यदि सहमति किसी व्यक्ति द्वारा चोट के भय से, या तथ्य की गलत धारणा के तहत दी गई हो, और यदि कार्य करने वाला व्यक्ति जानता हो, या उसके पास यह मानने का कारण हो, कि सहमति ऐसे भय या गलत धारणा के परिणामस्वरूप दी गई थी; या। (ख) यदि सहमति किसी ऐसे…
पूरा पढ़ेंधारा 90 - सम्मति, जिसके संबंध में यह ज्ञात हो कि वह भय या भ्रम के अधीन दी गई है
सम्मति, जिसके संबंध में यह ज्ञात हो कि वह भय या भ्रम के अधीन दी गई है कोई सम्मति ऐसी सम्मति नहीं है जैसी इस संहिता की किसी धारा से आशयित है, यदि वह सम्मति किसी व्यक्ति ने क्षतिभय के अधीन, या तथ्य के भ्रम के अधीन दी हो, और यदि कार्य करने वाला व्यक्ति यह जानता हो या उसके पास विश्वास करने का कारण हो कि ऐसे भय या भ्रम के…
पूरा पढ़ेंउन कृत्यों को बाहर रखा गया है जो किसी भी प्रकार की हानि से स्वतंत्र रूप से अपराध हैं।
धारा 25, 26 और 27 में दिए गए अपवाद उन कृत्यों पर लागू नहीं होते हैं जो किसी भी नुकसान से स्वतंत्र रूप से अपराध हैं, जो वे सहमति देने वाले व्यक्ति को या जिसकी ओर से सहमति दी गई है, को पहुंचा सकते हैं, या पहुंचाने का इरादा रखते हैं, या जिसके होने की संभावना ज्ञात है। चित्रण। गर्भपात कराना (जब तक कि यह महिला का जीवन…
पूरा पढ़ेंधारा 91 - ऐसे कार्यों का अपर्वजन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है
ऐसे कार्यों का अपर्वजन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है धारा 87, 88 और 89 के अपवादों का विस्तार उन कार्यो पर नहीं है जो उस अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध हैं जो उस व्यक्ति को, जो सम्मति देता है या जिसकी ओर से सम्मति दी जाती है, उन कार्यो से कारित हो, या कारित किए जाने का आशय हो, या कारित होने की संभाव्यता…
पूरा पढ़ेंबिना सहमति के किसी व्यक्ति के लाभ के लिए सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य।
कोई भी कार्य, सद्भावनापूर्वक किए जाने पर भी, उस व्यक्ति की सहमति के बिना भी, उस व्यक्ति को होने वाली किसी भी हानि के कारण अपराध नहीं है, यदि परिस्थितियाँ ऐसी हों कि उस व्यक्ति के लिए सहमति देना असंभव हो, या यदि वह व्यक्ति सहमति देने में असमर्थ हो, और उसका कोई अभिभावक या अन्य कानूनी रूप से प्रभारी व्यक्ति न हो जिससे…
पूरा पढ़ेंधारा 92 - सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य कोई बात जो किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक यद्यपी, उसकी सम्मति के बिना, की गई है, ऐसी किसी अपहानि के कारण, जो उस बात से उस व्यक्ति को कारित हो जाए, अपराध नहीं है, यदि परिस्थितियां ऐसी हों कि उस व्यक्ति के लिए यह असंभव हो कि वह अपनी…
पूरा पढ़ेंयह संचार सद्भावना से किया गया था।
सद्भावना से किया गया कोई भी संचार, उस व्यक्ति को होने वाली किसी भी हानि के कारण अपराध नहीं है, यदि वह संचार उस व्यक्ति के लाभ के लिए किया गया हो। चित्रण । सर्जन ए ने सद्भावनापूर्वक एक मरीज को अपनी राय बताई कि वह जीवित नहीं रह सकता। इस सदमे के कारण मरीज की मृत्यु हो गई। ए ने कोई अपराध नहीं किया, हालांकि वह जानता था कि…
पूरा पढ़ेंधारा 93 - सद्भावपूरवक दी गई संसूचना
सद्भावपूरवक दी गई संसूचना सद्भावपूर्वक दी गई संसूचना उस अपहानि के कारण अपराध नहीं है, जो उस व्यक्ति की हो जिसे वह दी गई है, यदि वह उस व्यक्ति के फायदे के लिए दी गई हो । द्रष्टांत : क, एक शल्यचिकित्सक, एक रोगी को सद्भावपूर्वक यह संसूचित कर्ता है कि उसकी राय में वह जीवित नहीं रह सकता । इस आघात के परिणामस्वरूप उस रोगी की…
पूरा पढ़ेंवह कृत्य जिसके लिए किसी व्यक्ति को धमकियों के बल पर विवश किया जाता है।
