TM Act 159अध्याय XIII · Miscellaneous
धारा 159 · निरसन और व्यावृत्तियां
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) व्यापार और पण्य-वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) निरसित किया जाता है ।
(2) निरसन की बाबत साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, व्यापार और पण्य-वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) के अधीन निकाली गई अधिसूचना, बनाया गया नियम, किया गया आदेश, की गई अपेक्षा, किया गया रजिस्ट्रीकरण, दिया गया प्रमाणपत्र, दी गई सूचना, किया गया विनिश्चय, किया गया अवधारण, दिया गया निदेश, अनुमोदन, प्राधिकार, दी गई सम्मति, किया गया आवेदन, की गई प्रार्थना या बात यदि इस अधिनियम के प्रारंभ में प्रवृत्त है तो, वह प्रवृत्त बनी रहेगी और इस प्रकार प्रभावी होगी मानो वह इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन निकाली गई, बनाया गया, किया गया, की गई, दिया गया या दी गई है ।
(3) इस अधिनियम के उपबंध, इस अधिनियम के प्रारंभ के समय लंबित व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए किसी आवेदन को और उस पर किसी पारिणामिक कार्यवाही को और उसके अनुसरण में अनुदत्त किसी रजिस्ट्रीकरण को लागू होंगे ।
(4) धारा 100 के उपबंधों के अधीन रहते हुए और इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रारंभ पर किसी न्यायालय में लंबित कोई विधिक कार्यवाही उस न्यायालय में जारी रखी जाएगी मानो यह अधिनियम पारित न हुआ हो ।
(5) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का विशिष्ट उपयोग, इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व रजिस्ट्रीकृत किसी व्यापार चिह्न का अतिलंघन नहीं है, वहां उस चिह्न का सतत उपयोग इस अधिनियम के अधीन अतिलंघन नहीं होगा ।
(6) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे व्यापार चिह्न के, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व रजिस्ट्रीकृत है, रजिस्ट्रीकरण के अवसान की तारीख, सात वर्ष की अवधि के ठीक बाद की वह तारीख होगी, जिसके लिए इसे रजिस्ट्रीकृत या नवीकृत किया गया था:
परन्तु व्यापार और पुण्य-वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) की धारा 47 में निर्दिष्ट प्रतिरक्षात्मक व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण ऐसे प्रारम्भ के पांच वर्ष की समाप्ति के ठीक बाद की या उस अवधि की समाप्ति के ठीक बाद की, जिसके लिए इसे रजिस्ट्रीकृत या नवीकृत किया गया था, इनमें से जो भी पहले हो, तारीख को प्रभावी नहीं रहेगा ।
(2) निरसन की बाबत साधारण खंड अधिनियम, 1897 (1897 का 10) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, व्यापार और पण्य-वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) के अधीन निकाली गई अधिसूचना, बनाया गया नियम, किया गया आदेश, की गई अपेक्षा, किया गया रजिस्ट्रीकरण, दिया गया प्रमाणपत्र, दी गई सूचना, किया गया विनिश्चय, किया गया अवधारण, दिया गया निदेश, अनुमोदन, प्राधिकार, दी गई सम्मति, किया गया आवेदन, की गई प्रार्थना या बात यदि इस अधिनियम के प्रारंभ में प्रवृत्त है तो, वह प्रवृत्त बनी रहेगी और इस प्रकार प्रभावी होगी मानो वह इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन निकाली गई, बनाया गया, किया गया, की गई, दिया गया या दी गई है ।
(3) इस अधिनियम के उपबंध, इस अधिनियम के प्रारंभ के समय लंबित व्यापार चिह्न के रजिस्ट्रीकरण के लिए किसी आवेदन को और उस पर किसी पारिणामिक कार्यवाही को और उसके अनुसरण में अनुदत्त किसी रजिस्ट्रीकरण को लागू होंगे ।
(4) धारा 100 के उपबंधों के अधीन रहते हुए और इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के प्रारंभ पर किसी न्यायालय में लंबित कोई विधिक कार्यवाही उस न्यायालय में जारी रखी जाएगी मानो यह अधिनियम पारित न हुआ हो ।
(5) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी रजिस्ट्रीकृत व्यापार चिह्न का विशिष्ट उपयोग, इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व रजिस्ट्रीकृत किसी व्यापार चिह्न का अतिलंघन नहीं है, वहां उस चिह्न का सतत उपयोग इस अधिनियम के अधीन अतिलंघन नहीं होगा ।
(6) उपधारा (2) में किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे व्यापार चिह्न के, जो इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व रजिस्ट्रीकृत है, रजिस्ट्रीकरण के अवसान की तारीख, सात वर्ष की अवधि के ठीक बाद की वह तारीख होगी, जिसके लिए इसे रजिस्ट्रीकृत या नवीकृत किया गया था:
परन्तु व्यापार और पुण्य-वस्तु चिह्न अधिनियम, 1958 (1958 का 43) की धारा 47 में निर्दिष्ट प्रतिरक्षात्मक व्यापार चिह्न का रजिस्ट्रीकरण ऐसे प्रारम्भ के पांच वर्ष की समाप्ति के ठीक बाद की या उस अवधि की समाप्ति के ठीक बाद की, जिसके लिए इसे रजिस्ट्रीकृत या नवीकृत किया गया था, इनमें से जो भी पहले हो, तारीख को प्रभावी नहीं रहेगा ।
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