PE Act 10अध्याय III · Punishment for Offences
धारा 10 · इस अधिनियम के अंतर्गत अपराधों के लिए दंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के तहत अनुचित साधनों का सहारा लेने और अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम तीन वर्ष की कारावास की सजा दी जाएगी, जिसे पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और दस लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (45 ऑफ 2023) के प्रावधानों के अनुसार कारावास की अतिरिक्त सजा लगाई जाएगी।
बशर्ते कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 (45 ऑफ 2023) के लागू होने तक उक्त अधिनियम के स्थान पर भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) के प्रावधान लागू होंगे।
(2) सेवा प्रदाता पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा और परीक्षा की आनुपातिक लागत भी ऐसे सेवा प्रदाता से वसूल की जाएगी और उसे चार साल की अवधि के लिए किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी सौंपे जाने से भी रोक दिया जाएगा।
(3) यदि जांच के दौरान यह सिद्ध हो जाता है कि इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध किसी निदेशक, वरिष्ठ प्रबंधन या सेवा प्रदाता फर्म के प्रभारी व्यक्तियों की सहमति या मिलीभगत से किया गया है, तो उसे कम से कम तीन वर्ष की कारावास की सजा दी जाएगी, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और उस पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (45 ऑफ 2023) के प्रावधानों के अनुसार कारावास की अतिरिक्त सजा दी जाएगी।
बशर्ते कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 (45 ऑफ 2023) के लागू होने तक उक्त अधिनियम के स्थान पर भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) के प्रावधान लागू होंगे।
(4) इस धारा में निहित कोई भी बात ऐसे व्यक्ति को अधिनियम के तहत किसी दंड के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराएगी, यदि वह यह सिद्ध कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था और उसने ऐसे अपराध को रोकने के लिए सभी उचित सावधानी बरती थी।
बशर्ते कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 (45 ऑफ 2023) के लागू होने तक उक्त अधिनियम के स्थान पर भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) के प्रावधान लागू होंगे।
(2) सेवा प्रदाता पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा और परीक्षा की आनुपातिक लागत भी ऐसे सेवा प्रदाता से वसूल की जाएगी और उसे चार साल की अवधि के लिए किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी सौंपे जाने से भी रोक दिया जाएगा।
(3) यदि जांच के दौरान यह सिद्ध हो जाता है कि इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध किसी निदेशक, वरिष्ठ प्रबंधन या सेवा प्रदाता फर्म के प्रभारी व्यक्तियों की सहमति या मिलीभगत से किया गया है, तो उसे कम से कम तीन वर्ष की कारावास की सजा दी जाएगी, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और उस पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (45 ऑफ 2023) के प्रावधानों के अनुसार कारावास की अतिरिक्त सजा दी जाएगी।
बशर्ते कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 (45 ऑफ 2023) के लागू होने तक उक्त अधिनियम के स्थान पर भारतीय दंड संहिता (45 ऑफ 1860) के प्रावधान लागू होंगे।
(4) इस धारा में निहित कोई भी बात ऐसे व्यक्ति को अधिनियम के तहत किसी दंड के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराएगी, यदि वह यह सिद्ध कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था और उसने ऐसे अपराध को रोकने के लिए सभी उचित सावधानी बरती थी।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 10 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 3 वर्ष
- जुर्माना
- ₹1,00,00,000
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