हत्या और राज्य के विरुद्ध मृत्युदंड से दंडनीय अपराधों को छोड़कर, कोई भी कार्य अपराध नहीं है यदि वह किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसे धमकियों के कारण ऐसा करने के लिए मजबूर किया जाता है, और धमकी देने के समय, यह आशंका होती है कि अन्यथा उस व्यक्ति की तत्काल मृत्यु हो जाएगी। बशर्ते कि कृत्य करने वाले व्यक्ति ने…
पूरा पढ़ेंधारा 94 - वह कार्य जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है
वह कार्य जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है हत्या और मृत्यु से दंडनीय उन अपराधों को जो राज्य के विरुद्ध है, छोड़कर कोई बात अपराध नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाए जो उसे करने के लिए ऐसी धमकियों से विवश किया गया हो जिनसे उस बात को करते समय उसको युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो गई हो…
पूरा पढ़ेंमामूली नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य।
कोई भी बात इस कारण से अपराध नहीं है कि वह किसी प्रकार की हानि पहुंचाती है, या पहुंचाने का इरादा रखती है, या यह ज्ञात है कि इससे हानि होने की संभावना है, यदि वह हानि इतनी मामूली है कि सामान्य समझ और स्वभाव वाला कोई भी व्यक्ति ऐसी हानि की शिकायत नहीं करेगा।
पूरा पढ़ेंमामूली नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य।
कोई भी बात इस कारण से अपराध नहीं है कि वह किसी प्रकार की हानि पहुंचाती है, या पहुंचाने का इरादा रखती है, या यह ज्ञात है कि इससे हानि होने की संभावना है, यदि वह हानि इतनी मामूली है कि सामान्य समझ और स्वभाव वाला कोई भी व्यक्ति ऐसी हानि की शिकायत नहीं करेगा।
पूरा पढ़ेंआत्मरक्षा में किए गए कार्य।
आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए किया गया कोई भी कार्य अपराध नहीं है।
पूरा पढ़ेंधारा 96 - प्राइवेट प्रतिरक्षा में की गई बातें
प्राइवेट प्रतिरक्षा में की गई बातें कोई बात अपराध नहीं है, जो प्राइवेट प्रेतिरक्षा के अधिकार के प्रयोग में की जाती है ।
पूरा पढ़ेंशरीर और संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार।
धारा 37 में निहित प्रतिबंधों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक व्यक्ति को बचाव का अधिकार है। (क) अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ति के शरीर को मानव शरीर को प्रभावित करने वाले किसी भी अपराध के विरुद्ध; (ख) स्वयं की या किसी अन्य व्यक्ति की चल या अचल संपत्ति के विरुद्ध, किसी ऐसे कृत्य के विरुद्ध जो चोरी, डकैती, उपद्रव या आपराधिक…
पूरा पढ़ेंधारा 97 - शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार
शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार धारा 99 में अंतर्विष्ट निर्बंधनों के अध्यधीन, हर व्यक्ति को अधिकार है कि, वह - पहला - मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले किसी अपराध के विरुद्ध अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की प्रतिरक्षा करे ; दूसरा - किसी ऐसे कार्य के विरुद्ध, जो चोरी, लूट, रिष्टि या आप्राधिक…
पूरा पढ़ेंमानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति आदि के कृत्यों के विरुद्ध आत्मरक्षा का अधिकार।
जब कोई ऐसा कार्य, जो अन्यथा निश्चित रूप से अपराध होता, उस कार्य को करने वाले व्यक्ति की कम उम्र, अपरिपक्व बुद्धि, मानसिक अस्वस्थता या नशे की हालत के कारण, या उस व्यक्ति की किसी गलतफहमी के कारण, वह अपराध नहीं होता, तो प्रत्येक व्यक्ति को उस कार्य के विरुद्ध आत्मरक्षा का वही अधिकार होता है जो उसे तब होता जब वह कार्य…
