NIA Act 13अध्याय IV · Special Courts
धारा 13 · विशेष न्यायालयों का अधिकार क्षेत्र।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) संहिता में किसी बात के होते हुए भी, एजेंसी द्वारा जांचे गए प्रत्येक अनुसूचित अपराध की सुनवाई केवल उस विशेष न्यायालय द्वारा की जाएगी जिसके स्थानीय क्षेत्राधिकार में वह अपराध किया गया था।
(2) यदि किसी राज्य में व्याप्त स्थिति की तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए,—
(क) निष्पक्ष, तटस्थ या शीघ्र सुनवाई संभव नहीं है; या
(ख) यदि इससे शांति भंग हो या अभियुक्त, गवाहों, लोक अभियोजक या विशेष न्यायालय के न्यायाधीश या उनमें से किसी की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो, तो मुकदमा चलाना संभव नहीं है; या
(ग) अन्यथा यह न्याय के हित में नहीं है,
सर्वोच्च न्यायालय किसी विशेष न्यायालय के समक्ष लंबित किसी भी मामले को उस राज्य के भीतर या किसी अन्य राज्य में स्थित किसी अन्य विशेष न्यायालय में स्थानांतरित कर सकता है और उच्च न्यायालय उस राज्य में स्थित किसी विशेष न्यायालय के समक्ष लंबित किसी भी मामले को उस राज्य के भीतर स्थित किसी अन्य विशेष न्यायालय में स्थानांतरित कर सकता है।
(3) सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार या किसी हितधारक पक्ष के आवेदन पर इस धारा के अंतर्गत कार्रवाई कर सकता है और ऐसा कोई भी आवेदन प्रस्ताव द्वारा किया जाएगा, जो कि, जब आवेदक भारत का अटॉर्नी-जनरल हो, को छोड़कर, हलफनामे या प्रतिज्ञान द्वारा समर्थित होगा।
(2) यदि किसी राज्य में व्याप्त स्थिति की तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए,—
(क) निष्पक्ष, तटस्थ या शीघ्र सुनवाई संभव नहीं है; या
(ख) यदि इससे शांति भंग हो या अभियुक्त, गवाहों, लोक अभियोजक या विशेष न्यायालय के न्यायाधीश या उनमें से किसी की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो, तो मुकदमा चलाना संभव नहीं है; या
(ग) अन्यथा यह न्याय के हित में नहीं है,
सर्वोच्च न्यायालय किसी विशेष न्यायालय के समक्ष लंबित किसी भी मामले को उस राज्य के भीतर या किसी अन्य राज्य में स्थित किसी अन्य विशेष न्यायालय में स्थानांतरित कर सकता है और उच्च न्यायालय उस राज्य में स्थित किसी विशेष न्यायालय के समक्ष लंबित किसी भी मामले को उस राज्य के भीतर स्थित किसी अन्य विशेष न्यायालय में स्थानांतरित कर सकता है।
(3) सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार या किसी हितधारक पक्ष के आवेदन पर इस धारा के अंतर्गत कार्रवाई कर सकता है और ऐसा कोई भी आवेदन प्रस्ताव द्वारा किया जाएगा, जो कि, जब आवेदक भारत का अटॉर्नी-जनरल हो, को छोड़कर, हलफनामे या प्रतिज्ञान द्वारा समर्थित होगा।
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