पूरा पढ़ेंधारा 98 - ऐसे व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकॄतचित्त आदि हो
ऐसे व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकॄतचित्त आदि हो जब कि कोई कार्य जो अन्यथा कोई अपराध होता, उस कार्य को करने वाले कार्य के बालकपन, समझ की परिपक्वता के अभाव, चित्तविकॄति या मत्तता के कारण, या उस कार्य के किसी भरम के कारण, वही अपराध नहीं है, तब हर कार्य उस कार्य के विरुदध प्राइवेट…
पूरा पढ़ेंऐसे कृत्य जिनके विरुद्ध आत्मरक्षा का कोई अधिकार नहीं है।
(1) आत्मरक्षा का कोई अधिकार नहीं है, — (क) किसी ऐसे कृत्य के विरुद्ध, जिससे मृत्यु या गंभीर चोट की आशंका उचित रूप से उत्पन्न न हो, यदि वह कृत्य किसी लोक सेवक द्वारा सद्भावनापूर्वक अपने पद के दायित्व का निर्वहन करते हुए किया गया हो, या करने का प्रयास किया गया हो, भले ही वह कृत्य कानून द्वारा सख्ती से न्यायसंगत न हो;…
पूरा पढ़ेंधारा 99 - कार्य, जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है
कार्य, जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है यदि कोई कार्य, जिससे मृत्यु या घोर उपहति की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित नहीं होती, सद्भावपूर्वक अपने पदाभास में कार्य करते हुए लोक सेवक द्वारा किया जाता है या किए जाने का प्रयत्न किया जाता है तो उस कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं…
पूरा पढ़ेंगर्भपात कराने के इरादे से किए गए कृत्य के कारण हुई मृत्यु।
(1) जो कोई गर्भवती स्त्री का गर्भपात कराने के इरादे से ऐसा कोई कार्य करता है जिससे ऐसी स्त्री की मृत्यु हो जाती है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। (2) जहाँ उपधारा (1) में निर्दिष्ट कार्य स्त्री की सहमति के बिना किया जाता है, तो वह या तो…
पूरा पढ़ेंधारा 314 - गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मॄत्यु
गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मॄत्यु जो कोई गर्भवती स्त्री का गर्भपात कारित करने के आशय से कोई ऐसा कार्य करेगा, जिससे ऐसी स्त्री की मॄत्यु कारित हो जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा । यदि वह…
पूरा पढ़ेंकिसी बच्चे को जीवित जन्म लेने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु का कारण बनने के इरादे से किया गया कार्य।
जो कोई भी किसी बच्चे के जन्म से पहले ऐसा कोई कार्य करता है जिससे वह बच्चा जीवित पैदा न हो या जन्म के बाद मर जाए, और ऐसे कार्य से वह बच्चा जीवित पैदा न हो पाए या जन्म के बाद मर जाए, तो यदि ऐसा कार्य माता का जीवन बचाने के उद्देश्य से सद्भावनापूर्वक न किया गया हो, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के…
पूरा पढ़ेंधारा 315 - शिशु का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मॄत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य
शिशु का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मॄत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य जो कोई किसी शिशु के जन्म से पूर्व कोई कार्य इस आशय से करेगा कि उस शिशु का जीवित पैदा होना तद्द्वारा रोका जाए या जन्म के पश्चात् तद्द्वारा उसकी मॄत्यु कारित हो जाए, और ऐसे कार्य से उस शिशु का जीवित पैदा होना रोकेगा, या उसके…
पूरा पढ़ेंगर्भ में पल रहे शिशु की मृत्यु का कारण बनना, जो कि गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है।
जो कोई भी ऐसी परिस्थितियों में कोई ऐसा कार्य करता है, जिससे मृत्यु होने पर वह गैर इरादतन हत्या का दोषी होगा, और ऐसे कार्य से किसी जीवित अजन्मे बच्चे की मृत्यु का कारण बनता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। चित्रण। ए, यह जानते हुए कि…
पूरा पढ़ेंगर्भ में पल रहे शिशु की मृत्यु का कारण बनना, जो कि गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है।
जो कोई भी ऐसी परिस्थितियों में कोई ऐसा कार्य करता है, जिससे मृत्यु होने पर वह गैर इरादतन हत्या का दोषी होगा, और ऐसे कार्य से किसी जीवित अजन्मे बच्चे की मृत्यु का कारण बनता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दस वर्ष तक की अवधि के लिए दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा। चित्रण ए, यह जानते हुए कि उसके…
पूरा पढ़ेंबारह वर्ष से कम आयु के बच्चे को उसके माता-पिता या देखभाल करने वाले व्यक्ति द्वारा छोड़ देना और उसे असुरक्षित छोड़ देना।
जो कोई भी बारह वर्ष से कम आयु के बच्चे का पिता या माता हो, या ऐसे बच्चे की देखभाल करता हो, यदि वह बच्चे को पूरी तरह से त्यागने के इरादे से किसी स्थान पर छोड़ देता है, तो उसे किसी भी प्रकार के कारावास से सात वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से दंडित किया जाएगा। स्पष्टीकरण.—इस धारा का उद्देश्य अपराधी पर…
पूरा पढ़ेंधारा 317 - शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के शिशु का अरक्षित डाल दिया जाना और परित्याग
शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के शिशु का अरक्षित डाल दिया जाना और परित्याग जो कोई बारह वर्ष से कम आयु के शिशु का पिता या माता होते हुए, या ऐसे शिशु की देखरेख का भार रखते हुए, ऐसे शिशु का पूर्णतः परित्याग करने के आशय से उस शिशु को किसी स्थान में अरक्षित डाल देगा या…
पूरा पढ़ेंमृत शरीर को गुप्त रूप से ठिकाने लगाकर जन्म को छिपाना।
जो कोई भी किसी बच्चे के मृत शरीर को गुप्त रूप से दफनाकर या किसी अन्य तरीके से उसका निपटान करके, चाहे वह बच्चा जन्म से पहले, बाद में या जन्म के दौरान मर गया हो, जानबूझकर उस बच्चे के जन्म को छुपाता है या छुपाने का प्रयास करता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दो वर्ष तक की अवधि के लिए, या जुर्माने से, या दोनों से…
पूरा पढ़ेंधारा 318 - मॄत शरीर के गुप्त व्ययन द्वारा जन्म छिपाना
मॄत शरीर के गुप्त व्ययन द्वारा जन्म छिपाना जो कोई किसी शिशु के मॄत शरीर को गुप्त रूप से गाड़कर या अन्यथा उसका व्ययन करके, चाहे ऐसे शिशु की मॄत्यु उसके जन्म से पूर्व या पश्चात् या जन्म के दौरान में हुई हो, ऐसे शिशु के जन्म को साशय छिपाएगा या छिपाने का प्रयास करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि…
पूरा पढ़ेंकिसी अपराध को अंजाम देने के लिए बच्चे को काम पर रखना, नियोजित करना या संलग्न करना।
जो कोई भी किसी बच्चे को अपराध करने के लिए काम पर रखता है, नियुक्त करता है या उसे काम पर लगाता है, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जो तीन वर्ष से कम नहीं होगा बल्कि दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी लगाया जाएगा; और यदि अपराध किया जाता है तो उसे उस अपराध के लिए निर्धारित दंड से भी दंडित किया…
पूरा पढ़ेंनई धारा
New Section
बच्चे का अपहरण।
जो कोई भी किसी भी तरह से किसी बच्चे को किसी स्थान से जाने के लिए प्रेरित करता है या ऐसा कोई कार्य करने के लिए उकसाता है जिससे वह बच्चा किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर या बहकाया जा सके, या यह जानते हुए कि ऐसा होने की संभावना है, तो उसे दस वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जाएगा और उस पर…
पूरा पढ़ेंधारा 366A - अप्राप्तवय लड़की का उपापन
अप्राप्तवय लड़की का उपापन जो कोई अठारह वर्ष से कम आयु की अप्राप्तवय लड़की को अन्य व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिएविवश या विलुब्ध करने के आशय से या तद्द्वारा विवश या विलुब्ध किया जाएगा यह सम्भाव्य जानते हुए ऐसी लड़की को किसी स्थान से जाने को या कोई का¹ करने को किसी भी साधन द्वारा उत्प्रेरित करेगा, वह कारावास से…
पूरा पढ़ेंदस वर्ष से कम आयु के बच्चे का अपहरण करना या उसे अगवा करना, ताकि उससे चोरी की जा सके।
जो कोई भी दस वर्ष से कम आयु के किसी बच्चे का अपहरण करता है या उसे अगवा करता है, इस इरादे से कि उस बच्चे से बेईमानी से कोई चल संपत्ति ले ली जाए, उसे किसी भी प्रकार के कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि सात वर्ष तक बढ़ सकती है, और वह जुर्माने का भी हकदार होगा।
पूरा पढ़ेंधारा 369 - दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण
दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण जो कोई दस वर्ष से कम आयु के किसी शिशु का इस आशय से व्यवहरण या अपहरण करेगा कि ऐसे शिशु के शरीर पर से कोई जंगम संम्पत्ति बेईमानी से ले ले, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और…
पूरा पढ़ेंवेश्यावृत्ति आदि के उद्देश्य से बच्चों को बेचना।
जो कोई भी किसी बच्चे को इस इरादे से बेचता है, किराए पर देता है या किसी अन्य तरीके से उसका निपटान करता है कि उस बच्चे को किसी भी उम्र में वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति के साथ अवैध यौन संबंध के लिए या किसी गैरकानूनी और अनैतिक उद्देश्य के लिए नियोजित या उपयोग किया जाएगा, या यह जानते हुए कि उस बच्चे को किसी भी उम्र में ऐसे…
पूरा पढ़ेंधारा 372 - वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय को बेचना
वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय को बेचना जो कोई अठारह वर्ष के कम आयु के किसी व्यक्ति को इस आशय से कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी वेश्यावॄत्ति या किसी व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिए या किसी विधिविरुद्ध और दुराचारिक प्रयोजन के लिए काम में लाया या उपयोग किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए कि ऐसा व्यक्ति,…
पूरा पढ़ेंवेश्यावृत्ति आदि के उद्देश्य से बच्चे को खरीदना।
जो कोई भी किसी बच्चे को इस इरादे से खरीदता है, किराए पर लेता है या किसी अन्य तरीके से अपने कब्जे में लेता है कि उस बच्चे को किसी भी उम्र में वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति के साथ अवैध यौन संबंध के लिए या किसी गैरकानूनी और अनैतिक उद्देश्य के लिए नियोजित या उपयोग किया जाएगा, या यह जानते हुए कि उस बच्चे को किसी भी उम्र में…
पूरा पढ़ेंधारा 373 - वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय का खरीदना
वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय का खरीदना जो कोई, अठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को इस आशय से कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी वेश्यावॄत्ति या किसी व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिए या किसी विधिविरुद्ध दुराचारिक प्रयोजन के लिए काम में लाया या उपयोग किया जाए या यह संभाव्य जानते हुए कि ऐसा व्यक्ति…
पूरा पढ़ें- BNS §2(22)IPC §9
परिभाषाएँ।
संख्या।
- BNS §9IPC §71
अनेक अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए सजा की सीमा।
धारा 71 - कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए दण्ड की अवधि
- BNS §28IPC §90
भय या गलतफहमी के तहत दी गई सहमति।
धारा 90 - सम्मति, जिसके संबंध में यह ज्ञात हो कि वह भय या भ्रम के अधीन दी गई है
- BNS §29IPC §91
उन कृत्यों को बाहर रखा गया है जो किसी भी प्रकार की हानि से स्वतंत्र रूप से अपराध हैं।
धारा 91 - ऐसे कार्यों का अपर्वजन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है
- BNS §30IPC §92
बिना सहमति के किसी व्यक्ति के लाभ के लिए सद्भावनापूर्वक किया गया कार्य।
धारा 92 - सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
- BNS §31IPC §93
यह संचार सद्भावना से किया गया था।
धारा 93 - सद्भावपूरवक दी गई संसूचना
- BNS §32IPC §94
वह कृत्य जिसके लिए किसी व्यक्ति को धमकियों के बल पर विवश किया जाता है।
धारा 94 - वह कार्य जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है
- BNS §33IPC §95
मामूली नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य।
- BNS §34IPC §96
आत्मरक्षा में किए गए कार्य।
धारा 96 - प्राइवेट प्रतिरक्षा में की गई बातें
- BNS §35IPC §97
शरीर और संपत्ति की निजी रक्षा का अधिकार।
धारा 97 - शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार
- BNS §36IPC §98
मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति आदि के कृत्यों के विरुद्ध आत्मरक्षा का अधिकार।
धारा 98 - ऐसे व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकॄतचित्त आदि हो
- BNS §37IPC §99
ऐसे कृत्य जिनके विरुद्ध आत्मरक्षा का कोई अधिकार नहीं है।
धारा 99 - कार्य, जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है
- BNS §90IPC §314
गर्भपात कराने के इरादे से किए गए कृत्य के कारण हुई मृत्यु।
धारा 314 - गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मॄत्यु
- BNS §91IPC §315
किसी बच्चे को जीवित जन्म लेने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु का कारण बनने के इरादे से किया गया कार्य।
धारा 315 - शिशु का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मॄत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य
- BNS §92IPC §316
गर्भ में पल रहे शिशु की मृत्यु का कारण बनना, जो कि गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है।
- BNS §93IPC §317
बारह वर्ष से कम आयु के बच्चे को उसके माता-पिता या देखभाल करने वाले व्यक्ति द्वारा छोड़ देना और उसे असुरक्षित छोड़ देना।
धारा 317 - शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के शिशु का अरक्षित डाल दिया जाना और परित्याग
- BNS §94IPC §318
मृत शरीर को गुप्त रूप से ठिकाने लगाकर जन्म को छिपाना।
धारा 318 - मॄत शरीर के गुप्त व्ययन द्वारा जन्म छिपाना
- BNS §95IPC §New Section
किसी अपराध को अंजाम देने के लिए बच्चे को काम पर रखना, नियोजित करना या संलग्न करना।
नई धारा
BNS §95IPC §New Section - BNS §96IPC §366A
बच्चे का अपहरण।
धारा 366A - अप्राप्तवय लड़की का उपापन
- BNS §97IPC §369
दस वर्ष से कम आयु के बच्चे का अपहरण करना या उसे अगवा करना, ताकि उससे चोरी की जा सके।
धारा 369 - दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण
- BNS §98IPC §372
वेश्यावृत्ति आदि के उद्देश्य से बच्चों को बेचना।
धारा 372 - वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय को बेचना
- BNS §99IPC §373बदलाव हुआ
वेश्यावृत्ति आदि के उद्देश्य से बच्चे को खरीदना।
धारा 373 - वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय का खरीदना
